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आज दिनांक 13 दिसम्बर 2025 को कलेक्ट्रेट रुद्रपुर के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में उत्तराखण्ड महक क्रान्ति नीति लॉन्चिंग एवं एएमएस (C-14) प्रयोगशाला कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

महक क्रांति नीति की लॉन्चिग सगंध पौधा केन्द्र सेलाकुई देहरादून में मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई। इस कार्यक्रम का रुद्रपुर सभागार में वर्चुअल सीधा प्रसारण किया गया।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित क्रार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुशील मोहन डोभाल, जिला विकास अधिकारी द्वारा की गई। उन्होने कहा कि महक क्रांति पॉलिसी की लांचिंग से ऊधमसिंह नगर के सगंध कृषक लाभान्वित होंगे क्योकि यहां पर मिंट की खेती से किसानों की आर्थिकी में प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होगी। तथा मा० विधायक विधानसभा क्षेत्र रुद्रपुर द्वारा वर्चुअल माध्यम द्वारा प्रतिभाग किया गया।
क्रार्यक्रम में उपस्थित रुद्रपुर ब्लॉक प्रमुख श्रीमति रीना गौतम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महक क्रान्ति पालिसी लाने से ऊधमसिंह नगर में सगन्ध खेती को बढ़ावा मिलेगा।
क्रार्यक्रम के आरम्भ में सगन्ध पौधा केन्द्र (कैप) से पधारे वैज्ञानिक डा० अरविन्द कुमार के द्वारा महक क्रांति नीति एवं इससे लाभांवित सगंध खेती के बारे में कृषकों को विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में श्री मनीष बिष्ट, उप जिलाधिकारी, श्री कोस्तुभ मिश्र, अपर जिलाधिकारी, श्री सतीश मोहन डोभाल, जिला विकास अधिकारी, श्री सतीश कुमार शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी, डॉ नवीन चंद्र जोशी, कृषि रक्षा अधिकारी एवं श्री कमल सिंह बिष्ट, फील्ड सहायक, कैप सेलाकुई के साथ साथ बड़ी संख्या में सगंध कृषक उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन डा० अरविन्द कुमार, वैज्ञानिक, कैप द्वारा किया गया। तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के सहयोग के लिए डॉ विकेश कुमार सिंह यादव, मुख्य कृषि अधिकारी का विशेष आभार व्यक्त किया गया।
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भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष एवं सांसद डा. नरेश बंसल ने सदन मे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए हरित पट्टी मानकों का संशोधन का पर्यावरण संबधित प्रश्न पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री से सदन के माध्यम से किया।’
डा. नरेश बंसल ने अपने प्रश्न मे पूूछा कि क्या पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि,
क- पर्यावरण मंजूरी ढ़ांचे के अंतर्गत नए औद्योगिक क्षेत्रों, पार्कों और परियोजनाओं के लिए अधिसूचित संशोधित हरित पट्टी/वृक्षारोपण मानकों का ब्यौरा क्या है
ख- पूर्व में निर्धारित 33 प्रतिशत हरित आवरण को संशोधित करने का तर्क क्या है
ग- क्या सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि संशोधित मानक सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा दें और
घ- यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?
