देहरादून। उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पदों के चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 7 अगस्त को चुनाव संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही हरिद्वार जिला छोड़ बाकी प्रदेश के 12 जिलों के जिला और क्षेत्र पंचायतों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। जो मतगणना प्रक्रिया संपन्न होने तक लागू रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 14 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। इसके बाद 14 अगस्त को ही मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दृष्टिगत प्रदेश के 12 जिलों में सदस्य ग्राम पंचायत, प्रधान ग्राम पंचायत, सदस्य क्षेत्र पंचायत और सदस्य जिला पंचायत के पदों के लिए दो चरणों में मतदान की प्रक्रिया 24 और 28 जुलाई को संपन्न हुई थी। इसके साथ ही 31 जुलाई को मतगणना प्रक्रिया शुरू हुई थी। ऐसे में अब राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ ही क्षेत्र पंचायतों के प्रमुखों, ज्येष्ठ उप प्रमुखों और कनिष्ठ उप प्रमुखों के पदों पर चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार, 11 अगस्त को सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक नामांकन की तिथि रखी गई है। 11 अगस्त को ही दोपहर 3रू30 बजे से कार्य समाप्ति तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 12 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नाम वापसी की तिथि रखी गई है। इसके बाद 14 अगस्त को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक मतदान की प्रक्रिया चलेगी। साथ ही 14 अगस्त को ही मतदान की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जो मतगणना संपन्न होने तक चलेगी।आगे पढ़ें
उत्तरकाशी आपदा, , अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
देहरादून। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि धराली में प्राकृतिक आपदा को लेकर अगर किसी ने अफवाह फैलायी तो उसके खिलाफ आपदा अधिनियम के तहत कडी कार्रवाई की जायेगी। आज यहां जिले के धराली में प्राकृतिक आपदा को लेकर अगर कोई अफवाह फैलाता है तो पुलिस संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपदा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई करेगी। इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों को सोशल मीडिया पर भी लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने आम लोगों से भी किसी भी प्रकार की अफवाहों से सावधान रहने की अपील करते हुए ऐसे लोगों की सूचना तत्काल प्रशासन को देने का अनुरोध किया है। धराली आपदा को लेकर कुछ लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट और वीडियो के माध्यम से झूठी सूचनाएं देकर आम जनता को गुमराह कर रहे हैं। शासन प्रशासन ने इसका संज्ञान लेते हुए ऐसे लोगों के खिलाफ आपदा एक्ट के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि आपदा की इस कठिन घड़ी में लोगों के बीच भय, भ्रम और अराजकता फैलाने वाली गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।आगे पढ़ेंउत्तरकाशी आपदा, सीएम धामी जीरो ग्राउंड पर, रेस्क्यू की संभाली कमान
50 घंटे बाद गंगनानी व हर्षिल तक ही बन सका रास्ताहेली सेवा से बचाव व राहत कार्याे में आई तेजी
300 के आसपास पर्यटकों व 16 घायल एयरलिफ
