धर्म सम्राट श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के साथ उत्तर प्रदेश शासन-प्रशासन एवं पुलिस द्वारा जो व्यवहार किया गया, उसने समस्त हिंदू सनातनी समाज को आहत और व्यथित किया है जानिए सभी समाचार

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स्थान : प्रयागराज / नई दिल्ली देहरादून
विषय : मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य परंपरा के सर्वोच्च गुरु के साथ हुए अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध सनातन समाज की आवाज
नमस्कार,
आज हम आप सभी मीडिया प्रतिनिधियों के माध्यम से देश और समाज के समक्ष एक अत्यंत गंभीर, चिंताजनक और पीड़ादायक विषय को रखना चाहते हैं।
तीर्थराज प्रयाग में मौनी अमावस्या जैसे पवित्र पर्व के अवसर पर हिंदू सनातन धर्म की आदि शंकराचार्य परंपरा के सर्वोच्च आचार्य, ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी के साथ उत्तर प्रदेश शासन-प्रशासन एवं पुलिस द्वारा जो व्यवहार किया गया, उसने समस्त हिंदू सनातनी समाज को आहत और व्यथित किया है।
यह कोई सामान्य प्रशासनिक घटना नहीं है, बल्कि धर्म, परंपरा, गुरु-संस्था और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात है।
घटना के प्रमुख तथ्य
शंकराचार्य जी को पर्व स्नान हेतु ले जाने के लिए स्वयं उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी शिविर में आए।
शंकराचार्य जी ने परंपरानुसार उन अधिकारियों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
इसके पश्चात पुलिस अभिरक्षा में शंकराचार्य जी को उनके दंडीस्वामियों, साधु-संतों, बटुक ब्राह्मणों एवं शिष्यों सहित परंपरागत पालकी में गंतव्य की ओर ले जाया गया।
यह सर्वविदित है कि जब कोई विशिष्ट व्यक्ति पुलिस अभिरक्षा में जाता है, तो मार्ग, समय, व्यवस्था और संख्या—सब कुछ प्रशासन के संज्ञान में होता है।
इसके बावजूद, वापसी मार्ग में शंकराचार्य जी पर भीड़ के बीच पालकी से उतरने का दबाव बनाया गया, जो अत्यंत गंभीर संदेह को जन्म देता है।
षड्यंत्र की आशंका क्यों?
यदि शंकराचार्य जी समय रहते स्थिति की गंभीरता को न समझते और पालकी से उतर जाते, तो कोई भी अप्रिय, हिंसक या प्राणघातक घटना घट सकती थी।
इसलिए सनातन समाज इसे पूर्वनियोजित षड्यंत्र के रूप में देख रहा है।
मीडिया में सामने आए दृश्य
मीडिया एवं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में—
एक अधिकारी यह कहते हुए सुनी जाती हैं कि “आप ढाई घंटे से मार्ग अवरुद्ध किए हुए हैं”, जबकि उसी मार्ग से पुलिस स्वयं शंकराचार्य जी को लाई थी।
एक अन्य अधिकारी यह कहते हैं कि “पालकी नहीं जाने देंगे, यह परंपरा के विरुद्ध है”।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि—
शंकराचार्य जी पूर्व वर्षों में भी पालकी से ही पर्व एवं कुंभ स्नान करते रहे हैं।
उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ (नृसिंह मंदिर) से बदरिकाश्रम तक आज भी शंकराचार्य जी की गद्दी परंपरागत रूप से पालकी में ही आती-जाती है।
देवी-देवताओं की डोलियाँ और पालकियाँ सनातन संस्कृति का आदिकालीन और जीवंत अंग हैं।
ऐसी सर्वमान्य परंपरा को नकारना अज्ञानता ही नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था का अपमान है।
अमानवीय बलप्रयोग
जब शंकराचार्य जी को पालकी से उतरवाने में सफलता नहीं मिली, तब—
साधु-संतों और दंडीस्वामियों के साथ बलप्रयोग किया गया,
अंगवस्त्र उतारे गए,
चोटी पकड़कर घसीटा गया,
मारपीट की गई,
कई साधु-शिष्य गंभीर रूप से घायल हुए और अस्पताल में भर्ती कराए गए।
इसके अतिरिक्त, शंकराचार्य जी को सिविल वर्दीधारी पुलिसकर्मियों द्वारा मेला क्षेत्र के भीतर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया, जो उनकी सुरक्षा और गरिमा—दोनों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हम क्या मांग करते हैं?
हम मीडिया के माध्यम से देश के माननीय राष्ट्रपति महोदय से यह मांग करते हैं कि—
इस संपूर्ण प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के माननीय/सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
भविष्य में किसी भी धर्मगुरु, साधु-संत या धार्मिक परंपरा के साथ इस प्रकार की घटना न हो, इसके लिए स्पष्ट और बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।
अंत में
यह विषय किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है।
यह सनातन धर्म, उसकी गुरु-परंपरा और संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा प्रश्न है।
हमें विश्वास है कि न्याय होगा, और देश में धर्म, परंपरा तथा संविधान—तीनों के प्रति आस्था बनी रहेगी।इस प्रेसवार्ता मे भारतीय गौक्रान्ति मंच के अध्यक्ष आचार्य सीताशरण महाराज जी, महासचिव विकाश पाटनी जी देहरा दून जिलाध्यक्ष श्री आनन्द सिंह रावत जी, प्रदेश सचिव एवं गौ सांसद श्री यशवन्त सिंह रावत जी, गौसांसद एवं प्रदेश प्रभारी अनुसूया प्रसाद उनियाल, गौप्रचारक श्री कमल किशोर भट्ट जी गौभक्त मंजू नेगी, कौशल्या वेलवाल, रविन्द्रराणा जी अनेक गौभक्त उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन पर दुःख व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हृदयविदारक घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्री अजीत पवार ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए सदैव करुणा, संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि इस दुःखद हादसे में दिवंगत सभी पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों, सहयोगियों एवं समर्थकों को यह असह्य दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उत्तराखंड की कैबिनेट ने भी विमान दुर्घटना में दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु दो मिनट का मौन रखा ।