इस प्रश्न के उत्तर मे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया किः-
क- प्रदूषण की संभाव्यता के आधार पर हरित पट्टी की आवश्यकता को युक्तिसंगत बनाए जाने हेतु, मंत्रालय द्वारा दिनांक 29.10.2025 के कार्यालय ज्ञापन द्वारा माध्यम निर्देश दिया गया है कि यह दिनांक 27 अक्टूबर, 2020 के कार्यालय ज्ञापन पूर्व के अधिक्रमण में संशोधित मानदंडों का औद्योगिक क्षेत्रों/पार्कों तथा व्यक्तिगत उद्योगों के लिए हरित हरित पट्टी/हरित आवरण के विकास के संबंध में अनिवार्यतः अनुपालन किया जाना चाहिए। संशोधित मानदंड के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 10 प्रतिशत क्षेत्रफल को सामान्य हरित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जाना चाहिए और औद्योगिक क्षेत्र के भीतर संबंधित लाल श्रेणी व नारंगी श्रेणी की औद्योगिक इकाईयों को अपने परिसरों के क्षेत्रफल का क्रमशः 15 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हरित पट्टी/हरित आवरण के रूप में विकसित करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर व्यक्ति औद्योगिक इकाईयों के लिए लाल और नारंगी श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसरों मे ंक्रमशः 25 प्रतिशत और 20 प्रतिशत हरित पट्टी/हरित आवरण विकसित करना अपेक्षित है, जिसे यदि वे मुख्य रूप से वायु प्रदूषण करने वाली इकाइयां नहीं हैं, तो प्रत्येक के लिए 5 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है। हरित और श्वेत उद्योगों के संबंध में यह निर्देश दिया गया है कि हरित पट्टी/हरित आवरण का विकास वैकल्पिक है और इसकी कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं है, केवल वही हरित श्रेणी के उद्योगों जिनका वायु प्रदूषण स्कोर झऋ 25 है, उन्हें अपने-अपने परिसरों के भीतर 10 प्रतिशत हरित पट्टी/हरित आवरण का विकास करना होगा।
(ख) से (घ) परियोजनाओं/कार्यकलापों के लिए भूमि की आवश्यकताओं और हरित पट्टी की पर्यावरणीय आवश्यकताओं और साथ ही सामान्य और विशिष्ट शर्तों में वर्णित मौजूदा प्रदूषण नियंत्रण और उन्मूलन उपायों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता थी ये शर्तें ई आई ए अधिसूचना 2006 में यथा संशोधित उपबंधों के अनुसार जारी की गई थी जिससके उपलब्ध भूमि का इष्टतम उपयोग किया जा सके। अतः प्रदूषण की संभाव्यती के आधार पर हरित पट्टी की आवश्यकता को युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया गया। हरित पट्टी/हरित आवरण का युक्तिकरण एक समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया, जिसके हरित पट्टीध्हरित आवरण विकसित करने के लिए अन्य बातों के साथ-साथ विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मानकों को आधार बनाया गया है। संशोधित हरित पट्टी/हरित आवरण मानकों का आधार यह है कि लाल और नारंगी श्रेणी के अंतर्गत आने वाले प्रदूषण क्षमता वाले उद्योगों को औद्योगिक कार्यकलापों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अधिक प्रतिशत में हरित पट्टी विकसित करने की आवश्यकता होगी। हरित पट्टी/हरित आवरण की आवश्यकता निर्धारित करते समय संशोधित मानदंड एक विशेषज्ञ समिति द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण और प्रदूषण की संभाव्यता के कारकों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
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नई दिल्ली/देहरादून।
उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और विकासखंडों के बीच लंबी दूरियों को देखते हुए लोकसभा में आज एक महत्वपूर्ण मुद्दा गूंजा। नैनीताल-उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय भट्ट ने सदन में नियम 377 के अधीन राज्य में विकासखंडों की संख्या बढ़ाए जाने की पुरजोर मांग उठाई।
सांसद भट्ट ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में एक विकासखंड से दूसरे तक पहुंचना जनता के लिए चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में केंद्र सरकार की योजनाओं को ब्लॉक स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने में कठिनाई होती है। उन्होंने बताया कि आम जनता को अपने रोजमर्रा के सरकारी कार्यों के लिए भी दूर-दराज के क्षेत्रों की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में नए विकासखंडों का गठन अत्यंत आवश्यक है, ताकि योजनाओं का लाभ आम लोगों तक सुगमता से पहुंचे और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आए।
