प्रयाग में श्री ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ किए गए दूर व्यवहार से विश्व शर्म सार है

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देश शर्म सार है अत्याचार बंद करें बंद करें दोषी को सजा दो सजा दो।
श्री ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती १००८ महाराज जी की जय।उन्होंने राम सेतु बचाया, गंगा मां को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने आंदोलन कर सफल हुए। श्री राम मंदिर के मुकदमे में शास्त्र के अनुसार गवाही हाईकोर्ट प्रयाग राज में देकर भगवान श्री राम का मंदिर बनाने का फैसला कराया। गौ माता राष्ट्र माता को संवैधानिक अधिकार देने के लिए जन आंदोलन कर राष्ट्र को समृद्ध बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। देश गौहत्या के विषय में प्रचलित आँकड़ों के अनुसार विश्व स्तर पर भारत को दूसरा स्थान बताया जाता है, तथा देश के भीतर उत्तर प्रदेश को गौहत्या के मामलों में प्रथम स्थान पर रखे जाने का दावा किया जाता है। ऐसे वातावरण में गौहत्या के विरुद्ध निर्भीक स्वर में सत्य उद्घोष करने वाले, गौहत्यारी राजनीतिक शक्तियों और उनके नेताओं को निर्लज्जता से उजागर करने वाले एकमात्र शंकराचार्य स्वामी श्री १००८ गुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के साथ आज प्रयागराज में हुआ यह दुर्व्यवहार अत्यंत निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है।

इतिहास साक्षी है कि जब-जब किसी महापुरुष ने गौसंरक्षण, धर्म और सत्य के पक्ष में निर्भीक होकर आवाज उठाई है, तब-तब अधर्म की शक्तियों ने उसे दबाने का प्रयास किया है। धर्मसम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज के साथ घटित घटनाएँ इसका जीवंत उदाहरण हैं। इसी कारण यह आशंका भी स्वाभाविक है कि भविष्य में ऐसे धर्मनिष्ठ महापुरुषों के विरुद्ध और भी गंभीर षड्यंत्र रचे जा सकते हैं।

किन्तु परिणाम चाहे जो भी हों, सत्य, धर्म और गौमाता की रक्षा के लिए समर्पित जनसमुदाय गुरुदेव के साथ अडिग भाव से खड़ा है और सदैव खड़ा रहेगा। धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो।जीत मणि पैन्यूली संपादक पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र मोबाइल नंबर 7983825336