डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि शहरों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध जानिए सभी समाचार

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देहरादून 10 फरवरी, 2026


  • मुख्यमंत्री के विज़न में शहरी विकास को नई दिशा, हरिद्वार-रुड़की महायोजना 2041 पर राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
  • राज्य सरकार शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध- डॉ. आर. राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अंतर्गत उत्तराखंड में नियोजित, संतुलित एवं सतत शहरी विकास को गति देने के उद्देश्य से आवास विभाग द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित अमृत 1.0 योजना के अंतर्गत प्रस्तावित हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना-2041 के प्रारूप पर आज राज्य सचिवालय, देहरादून में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

भविष्य के शहरों का रोडमैप
बैठक में हरिद्वार एवं रुड़की क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए महायोजना के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें भूमि उपयोग, आवासीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास, यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, पर्यावरण संरक्षण तथा सार्वजनिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई। शशि मोहन श्रीवास्तव, चीफ टॉउन एंड कन्ट्री प्लॉनर ने इस योजना की बावत सभी महत्वपूर्ण जानकारी सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार से साझा की। शशि मोहन श्रीवास्तव द्वारा महायोजना के प्रारूप की विस्तृत प्रस्तुति देते हुए अब तक की गई कार्यवाही और आगामी चरणों की जानकारी दी गई।
सार्वजनिक सहभागिता को मिला विशेष महत्व
उल्लेखनीय है कि हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना-2041 के प्रारूप पर सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की जा चुकी है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत हरिद्वार महायोजना के लिए लगभग 350 तथा रुड़की महायोजना के लिए लगभग 550 सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। बैठक के दौरान इन सभी आपत्तियों एवं सुझावों पर बिंदुवार चर्चा करते हुए उनके निस्तारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने पर मंथन किया गया। आवास सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता से प्राप्त प्रत्येक सुझाव का गंभीरता, पारदर्शिता एवं नियमानुसार परीक्षण किया जाए, ताकि महायोजना जनअपेक्षाओं के अनुरूप और व्यावहारिक बन सके।
नियोजित विकास से सशक्त होगा हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बैठक के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हरिद्वार एवं रुड़की महायोजना-2041 का उद्देश्य केवल भौतिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुदृढ़ आधारभूत ढांचा और नागरिकों को उच्च जीवन स्तर प्रदान करना भी शामिल है। सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों को गंभीरता से लिया गया है, ताकि महायोजना वास्तविक जरूरतों को प्रतिबिंबित कर सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए, जिससे क्षेत्र के नियोजित एवं सतत विकास को नई गति मिल सके।
शीघ्र अनुमोदन की दिशा में कार्रवाई
बैठक के अंत में आवास सचिव द्वारा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि महायोजना-2041 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में समयबद्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि इसे शीघ्र शासन स्तर पर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि महायोजना का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में हरिद्वार एवं रुड़की को आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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टिहरी/दिनांक 10 फरवरी, 2026

‘‘सुरक्षित इन्टरनेट एवं एआई की सार्थक उपयोगिता पर कार्यशाला संपन्न‘‘

‘सेफर इन्टरनेट दिवस’ के अवसर पर आज मंगलवार को कीड़ा विभाग के सभागार (निकट विकास भवन), नई टिहरी में सुरक्षित इन्टरनेट के उपयोग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सार्थक उपयोगिता विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य कार्यालय कार्मिकों एवं आमजनमानस को इन्टरनेट के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा सामान्य साइबर अपराधों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।

इस मौके पर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी कुसुम ने एआई के तहत डीप फेक वीडियो, वॉयस क्लोनिंग, चैटवोट्स आदि के साथ ही ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग अटैक, डेटा चोरी, सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों एवं उनसे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके द्वारा सुरक्षित पासवर्ड, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, संदिग्ध लिंक एवं संदेशों से बचाव तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा आदि के बारे में बताते हुए मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, ओटीपी और पासवर्ड किसी को साझा न करने, अपने एकाउंट्स पर नियमित निगरानी रखने, कार्ड की फोटो और विवरण सोशल मीडिया पर साझा न करने, मोबाइल से अनउपयोगी एप्स को हटाने तथा एप केवल अधिकारिक स्रोत (गूगल प्ले स्टोर, एप्पल एप स्टोर) से ही डाउनलोड करने की सलाह दी गई। ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम की जानकारी देते हुए फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज पर भारी छूट के लालच में न आने तथा जहां तक सम्भव हो केश ऑन डिलीवरी को अपनाने की सलाह दी गई।