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*राजमार्गों पर सार्वजनिक स्थानों पर फैले कूड़े-कचरे पर जिलाधिकारी की सख्तीः सम्बन्धित अधिकारियों को बीएनएसएस धारा 152 (पूर्व धारा सीआरपीसी 133) के तहत आपराधिक नोटिस जारी*
*परियोजना निदेशक, एनएचएआई, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून, अधिशासी अभियंता, एन.एच. खण्ड डोईवाला मजिस्ट्रेट न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत बाउंड डाउन*
*राष्ट्रीष्य राजमार्ग रिस्पना पुल से लच्छीवाला, भानियावाला टोल, एयरपोर्ट एवं लाल तप्पड़ सड़क के दोनो ओर गंदगी, पर 07 दिन भीतर कार्यवाही कर न्यायालय में पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश;*
अनुपालन न करने पर स्वत: दर्ज होगा आपराधिक मुकदमा; भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत 6 महीने कारावास का है प्राविधान
*ग्राम प्रतीतनगर रायवाला पुराना रेलेवे स्टेशन; नेशनल हाईवे सर्विस रोड किनारे पड़े कूड़े पर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई, सहायक वन सरक्षक, अधिशासी अभियंता लोनिवि ऋषिकेश, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, रेलवे अधीक्षक रेलवे स्टेशन रायवाला को बीएनएसएस धारा 152 (पूर्व धारा सीआरपीसी 133) के तहत आपराधिक नोटिस जारी*
*देहरादून दिनांक 13 दिसम्बर 2025, * हरिद्वार बाईपास रोड पर रिस्पना पुल से लच्छीवाला, भानियावाला टोल, एयरपोर्ट रोड व लालतप्पड़ क्षेत्र तक तथा रायवाला अंडरपास, ग्राम प्रतीतनगर, रायवाला रेलवे स्टेशन तथा नेशनल हाईवे सर्विस रोड राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर अत्यधिक मात्रा में कूड़ा-करकट पाए जाने संबंधी शिकायतों पर जिलाधिकारी सविन बसंल ने संज्ञान लेते हुए उप जिलाधिकारी सदर एवं ऋषिकेश को अपने-अपने क्षेत्रान्तर्गत कार्यवाही के निर्देश पर सम्बन्धित अधिकारियों को नोटिस जारी। सम्बन्धित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए जिलाधिकारी द्वारा सभी विभागों को 7 दिन के भीतर कूड़ा सफाई करने तथा 20 दिसम्बर तक न्यायालय में पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
तहसीलदार डोईवाला टीम ने क्षेत्रीय निरीक्षण में पुष्टि हुई कि कूड़े के ढेरों के कारण पर्यावरण एवं भूमिगत जल प्रदूषण, संक्रामक रोगों का खतरा तथा वन क्षेत्र में बंदरों एवं हाथियों की आवाजाही से जन सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। तथा यह स्थिति बीएनएसएस की धारा 152 के अंतर्गत लोक मार्ग पर विधिविरु बाधा/न्यूसेन्स की श्रेणी में आती है।
जिलाधिकारी देहरादून के निर्देशानुसार परियोजना निदेशक, एनएचएआई, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून, अधिशासी अभियंता, एन.एच. खण्ड डोईवाला को बीएनएसएस धारा 152 (पूर्व धारा सीआरपीसी 133) के तहत को नोटिस जारी करते हुए निर्देशित किया कि नोटिस प्राप्ति के 07 दिवस के भीतर समस्त गंदगी को पूर्ण रूप से हटाया जाए तथा स्थायी स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उक्त अधिकारियों को 19 दिसंबर 2025 को एसडीएम न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी जारी की गई है कि अनुपस्थिति की स्थिति में एकपक्षीय आदेश पारित किया जाएगा तथा अवहेलना पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
पुराने रेलवे रोड रायवाला अंडरपास, ग्राम प्रतीतनगर, रायवाला रेलवे स्टेशन तथा नेशनल हाईवे सर्विस रोड के किनारे फैले कूड़े-कचरे की शिकायतों पर जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देश के अनुपालन में तहसील ऋषिकेश की टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान इन स्थलों पर खाद्य पदार्थों के खाली पैकेट, प्लास्टिक बोतलें, पॉलिथीन एवं अन्य ठोस अपशिष्ट का अनियमित रूप से जमा होना पाया गया, जिससे बीमारियों के प्रसार का खतरा बढ़ रहा है तथा आमजन को असुविधा हो रही है। यह स्थिति संबंधित उपक्रम/अधिष्ठान की लापरवाही के कारण उत्पन्न हुई है, जो लोक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ग्राम प्रतीतनगर रायवाला पुराना रेलेवे स्टेशन; नेशनल हाईवे सर्विस रोड किनारे पड़े कूड़े पर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई, सहायक वन सरक्षक, अधिशासी अभियांत लोनिवि