उत्तरकाशी। धराली में आई प्राकृतिक आपदा को आज तीन दिन का समय बीत चुका है। इस आपदा के साथ नेशनल हाईवेकृ94 यानी गंगोत्री हाईवे को हुए भारी नुकसान के कारण आज तीसरे दिन भी धराली तक सड़क मार्ग से पहुंचने की कोशिशें सफल नहीं हो सकी। लेकिन मौसम के साफ होने के कारण आज हेली सेवाओं के संचालन का रास्ता जरूर खुल गया। जिससे प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान और मदद टीमों के पहुंचने से बचाव व राहत कार्याे में तेजी जरूर आ सकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर बचाव व राहत कार्य की कमान खुद संभाल ली है। आज वह न सिर्फ पीड़ितों व प्रभावित लोगों से मिले बल्कि अस्पताल जाकर घायलों का हाल भी उन्होंने जाना। धामी ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा बैठक भी की तथा जरूरी दिशा निर्देश भी दिए हैं। हेली सेवाओं के जरिए उत्तरकाशी से एनडीआरएफ की टीम व डॉक्टरों की टीम के अलावा अधिकारी भी धराली पहुंच गए हैं तथा दलदल में अब दबे लोगों की खोजबीन का काम भी शुरू हो गया है। हेली सेवा उत्तरकाशी से जरूरी सामान व बचाव राहत दलों को धराली ले जा रही है तथा उधर से प्रभावितों को लाने का काम भी किया जा रहा है।धराली से ऊपर गंगोत्री धाम की तरफ भमोली गांव में फंसे हुए यात्रियों को रेस्क्यू कर उन्हें हर्षिल के मताली हेलीपैड पर लाया जा रहा है अब तक 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित लाया जा चुका है वहीं 16 घायलों को एयरलिफ्ट कर लाया जा चुका है। कल सेना के चिनूक की सेवाएं बाधित रही थी लेकिन अब चिनूक हर्षिल तक पहुंच चुका है। गंभीर घायलों को रेस्क्यू कर एम्स और जॉलीग्रांट लाया गया है। सीएम ने निर्देश दिए हैं कि जब तक मौसम साफ है हेली सर्विस को जारी रखा जाए।
आपदा को 50 घंटे बीत जाने के बाद भी सड़क मार्ग से आज भी धराली तक पहुंचने का रास्ता साफ नहीं हो सका। भटवाड़ी में दो स्थानों पर हाईवे को ठीक कर लिया गया है लेकिन अभी गंगनानी में भागीरथी पर पुल बनाने का काम नहीं होने से गंगनानी से आगे नहीं जाया जा सकता है। सेना पुल निर्माण का काम शुरू कर चुकी है उधर हर्षिल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग खुल गया है। सेना व एनडीआरएफ अब सैटेलाइट फोन के साथ धराली में काम पर जुटी है जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान भी संभव हो गया है। सुरक्षा बल और बचाव राहत के लिए धराली पहुंची टीमों द्वारा दलदल में जिंदगी की तलाश शुरू कर दी गई है लेकिन 3 दिन बाद कितनी जानें बचाई जा सकेगी? यह अभी भी सवाल है।
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धराली-हर्षिल क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी

देहरादून। धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के बाद राज्य आपदा प्रतिवादन बल व उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा स्थानीय प्रशासन, वायुसेना,एनडीआरएफ व अन्य एजेंसियों के साथ राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
आज यहां उत्तरकाशी जनपद के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के बाद, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) उत्तराखंड पुलिस द्वारा स्थानीय प्रशासन, आईटीबीपी, वायुसेना, एनडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक दर्जनों लोगों को हेलीकॉप्टर की सहायता से सुरक्षित रूप से धराली–हर्षिल से आईटीबीपी मातली शिविर एवं जॉलीग्रांट (देहरादून) हेलीपैड तक शिफ्ट किया गया है। इस कार्य में विशेष रूप से चिनूक और एमआईकृ17 जैसे एयरलिफ्टिंग संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में यह रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री, पेयजल, दवाइयां एवं खाघान्न हेलीकॉप्टर के माध्यम से पहुंचाए जा रहे हैं ताकि किसी को भी आवश्यक सामग्री की कमी न हो। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक की जान की सुरक्षा, त्वरित चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जाए। एसडीआरएफ की टीमें निरंतर जोखिम उठाकर पहाड़ी और कठिन क्षेत्रों में भी पहुंच बना रही हैं, जिससे हर जरूरतमंद व्यक्ति तक राहत समय पर पहुंच सके। राज्य सरकार आपदा की इस घड़ी में प्रत्येक प्रभावित नागरिक के साथ खड़ी है और ष्राहत, बचाव एवं पुनर्वासष् को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम तेजी से उठा रही है।आगे पढ़ेंलगातार दरक रहे पहाड़, नैनीताल में भू-स्खलन का खतरा