इसके साथ ही एआई के सकारात्मक उपयोग एवं दुरुपयोग से होने वाले संभावित खतरों एवं उनसे सतर्क रहने की जानकारी दी गई। बताया गया कि किस प्रकार एआई का उपयोग शासकीय कार्यों, सूचना प्रबंधन, जनसुविधाओं को अधिक प्रभावी बनाने आदि में किया जा सकता है। उनके द्वारा रिमोट एक्सेस स्कैम (एनी डेस्क, टीम व्यूअर, क्विक सपोर्ट) का उपयोग न करने, सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करने तथा ऑटो अपडेट की सुविधा को चालू रखने की सलाह दी गई, ताकि सुरक्षा पैच अपने आप इंस्टॉल हो सके।

पुलिस विभाग से धनराज बिष्ट ने साइवर सुरक्षा की जानकारी देते हुए अंडर 18 छात्र-छात्राओं को सोशल मीडिया साइट पर एकांउट्स न बनाने की सलाह दी। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म पर अपने डॉक्यूमेंट्स शेयर न करने, किसी अनजान से बात न करने, किसी की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने तथा किसी को ओटीपी शेयर न करने को कहा गया। डिजीटल रूप से धोखाधड़ी होने पर तुरन्त अपना पासवर्ड बदलने और तत्काल डिजीटल अरेस्ट स्कैम नम्बर 1930 पर कॉल करने को कहा गया।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से उपस्थितजनों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।
कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी टिहरी अवधेश कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी मो. असलम सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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टिहरी/दिनांक 10 फरवरी, 2026

“डीएम नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में नकॉर्ड बैठक सम्पन्न, नशा रोकथाम पर जोर”

“स्कूलों के आसपास भांग की खेती नष्ट करने के निर्देश, ड्रग टेस्टिंग होगी रैंडम”

“शैक्षिक संस्थानों के 100 मीटर दायरे में तंबाकू दुकानों पर रोक सुनिश्चित करने के आदेश”

आज मंगलवार को जनपद टिहरी गढ़वाल के कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में नकॉर्ड (NCORD) की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि ड्रग टेस्टिंग किट के सैंपल मंगाए गए हैं, जिनके माध्यम से स्कूलों एवं कॉलेजों में रैंडम टेस्टिंग की जाएगी। शिक्षा विभाग ने बताया कि नशा उन्मूलन हेतु निरंतर वर्कशॉप, क्विज प्रतियोगिता एवं शपथ कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

बैठक में जेल प्रशासन द्वारा मानस पोस्टर के प्रचार-प्रसार एवं बंदियों की काउंसलिंग किए जाने की जानकारी दी गई। बाल कल्याण समिति ने आठ विद्यालयों में लगाए गए जागरूकता कैंपों की जानकारी दी। वन विभाग ने बताया कि नियमित निरीक्षण कर पोस्त, अफीम एवं भांग की अवैध खेती को नष्ट किया जा रहा है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि स्कूलों के आसपास किसी भी प्रकार की भांग की खेती को तत्काल नष्ट किया जाए। साथ ही सभी शैक्षिक संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू की दुकानें न हों, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मानस हेल्पलाइन के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा ड्रग इंस्पेक्टर को पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर रोस्टर बनाकर मेडिकल स्टोरों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार, एएसपी दीपक सिंह, पीजी कॉलेज से डॉ जयेन्द्र सजवान, जेल प्रशासन से दीपाली, स्वास्थ से डॉ रीना, डॉ बृजेश, बाल कल्याण से रश्मि, समाज कल्याण से मयंक, जिला सेवायोजन अधिकारी लक्ष्मी, पंचायती राज से रविन्द्र आदि उपस्थित रहे।

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टिहरी/दिनांक 10 फरवरी, 2026

“टिहरी लेक महोत्सव में होंगे मास्टर शेफ, फैशन शो, राफ्टिंग व काइट शो सहित कई आकर्षक आयोजन”

“डीएम टिहरी ने कोटि कॉलोनी का निरीक्षण कर टिहरी लेक महोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की”

जनपद टिहरी गढ़वाल क्षेत्रांतर्गत कोटि कॉलोनी में आज जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा आगामी टिहरी लेक महोत्सव के संबंध में बैठक आयोजित की गई।

जिलाधिकारी ने कोटि कॉलोनी स्थित भूखण्ड के इष्टतम उपयोग के संबंध में निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसके पश्चात कोटि कॉलोनी स्थित ली रॉय होटल में जनप्रतिनिधियों के साथ महोत्सव की तैयारियों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में नगर पालिका टिहरी के अध्यक्ष मोहन रावत ने नई टिहरी में सजावट एवं फुटबॉल टूर्नामेंट के आयोजन की जानकारी दी। वहीं नगर पालिका मुनि की रेती की अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण ने काइट शो के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देने की बात कही।

मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने महोत्सव के अंतर्गत आयोजित की जाने वाली विभिन्न प्रतियोगिताओं की जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में मास्टर शेफ टिहरी, फोटोग्राफी, रैप, पेंटिंग, पहाड़ी परिधान पर फैशन शो (मिस्टर एंड मिस टिहरी), राफ्टिंग एवं काइट शो आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त ट्रैकिंग, पैराग्लाइडिंग, वाटर स्पोर्ट्स, माउंटेन बाइकिंग एवं फूड फेस्टिवल जैसे आकर्षक आयोजन भी महोत्सव का हिस्सा होंगे। प्रतियोगिताओं में प्रथम तीन विजेताओं को क्रमशः ₹1,00,000, ₹50,000 एवं ₹25,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। महोत्सव के दौरान “Save गंगा” थीम पर आधारित कार्यक्रमों के साथ-साथ पुरानी टिहरी एवं अन्य विषयों पर सांस्कृतिक एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस बैठक में घनसाली विधायक शक्तिलाल शाह, बीजेपी जिलाध्यक्ष उदय रावत, नगर पालिका टिहरी अध्यक्ष मोहन रावत, नगर पालिका चंबा अध्यक्ष शोभनी धनोला, नगर पालिका मुनि की रेती अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, नगर पंचायत घनसाली अध्यक्ष आनंद बिष्ट, बोट यूनियन अध्यक्ष कुलदीप पंवार सहित संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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*दिनांक 08-02-2026 को मदन नेगी, प्रतापनगर, टिहरी गढ़वाल,उत्तराखंड, विधान-सभा में हिन्दू सम्भेलन* में भाग लेने का मौका मिला आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन का श्री गंगा सभा हरिद्वार के सचिव तीर्थ पुरोहित श्री उज्जवल पंडित जी,आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख श्रीमान संजय जी ,सहकार भारती की प्रदेश मंत्री अवंतिका भंडारी जी ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। सम्मेलन में सनातन धर्म के हम सब के जीवन में महत्त्व पर प्रकाश डाला.! और हिंदू समाज को जगाने पर जोर दिया गया साथ ही स्थानीय छात्रों द्वारा देश भक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुतियों के साथ ही स्थानीय कलाकारों एवं कारीगरों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की कुछ फोटो शेयर कर रहा हूं.
*CA राजेश्वर पैन्यूली..!*
सह -संयोजक, आर्थिक प्रकोष्ठ एवम् प्रवक्ता (पैनिलिस्ट),बीजेपी उत्तराखण्ड..!

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इसका उपाय आपके साइंटिफिक एनालिसिस ने उसी समय पोस्ट लिखकर बता दिया वो कही प्लेटफार्मो पर प्रकाशित हुआ | इसे आगे राष्ट्रपति व उच्चतम न्यायालय को भेज दिया परन्तु कुछ नहीं हुआ …… मानसिक रूप से आज भी गुलाम भारत में हो क्या सकता हैं? सबकुछ कचरे के डिब्बे में फेक दिया | यही हैं गुलाम भारत और गुलामी में जीते भारत के लोग …..

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@everyone

आपके साइंटिफिक-एनालिसिस ने इससे भी खराब हालात की बात वर्षों पहले बता दी | कई अखबारों व प्लेटफार्मो पर चलवा दी | हमने सिर्फ रोना नहीं रोया बल्कि इसका सटीक तार्किक, वैज्ञानिक व संवैधानिक आधार का उपाय रिटर्न में भी दिया और आधिकारिक रूप से केन्द्र सरकार, उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रपति को भी भेजा | इन सभी के आधिकारिक दस्तावेज भी प्रमाण के रूप मे दिये |

पत्रकारिता से जुडे लोग भी कुछ करना नहीं चाहते तो फिर आम लोगों की बात करने का मतलब भी नहीं हैं | पत्रकारों के सैकडों संगठन हैं, उन तक भी बात पहुचाई परन्तु वो सभी सिर्फ बाते करते हैं और संगठन की फीस के नाम पर जेबे भरते हैं | यह न तो साइंटिफिक-एनालिसिस की योजना को आगे बढाते हैं और न ही अपनी तरफ से कोई योजना व प्लानिंग सामने रखते हैं |