ऋषिकेश, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, रेलवे अधीक्षक रेलवे स्टेशन रायवाला को बीएनएसएस धारा 152 (पूर्व धारा सीआरपीसी 133) के तहत को नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित उपक्रम को निर्देशित किया है कि वे 19 दिसम्बर 2025 तक सभी स्थलों से कूड़े-कचरे का पूर्ण निस्तारण सुनिश्चित कर फोटोग्राफ सहित अनुपालन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करें। निर्धारित समयावधि में अनुपालन न करने की स्थिति में संबंधित पक्ष को 20 दिसम्बर 2025 को न्यायालय में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा। जिला प्रशासन ने कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। ऐसे स्थलों पर नियमित निरीक्षण जारी रहेगा तथा आवश्यकतानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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*देहरादूनः आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एसएनसीयू बना नवजातों के लिए संजीवनी*
*मा0 सीएम की प्रेरणा, डीएम की नियमित मॉनिटरिंग से एसएनसीयू की कार्यक्षमता में वृद्वि*
*एसएनसीयू का दायरा बढ़ाः 06 से 12 बेड में विस्तार, अब तक 492 शिशुओं को मिला नव जीवन*
*नवजातों की मुस्कान बनी राहत, अभिभावकों ने एसएनसीयू की व्यवस्थाओं को सराहा*
*देहरादून 13 दिसंबर,2025,*
राजधानी देहरादून में नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। गांधी शताब्दी जिला अस्पताल में संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को अब और अधिक सुदृढ़ व आधुनिक बनाया गया है, जिससे गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को उन्नत उपचार मिल पा रहा है।
मा० मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं एसएनसीयू की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं। डीएम ने नवजात शिशुओं को अस्पताल तक सुरक्षित रूप से लाने और ले जाने के लिए एक डेडिकेटेड वाहन भी तैनात किया गया है, जिससे समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके।
नवजात शिशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले सिंगल वार्ड में संचालित 6 बेड के एसएनसीयू को अब डबल वार्ड में विस्तारित कर 12 बेड कर दिया गया है। बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता के चलते अब तक 492 से अधिक नवजात शिशुओं को सफल उपचार प्रदान किया जा चुका है।
देहरादून के गांधी शताब्दी जिला अस्पताल में नवंबर 2024 में प्रारंभ हुई इस यूनिट को अब आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। एसएनसीयू में दो मदर बोर्ड, स्टाफ रूम सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा और सुव्यवस्थित संचालन को ध्यान में रखते हुए पूरे वार्ड में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। यह यूनिट जिले में सुदृढ़ होती स्वास्थ्य सेवाओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।
अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं के माता-पिता ने भी जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि यहां डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ 24 घंटे पूरी तत्परता से बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें संतोष और भरोसा मिला है। उन्होंने मा० मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मीता श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में दो नवजात शिशुओं को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया गया है, जबकि आज ही एक नवजात को हरिद्वार से रेफर कर यहां लाया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से एसएनसीयू में अब नवजातों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल रहा है।
देहरादून का यह एसएनसीयू न केवल नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि जनकल्याण की दिशा में जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शा रहा है।
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*कृषि और बागवानी को आधुनिक बनाने की दिशा में महानिदेशक वंदना सिंह की पहल,*
*गैर-मौसमी और एग्जॉटिक सब्जियों की खेती के लिए नई तैयारी,*
*सगन्ध पौध क्लस्टर्स का दायरा बढ़ाने और वैल्यू चेन मजबूत करने के निर्देश*