नैनीताल। नैनीताल. खूबसूरत शहर अब लगातार दरकते पहाड़ों और बढ़ते भूस्खलन के कारण खतरे में नजर आने लगा है। बीते कुछ सालों में यहां की पहाड़ियों में भू-स्खलन की घटनाएं जिस तेज़ी से बढ़ी हैं, वहीं बीते दिनों कई सोशल मीडिया के माध्यम से नैनीताल के आसपास की पहाड़ियों में हो रहे भूस्खलन के मामले सामने आए हैं। अभी मानसून का सीजन चल ही रहा है, ऐसे में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार नैनीताल की भौगोलिक स्थिति इसकी भूसंवेदनशीलता का मुख्य कारण है। यहां की मिट्टी की संरचना, जलनिकासी की अव्यवस्थित प्रणाली और अंधाधुंध निर्माण कार्य इस संवेदनशीलता को और बढ़ा रहे हैं। मानसून के दौरान जब ज़ोरदार बारिश होती है, तो पहाड़ियों की भार वहन क्षमता कम हो जाती है। जिससे भू-स्खलन की घटनाएं तेजी से सामने आती हैं। आईआईटी रुड़की और वाडिया इंस्टीट्यूट के भू-वैज्ञानिकों ने नैनीताल को मध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में चिन्हित किया है। उनका मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, जैसे निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण, जलनिकासी का समुचित प्रबंधन और नियमित भू- निरीक्षण, तो भविष्य में किसी बड़ी त्रासदी से इनकार नहीं किया जा सकता। नैनीताल तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है और इसकी नींव बलिया नाले पर टिकी है। यह नाला वर्तमान में गंभीर क्षरण की स्थिति में है, जिसमें ट्रीटमेंट कार्य चल रहा है। वहीं, निहाल नाले में भी लगातार भू-कटाव देखा जा रहा है। शहर की पहाड़ियों जैसे ठंडी सड़क से ऊपर, स्नो व्यू, शेर का डांडा, चार्टन लॉज और नयना पीक में लगातार भूस्खलन हो रहा है। जो मानसून के दौरान और भी घातक हो सकता है। भू-तकनीकी विशेषज्ञ भास्कर पाटनी ने चेतावनी दी है कि नैनीताल की पहाड़ियां अत्यधिक संवेदनशील हैं और इनकी भार वहन क्षमता बेहद सीमित है। उन्होंने बताया कि 1880 में आई आपदा में 152 लोगों की मौत हुई थी, और आज भी उसी जैसे संवेदनशील इलाकों में भारी निर्माण कार्य हो रहा है। यदि मानसून में 200 से 250 मिमी तक बारिश होती है,
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तो गंभीर भू-स्खलन की आशंका जताई जा रही है।बदरीनाथ नेशनल हाईवे भूस्खलन से बंद

चमोली। जिले में ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे भी भूस्खलन ही वजह से बंद हो गया है। फिलहाल हाईवे पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। हाईवे को सुचारु करने में काफी समय लग सकता है. क्योंकि हाईवे पर बड़ी मात्रा में लैंडस्लाइड हुआ है।
जानकारी के मुताबिक चमोली जिले में पीपलकोटी के पास भनेरपानी में पहाड़ी से भारी भरकम मलवा आने से हाईवे अवरुद्ध हो गया। ऐसे में जो लोग यहां से आवाजाही कर रहे थे, फिलहाल वह हाईवे पर ही रुके हुए हैं और मार्ग खुलने का इंतजार कर रहे है। इस वजह से हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई है।
प्रशासन की टीम ने पीपलकोटी व जोशीमठ में सभी लोगों को रोका हुआ है। कार्यदाई संस्था हाईवे को सुचारू करने के काम में जुटी हुई है, लेकिन मलबा काफी अधिक होने के कारण मार्ग को खोलने में समय लग रहा है।
ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी कई सड़कें टूटी पड़ी हुई है। ऐसे में खाद्यान्न सामग्री सहित रोजमर्रा की जरूरत के लिए ग्रामीणों को बरसात के समय काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। थराली के रतगाव को जोड़ने वाली सड़क बीच मे भूस्खलन से टूट चुकी है। फिलहाल ग्रामीण यहां से पैदल आवाजाही करने को मजबूर है। क्योंकि लगातार बारिश से भूस्खलन जैसे समस्याओं का सामना करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है। ज्यादा जानकारी देते हुए चमोली के मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि भनेरपानी के पास पूरा पहाड़ सड़क पर गिर गया है। इसके अलावा सड़क भी टूट गई है। इसीलिए हाईवे को खोलने में बहुत अधिक समय लग रहा है। हाईवे को खुलने में करीब पांच घंटे लग सकते है। हाईवे पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। फिलहाल यदि कोई यात्री गौचर से आ रहा है तो उसे वहीं पर रोकने के लिए कहा गया है, ताकि उन्हें ज्यादा परेशानी न हो। इसके अलावा प्रशासन को निर्देशित किया है कि बीच रास्ते में फंसे लोगों को फूड पैकेट आदि दिए जाए।
आगे पढ़ेंउत्तरकाशी आपदाः भय और दहशत के बीच प्रशासन मुस्तैद
विदित हो कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे, तभी विनय शंकर पांडे और आयुक्त गढ़वाल ने आपदा की गंभीरता को भांपते हुए एक व्यापक रणनीति तैयार कर ली थी। सीएम धामी के देहरादून लौटते ही न केवल अतिरिक्त अधिकारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई, बल्कि हालात के अनुसार प्लान ए और प्लान बी जैसे वैकल्पिक राहत और बचाव विकल्पों को भी सक्रिय कर दिया गया। सीएम के बेहद विश्वास पात्र विनय शंकर पांडेय ने खुद को एक बार फिर साबित कर दिया है। वह खुद उत्तरकाशी में ग्राउंड जीरों पर डेरा डाले हुए हैं। उनका फोकस स्पष्ट है लोगों को जल्द से जल्द राहत मिले, और हर गतिविधि एक सुनियोजित तरीके से संचालित हो। धराली आपदा के बीच शासनकृप्रशासन का यह समन्वय, और विशेषकर वरिष्ठ अधिकारियों की तत्परता, यह दिखाती है कि राज्य सरकार ने न केवल हालात की गंभीरता को समय रहते पहचाना, बल्कि संकट की घड़ी में जवाबदेही और लीडरशिप का बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है।आगे पढ़ें
निर्विवाद विरासतन एवं दाखिल खारिज प्रकरण पर निर्धारित समयावधि में हो अमलः डीएम
देहरादून। ओगल भट्टा निवासी किरन देवी ने जिलाधिकारी से गुहार लगायी कि वह अपनी जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए एक साल से भटक रही है। संज्ञान में आते ही जिलाधिकारी सविन बसंल ने तहसीलदार विकासनगर को दाखिल खारिज करने के निर्देश दिये।
ओगल भटृा निवासी किरन देवी ने जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में जिलाधिकारी सविन बसंल को फरियाद सुनाते हुए बताया कि उनके पति अर्द्धसैनिक बल में कार्यरत हैं तथा उन्होंने जून 2024 में भूमि क्रय की किन्तु एक वर्ष के बाद भी भूमि उनके नाम दाखिल खारिज नही हुआ है। दाखिल खारिज के एवज में वकील, पीएनबी एजेंट आदि सभी बरगला रहे हैं तथा काई सही जवाब नही दे रहे है। जिलाधिकारी के संज्ञान में आते ही उन्होंने तहसीलदार विकासनगर से उसी दिन अघतन रिपोर्ट तलब की जिस पर वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए डीएम के निर्देश पर महिला के नाम 03 दिन के भीतर दाखिल खारिज आदेश करते हुए भूमि महिला के नाम अंकित हो गई। किरन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई थी उनके द्वारा शीशमबाड़ा में जून 2024 में 0.00082 हे. भूमि क्रय की गई थी किन्तु वकील व दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी भूमि का दाखिल खारिज नही हो रहा है। इसलिए जिलाधिकारी से ही उम्मीद बची है। डीएम ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए तहसीलदार विकासनगर को आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। मामला डीएम के संज्ञान में आते ही 03 दिन के भीतर तहसील से दाखिल खारिज के आदेश हो गए है।आगे पढ़ेंआपदा,274 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला ,2 शव मिले
