कपकोट की नई उड़ान: ग्रामीण बागेश्वर बना एडवेंचर टूरिज्म का चमकता सितारा जानिए सभी समाचार

Spread the love

[LIVE:

देहरादून में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ का शुभारम्भ*

आगे

बागेश्वर, 10 फरवरी, 2026 | सूचना विभाग
📌 *कपकोट की नई उड़ान: ग्रामीण बागेश्वर बना एडवेंचर टूरिज्म का चमकता सितारा*
📌 *पैराग्लाइडिंग चैंपियनशिप ने कपकोट को दिलाई पर्यटन मानचित्र पर खास जगह*
📌 *राष्ट्रीय स्तर के आयोजन से कपकोट में साहसिक पर्यटन को मिला नया प्रोत्साहन*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विज़न के अनुरूप, सुदूर पर्वतीय क्षेत्र कपकोट अब एडवेंचर टूरिज्म के राष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।

फरवरी 5 से प्रारंभ बागेश्वर जनपद में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय एक्युरेसी पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता ने इस शांत ग्रामीण अंचल को देशभर के रोमांच प्रेमियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना दिया है।

जालेख की पहाड़ियों से उड़ान भरते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों से सजा कपकोट का आसमान पूरे आयोजन के दौरान उत्सव का अहसास कराता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए 92 पायलटों ने इस प्रतियोगिता में पंजीकरण कराया, जिनमें से 78 प्रतिभागियों ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। हजारों स्थानीय दर्शकों और पर्यटकों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि कपकोट में साहसिक खेलों के प्रति जबरदस्त उत्साह है।

प्रतियोगिता का शुभारंभ जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे और क्षेत्रीय विधायक सुरेश गड़िया द्वारा किया गया। जिलाधिकारी ने इसे बागेश्वर के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।

पहले दिन से लेकर समापन तक प्रतियोगिता का रोमांच चरम पर रहा। विशेषज्ञों के अनुसार कपकोट का भौगोलिक परिवेश पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और अन्य साहसिक खेलों के लिए अत्यंत अनुकूल है। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा संबंधी सत्र भी आयोजित किए गए, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और अधिक पेशेवर बना।

समापन समारोह में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने स्वयं जालेख से उड़ान भरकर इस रोमांच का अनुभव लिया और कहा कि “कपकोट–बागेश्वर अब एडवेंचर टूरिज्म के नए गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।”

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रहे मनीष उप्रेती को ₹1,00,000, द्वितीय स्थान पर रहे मनीष भंडारी को ₹50,000 तथा तृतीय स्थान पर पंकज कुमार को ₹30,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। महिला पायलटों को भी विशेष प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।

इस आयोजन की सफलता ने स्पष्ट संदेश दिया है—कभी शांत समझा जाने वाला कपकोट अब केवल एक ग्रामीण इलाका नहीं, बल्कि देश का उभरता हुआ साहसिक पर्यटन केंद्र बन चुका है। प्राकृतिक सुंदरता, अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय पहल इसे भविष्य का प्रमुख एडवेंचर डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही हैं।

कपकोट ने सचमुच नई उड़ान भर ली है—पर्यटन की, पहचान की और संभावनाओं की।

आगे पढ़ें

देहरादून,
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण की उत्तराखण्ड एयर कनेक्टिविटी स्कीम के सम्बन्ध में बैठक सम्पन्न हुयी। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने आदि कैलाश, नाभिडांग और और जॉलीकाँग को हवाई सेवा से जोड़े जाने के लिए कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहस्त्रधारा से पूर्णागिरी के लिए भी हवाई सेवा शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हवाई सम्पर्क बढ़ाए जाने की सम्भावनाएं तलाशे जाने के लगातार प्रयास किए जाएं। उन्होंने प्रदेश में पर्यटन सर्किट के विकास के ध्यान में रखते हुए हैलीपैड और हैलीपोर्ट सुविधाओं को बढ़ाए जाने पर जोर दिया।

सचिव श्री सचिन कुर्वे ने कहा कि प्रदेश में हेलीपैड और हेलीपोर्ट विकसित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही नैनीसैनी एयरपोर्ट को एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया को हैंड ओवर किया जाएगा।

इस अवसर पर पर सचिव श्री सचिन कुर्वे एवं अपर सचिव श्री आशीष चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आगे पढ़ें