*कृषि सखियों को प्रेरित कर जैविक उत्पादों के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रचार पर दिया जोर*
*देहरादून 13 दिसंबर,2025,*
राज्य के कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को और अधिक सशक्त एवं आधुनिक बनाने की दिशा में महानिदेशक, कृषि एवं उद्यान विभाग वंदना सिंह ने महत्वपूर्ण पहल की है। इस क्रम में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर उच्च स्तरीय बैठकों का आयोजन कर विभागीय योजनाओं की समीक्षा की और आगामी कार्य योजना पर विस्तृत चर्चा की।
महानिदेशक ने जायका-उत्तराखण्ड एकीकृत बागवानी विकास परियोजना की समीक्षा की और निर्देश दिया कि परियोजना की कार्ययोजना को ज़मीनी स्तर की वास्तविक गतिविधियों के अनुरूप संशोधित किया जाए। जनपद में जिन क्लस्टर में परियोजना का क्रियान्वयन किया जाना है, वहां स्टाफ की तैनाती इसी माह कर ली जाए। योजना अंतर्गत, प्रस्तावित ऑफ-सीज़न (गैर-मौसमी) और एग्जॉटिक सब्ज़ियों की खेती के लिए पौध विकसित करने तथा सरकारी बागानों में पर्याप्त रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में नोडल अधिकारी ने बताया कि राज्य की नर्सरियों के पुनर्जीवन के लिए मास्टर प्लान का कार्य लगभग पूर्ण हो गया है और नर्सरी विकास अधिकारियों के कार्य विभाजन और ड्यूटी चार्ट की प्रक्रिया इसी माह पूर्ण हो जाएगी। राज्य में आलू बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हेतु विस्तृत प्लान का प्रस्तुतिकरण दिया गया। महानिदेशक ने इस प्लान के क्रियान्वयन के लिए चिन्हित नर्सरियों में आलू विकास अधिकारी की तैनाती के लिए इसी सप्ताह आदेश जारी करने के निर्देश दिए।
महानिदेशक, कृषि एवं उद्यान विभाग, उत्तराखण्ड ने सगंध पौधा केंद्र (कैप), सेलाकुई का निरीक्षण किया और केंद्र निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान को महक क्रांति के अंतर्गत क्लस्टर्स में सगन्ध पौध पर कार्य करने, क्लस्टर्स का दायरा बढ़ाने और वैल्यू चेन पर कार्य करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने निर्देश दिया कि उद्यान विभाग के नए कर्मचारियों (जैसे नर्सरी अधिकारी, माली आदि) को उच्च गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री तैयार करने के लिए कैप द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। महानिदेशक ने यह भी कहा कि दिसंबर माह में प्रगतिशील सगंध कृषकों के साथ कैप में एक बैठक आयोजित की जाए। कैप स्थित टिसू कल्चर लैब का निरीक्षण कर महानिदेशक ने केंद्र निदेशक को अखरोट की पौध सामग्री को टिश्यू कल्चर विधि से तैयार करने के लिए केन्द्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के सहयोग से कार्य शुरू करने और च्यूरा उत्पादों की वैल्यू चेन पर भी कार्य करने के निर्देश दिए।
वहीं महानिदेशक ने उत्तराखण्ड जैविक उत्पाद परिषद की समीक्षा बैठक भी ली। बैठक में प्रबंध निदेशक विनय कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों मौजूद थे। महानिदेशक ने मजखाली प्रशिक्षण केंद्र की गतिविधियों की जानकारी ली और कृषि सखियों को जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के अनुसंधान एवं विकास कार्यों को उत्तराखंड में लागू करने हेतु सहयोग स्थापित करने, जैविक उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने और परिषद के आय स्रोत विकसित करने पर ज़ोर दिया। साथ ही, जीआई प्राप्त उत्पादों के अधिकृत उपयोगकर्ताओं को बढ़ाने के निर्देश भी दिए। महानिदेशक ने जनपद देहरादून के ग्राम सीरियों एवं गुंदियावाला का भ्रमण कर जैविक खेती करने वाले किसानों से भी मुलाकात की।
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जिला देहरादून में एक ही दिन में *17,177* वादों के निस्तारण के साथ साल की अंतिम लोक अदालत का सफल आयोजन हुआ तथा कुल *21,75,49,988* (इक्कीस करोड पिचहत्तर लाख उन्चास हजार नौ सौ अठासी) रूपये की धनराशि पर पक्षकारों के मध्य समझौता हुआ।
दिनांक *13 दिसम्बर 2025 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत* में एक ही दिन में जिला देहरादून द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन कर *17,177* वादों का प्रभावी निस्तारण किया गया, जिसमें से *10,188* मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन थे, जोकि *18,03,82,734* रू० की धनराशि के समझौते पर निस्तारित हुए। इसके साथ ही *6991* वादों का विभिन्न बैंकों व अन्य विभागों द्वारा प्री लीटिगेशन स्तर पर निस्तारण किया गया, जिसमें *3,71,67,254* /- रू० की धनराशि पर समझौता हुआ।