उत्तरकाशी। गुरुवार को उत्तरकाशी आपदा की तीसरा दिन है। जिंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी है। सेना, पुलिस व प्रशासन राहत-बचाव में जुटा हुआ है। मलबे से दो शव बरामद किए गए हैं। जिसके बाद अब मृतकों की संख्या सात हो गई है।
गुरुवार सुबह 11 बजे तक कुल 87 लोगों को धराली हर्षिल से आइटीबीपी मातली शिफ्ट किया जा चुका है। रेस्क्यू ऑपरेशन निरंतरता और तीव्र गति से जारी है। जिला प्रशासन की तत्परता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य धराली, हर्षिल आपदा प्रभावित क्षेत्र में स्वंय मौजूद है। जिलाधिकारी के कुशल नेतृत्व में राहत एवं बचाव कार्य तीव्र गति से संचालित है। हर्षिल में रुके यात्रियों को सुरक्षित मातली हैलीपैड लाया जा रहा है। सेना, आइटीबीपी, ए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस व राजस्व की टीमें लगातार सर्च एवं रेस्क्यू में जुटी हुई है।
गुरुवार को मलबे से दो शव बरामद किए गए हैं। जिसके बाद अब मृतकों की संख्या सात हो गई है। स्वास्थ्य कैंप मातली से दो गम्भीर रूप से घायलों को एम्स ऋषिकेश रैफर किया गया। दोनों घायलों को एम्स में भर्ती करा लिया गया है
सचिव आपदा प्रबंधन द्वारा बताया गया है कि 274 लोगों को गंगोत्री एवं अन्य क्षेत्रों से हर्षिल लाया गया है तथा सभी सुरक्षित हैं। इनमें गुजरात के 131, महाराष्ट के 123, मध्य प्रदेश के 21, न्च् के 12, राजस्थान के 6, दिल्ली के 7, आसाम के 5, कर्नाटक के 5, तेलंगाना के 3 तथा पंजाब के 01 लोग हैं। सभी पूरी तरह से सुरक्षित हैं तथा इनको उत्तरकाशी / देहरादून लाया जा रहा है।
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धराली हादसे पर जमीयत ने जताया गहरा शो
प्रशासन से की राहत कार्य तेज़ करने की मांग
उत्तरकाशी जनपद के धराली क्षेत्र में बादल फटने और बाढ़ से हुई त्रासदी पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद, उत्तराखंड ने गहरा शोक व्यक्त किया है। जमीयत के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना हुसैन अहमद कासमी व प्रदेश महासचिव मौलाना शराफत अली क़ासमी ने एक बयान जारी कर हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की दुआ की।
मौलाना शराफत ने कहा कि यह हादसा अत्यंत हृदय विदारक है। अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मृतकों की संख्या अधिक हो सकती है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पतालों में जीवन-मौत से जूझ रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा घायलों को समुचित और तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जाए।
जमीयत ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। जमीयत ने सभी प्रभावितों के लिए यह संदेश दिया है कि, हम इस दुखद घड़ी में आपके साथ खड़े हैं। जाति-धर्म से ऊपर उठकर हमें इंसानियत का परिचय देना होगा।
शोक व्यक्त करने वालों में प्रदेश अध्यक्ष मौलाना हुसैन अहमद क़ासमी, प्रदेश उपाध्यक्ष व शहर क़ाज़ी देहरादून मौलाना मोहम्मद अहमद क़ासमी, मुफ्ति वासिल कासमी, प्रदेश मीडिया प्रभारी मोहम्मद शाह नज़र, हरिद्वार जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल वहीद, नैनीताल जिला अध्यक्ष मौलाना मुकीम अहमद कासमी, देहरादून जिला अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मन्नान क़ासमी, जिला महासचिव हाफिज आबिद, मास्टर अब्दुल सत्तार,मौलाना रागिब मजाहिरी, शहर सदर मुफ्ती अयाज़ अहमद, तौसीफ खान, कारी शाहवेज आदि शामिल रहे।