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*मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने 1035 सहायक अध्यापकों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेलनगर, देहरादून में 1035 सहायक अध्यापक (प्राथमिक शिक्षा) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए, जिनमें 17 विशेष शिक्षक भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि सभी युवा शिक्षक राज्य में शिक्षा का स्तर बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आज से आपके कंधों पर उत्तराखंड के भविष्य को संवारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आ गई है। जब किसी बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती है, तो वह केवल अपना जीवन ही नहीं संवारता, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी अमूल्य योगदान देता है। शिक्षक देश के उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना भी विकसित करें, जिससे वे शिक्षा के साथ संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक भी बनें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने से लेकर डिजिटल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और कौशल विकास तक हर स्तर पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार वर्षों में 28 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के आत्मसम्मान की जीत है। इन साढ़े चार वर्षों में जितनी नौकरियां युवाओं को मिली हैं, वह राज्य गठन के बाद और पूर्ववर्ती सरकारों के समय से दो गुना से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से किसी को खिलवाड़ नहीं करने देगी।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में शिक्षा विभाग में 11 हजार 500 से अधिक नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। 3 हजार 500 से अधिक विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। राज्य में शिक्षा में नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस अवसर पर शिक्षा महानिदेशक सुश्री दीप्ति सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा श्री अजय नौडियाल, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण श्रीमती वंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक श्रीमती कंचन देवराड़ी उपस्थित थे।

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*सीएम धामी के नेतृत्व में जनसेवा का नया रिकॉर्ड, 484 कैम्पों से 3.89 लाख से अधिक लोग लाभान्वित*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चलाए जा रहे “जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार” के तहत आयोजित विशेष कैम्पों को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। राज्य सरकार की प्रभावी कार्ययोजना और प्रशासनिक सक्रियता का ही परिणाम है कि बड़ी संख्या में आम नागरिक इन कैम्पों के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं।

आज आयोजित किए गए कुल 10 कैम्पों में 12,510 व्यक्तियों ने सहभागिता की, जो सरकार की जनहितकारी नीतियों पर आम जनता के विश्वास को दर्शाता है। वहीं, अब तक की कुल अवधि में राज्यभर में 484 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से कुल 3,89,868 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से सेवाओं का लाभ प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है। इसके लिए प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने की नीति पर कार्य किया जा रहा है। ये कैम्प शासन और जनता के बीच सेतु का कार्य कर रहे हैं तथा त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे इसी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाएँ। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में ये प्रयास राज्य के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।