विभागीय आपदा प्रबंधन योजना बनाने की डेडलाइन तय*
*सचिव श्री सुमन ने 28 फरवरी तक का दिया समय*
*सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा*
*कहा-योजना केवल औपचारिक दस्तावेज तक सीमित न रहे*
देहरादून। सेंदाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने राज्य के सभी रेखीय विभागों को अपने-अपने विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान को 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन योजनाएं केवल औपचारिक दस्तावेज न रहकर विभागीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए, ताकि आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना में सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना होगा। योजनाओं में यह स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद विभाग की भूमिका क्या होगी तथा किस अधिकारी और इकाई द्वारा कौन-सा कार्य किया जाएगा।
मंगलवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान सचिव श्री सुमन ने निर्देश दिए कि प्लान में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम जनमानस के क्षमता विकास को विशेष प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए प्रत्येक विभाग वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए कि किस माह में कौन-सा प्रशिक्षण, अभ्यास या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस वार्षिक कैलेंडर को विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान का अनिवार्य भाग बनाया जाए, ताकि तैयारी एक सतत प्रक्रिया के रूप में चलती रहे।
उन्होंने सभी विभागों को अपने-अपने विभाग में उपलब्ध मानव संसाधनों, मशीनरी, उपकरणों एवं तकनीकी संसाधनों की विस्तृत सूची तैयार कर इन संसाधनों की जीआईएस आधारित मैपिंग करने तथा इसे प्लान में शामिल करने के निर्देश दिए ताकि आपदा के समय संसाधनों की त्वरित पहचान और उपयोग संभव हो सके। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए एवं अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद की योजना को भी विभागीय प्लान में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान विभागों द्वारा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए योजना, संकट के समय निर्णय एवं समन्वय की प्रक्रिया, सूचना एवं संचार की योजना, राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारी, आपदा के बाद पुनर्बहाली एवं पुनर्निर्माण की व्यवस्था, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा नुकसान के आकलन और जोखिम मूल्यांकन से संबंधित व्यवस्थाओं के बारे जानकारी दी गई। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन प्लान विभाग को आपदा के समय स्पष्ट दिशा, तय जिम्मेदारी और पूर्व-निर्धारित कार्यप्रणाली उपलब्ध कराने में उपयोगी सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि विभागीय आपदा प्रबंधन योजना के माध्यम से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, अंतर-विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय प्रक्रिया तथा प्रभावी राहत एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही यह योजना विकास कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को मुख्यधारा में लाने और बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को लागू करने में भी सहायक होगी। बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान तथा हॉस्पिटल आपदा प्रबंधन प्लान के संबंध में भी जानकारी दी गई।
बैठक में यूएसडीएमए के वित्त नियंत्रक श्री अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ पीडी माथुर, डाॅ. बिमलेश जोशी, यूजेवीएनएल के ईई श्री मनोज रावत, शहरी विकास के सहायक निदेशक श्री विनोद कुमार, डिप्टी डायरेक्टर सोनिका पंत, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. सुनील कुमार अवस्थी, डाॅ अशोक कुमार, शिक्षा विभाग से रचना रावत, विमल असवाल, राजेश लाम्बा, नवीन सिंघल, एसई पिटकुल श्री बीएस पांगती के साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

विभागों को माॅक ड्रिल कराने के निर्देश
देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित रूप से आपदा के दौरान अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर मॉक अभ्यास आयोजित करें, जिससे आपदा के समय विभागीय मानव संसाधन, उपकरणों, संचार व्यवस्था एवं समन्वय क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सके। मॉक अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाए ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावी रूप से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा सकें।

आपदा प्रबंधन प्लान में ये रहेंगे शामिल
* राज्य एवं विभाग से संबंधित आपदा जोखिम एवं संवेदनशीलता विश्लेषण
* रोकथाम एवं न्यूनीकरण के उपाय
* तैयारी एवं प्रतिक्रिया योजना
* उपलब्ध मानव, मशीनरी एवं तकनीकी संसाधनों का विवरण
* इमरजेंसी एक्शन प्लान एवं एसओपी
* अर्ली वार्निंग एवं सूचना प्रसारण व्यवस्था
* राहत, पुनर्वास, रिकवरी एवं रिकंस्ट्रक्शन योजना
* डैमेज एंड लॉस असेसमेंट की प्रक्रिया
* क्षमता विकास एवं वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर
* बिल्ड बैक बेटर एवं विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का समावेशन

आगे पढ़ें

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में  ““जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान से सशक्त हो रहा जनसेवा तंत्र*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान निरंतर जनसेवा, सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। इस अभिनव अभियान के माध्यम से शासन को सीधे आम जनता से जोड़ते हुए उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत आज कुल 7 शिविरों (कैंपों) का आयोजन किया गया, जिनमें 5,507 नागरिकों ने प्रतिभाग कर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि आमजन का सरकार पर विश्वास निरंतर मजबूत हो रहा है।

अब तक अभियान के तहत कुल 604 शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 4,74,285 से अधिक नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही है। इन शिविरों के माध्यम से राजस्व, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम, पेंशन, प्रमाण-पत्र, शिकायत निवारण सहित अनेक विभागीय सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट विज़न है कि शासन केवल सचिवालयों तक सीमित न रहे, बल्कि जनता के द्वार तक पहुँचे। इसी सोच के अनुरूप यह अभियान राज्य में लोक-हितैषी शासन, जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना है और “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान इस संकल्प को साकार करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने अभियान से जुड़े सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाए जाने की बात कही।

प्रदेश सरकार इस अभियान के माध्यम से सेवा, समाधान और संतोष के सिद्धांत पर चलते हुए राज्य को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पबद्ध है।

आगे पढ़ें

 

मुख्यमंत्री से पशु पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा,

टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय, राजपुर विधायक खजान दास, रायपुर विधायक उमेश शर्मा काउ, धर्म पुर विधायक विनोद चमोली, महंत दिलीप रावत, सुरेश , पार्वती चंदन राम दास ने भेंट की

आगे पढ़ें

जैविक काली हल्दी का तेल 4बूंद सोते समय नाभि पर लगाने से शुगर कैंसर थायराइड, महिलाओं के पीरियड का दर्द और शरीर पुष्ट करने में नार्मल डिलेवरी करने के लिए लाभकारी है। प्रत्येक परिवार को इसका प्रयोग करना लाभ कारी है। मोबाइल no 7983825336 पर संपर्क कीजिएगा।