” देहरादून राष्ट्रीय लोक अदालत की यह उल्लेखनीय उपलब्धि *माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, श्री प्रेम सिंह खिमाल* जी के कुशल एवं प्रेरणादायी नेतृत्व तथा समस्त न्यायिक अधिकारियों की निष्ठा
कार्यकुशलता एवं प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। जिला न्यायाधीश महोदय के मार्गदर्शन और सतत प्रेरणा से न केवल अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यों की गति तेज हुई, बल्कि लोक अदालत में पक्षकारों को सुलह और न्याय का सहज वातावरण भी मिला है, जिससे जनता का विश्वास और भी दृढ़ हुआ है तथा समाज में न्याय भाईचारे और विश्वास की भावना सशक्त हुई है।
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राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में दिनांक 13 दिसम्बर, 2025 को प्रातः 10.00 बजे से सायं 05.00 बजे तक जिला मुख्यालय देहरादून, बाह्य न्यायालय ऋषिकेश, विकासनगर, बोईवाला, मसूरी एवं चकराता के न्यायालयों में साल की अंतिम सफल राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले, पारिवारिक मामले, चेक बाउन्स से सम्बंधित मामले, शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलें तथा अन्य प्रकृति के मामले लगाये गये थे। इस लोक अदालत में मुख्यालय देहरादून में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 511 मामले, बैंक सम्बंधी 507 मामले, धन वसूली सम्बंधी 26 मामले, मोटर-दुर्घटना क्लेम दाईबुनल के 57 मामले, पारिवारिक विवाद सम्बंधी 59 मामले श्रम सम्बंधी 03 मामले, मोटर वाहन अधिनियम के अनार्गत शमनीय अपराधों के 8950 मामले एवं अन्य सिविल प्रकृति के 48 मामलों सहित कुल 7261 मामलों का निस्तारण किया गया तथा 114546040/- रू० की धनराशि पर समझौता हुआ। स्थाई लोक अदालत में 25 मामलों का निस्तारण किया गया।
साथ ही बाह्य न्यायालय, विकासनगर के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 1242 मामलों का आपसी राजीनामे की आधार पर निस्तारण किया गया, जिसमें कुल 12109000/- रू० की धनराशि पर समझौता किया गया तथा बाह्य न्यायालय ऋषिकेश के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 1377 मामलों का निस्तारण कर कुल 27366571/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय डोईवाला द्वारा 241 मामलों का निस्तारण कर कुल 24328663/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय मसूरी द्वारा 52 मामलों का निस्तारण कर कुल 915917/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया तथा बाड्य न्यायालय चकराता द्वारा 13 मामलों का निस्तारण कर कुल 1116543/- रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों व अन्य संस्थानों द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर के मामले भी निस्तारित किये गये। उक्त लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के कुल 6991 मामलों का सफल निस्तारण किया गया तथा 3,71,67,254/- रु० की धनराशि पर पक्षकारों के मध्य समझौता हुआ।
*पूर्व राष्ट्रीय लोक अदालतों में भी अच्छा काम हुआ*
पूर्व में दिनांक 13 सितम्बर 2025 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भी जिला देहरादून का उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा था, जिसमें एक ही दिन में लगभग 21 हजार वादों का सफल निस्तारण किया गया था, जिससे जिला देहरादून की पेन्डेन्सी एक लाख से नीचे पहुंब गयी थी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज श्रीमती सीमा डुँगराकोटी द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालते न्याय प्रणाली की गरिमा को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति, सौहार्द एवं संवाद की भावना को प्रोत्साहन मिलता है, जिससे समाज में शांति, भाईचारे एवं सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है।
उन्होंने बताया कि लोक अदालतें आमजन को सरल, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। लोक अदालतों में पारित किए गए निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा प्रकरणों के निस्तारण उपरांत पक्षकारों को उनके द्वारा जमा किया गया न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है।