सभी अपने आप में बहुत बडे व तीस मार खा समझते हैं | सभी पत्रकारों व संगठनों को साथ लेकर चलने में विश्वास नहीं करते | सामुहिक रूप से कानूनी आधार पर आर्थिक उत्थान की योजना उपलब्ध कराई जाती हैं तब भी कोई कुछ नहीं सुनता व करता हैं | जब आत्महत्या के रूप में सबसे खत्म होने का दृढनिश्चय कर लिया हो तो कोई क्या कर सकता हैं |

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चैनलों का खेल खत्म, सेरेंडर हो रहे हैं लाइसेंस…!!
(पवन सिंह)
भारतीय न्यूज चैनलों का भविष्य क्या दांव पर लग चुका है? बड़ी संख्या में न्यूज चैनलों से दर्शक विमुख हुए हैं। तमाम दर्शकों ने विगत कुछ सालों से न्यूज चैनलों को “आंख तक नहीं लगाया है”…..!!! मात्र 25 सालों में ही न्यूज चैनल अपनी विश्वसनीयता और अपना विशालकाय दर्शक वर्ग खो देंगे, ऐसा नहीं सोचा गया था लेकिन यह हो चुका है। न्यूज चैनल्स के दर्शक अब सिरे से गायब हो चुके हैं..!! इसका बहुत बड़ा कारण है चैनलों का जनसरोकारी खबरों से दूर होना और पूरा दिन सांप्रदायिक बहसों को हवा देना…!! दरअसल, भारतीय चैनल्स एक्सपो हो चुके हैं और यह प्रकृति का नियम है कि जो एक बार एक्सपोज हो जाता है वह हमेशा के लिए हाशिए पर चला जाता है। विश्वसनीयता का धूलधूसरित होना न्यूज चैनलों के विनाश का प्रमुख कारण बन रहा है। एक उदाहरण देना चाहूंगा जैसे ही दिल्ली के एक बड़े हिंदी न्यूज चैनल को एक “विशालकाय उद्योगपति” ने टेक ओवर किया, उसके कुछ ही महीनों बाद चैनल का एक बड़ा दर्शक वर्ग उस चैनल से भाग खड़ा हुआ। अब हुआ यह कि चैनल संचालक जनता से दूर हटे और जनता उनसे दूर हुई…!! आप न्यूज चैनल तो खोल सकते हैं… लेकिन दर्शक वर्ग किसी भी कीमत पर नहीं ला सकते…!!! आज हालात यह हो चले हैं कि तमाम न्यूज चैनलों ने अपने-अपने ब्राड कास्टिंग लाइसेंस सेरेंडर करने आरंभ कर दिए हैं…!!! यह सब मात्र ढाई दशकों में ही देखने को मिलेगा ऐसा नहीं सोचा था…!!!
देश में विगत तीन वर्षों में करीब 50 टीवी चैनलों ने अपने ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। लगातार एक ही तरह की प्रायोजित और एक तरफा खबरों से उकताए दर्शकों का एक बड़ा वर्ग डिजिटल व OTT प्लेटफॉर्म्स की ओर जा चुका है। इसके बाद चैनल आपरेटरों को दूसरा झटका गिरते विज्ञापन राजस्व, उच्च परिचालन लागत और बाजार की बदलती हुई स्थितियों ने दिया। परिचालन लागत ज्यादा हुई व विज्ञापन राजस्व कम हुआ …साथ ही दर्शक वर्ग गायब और कम दर्शकों के कारण विज्ञापन दाता कंपनियों द्वारा हाथ खींचना या विज्ञापन दरें कम कर देना, एक बड़ा कारण रहा। यह असर इंटरनेट चैनलों पर भी देखा जा रहा है।
देश में DTH ग्राहकों में भी लगातार भारी गिरावट होती जा रही है…भारत में DTH ग्राहकों की संख्या वित्तीय वर्ष 2019-20 में 72 मिलियन से घटकर वित्तीय वर्ष 2024 में 62 मिलियन रह गई…यह संख्या लगातार तेजी से घटती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत वर्षों में जिन प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स ने अपने-अपने लाइसेंस सरेंडर किए हैं उनमें- JioStar, Zee Entertainment, Eenadu Television, TV Today Network, NDTV, और ABP Network के नाम शामिल हैं जिन्होंने अपने कई चैनलों के लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार Culver Max Entertainment यानी सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया ने भी 26 डाउनलिंकिंग अनुमतियां सरेंडर की हैं। ABP Network ने उच्च लागत के कारण ABP News HD बंद कर दिया, और NDTV ने अपने प्रस्तावित ‘NDTV Gujarati’ चैनल का लाइसेंस वापस कर दिया।
न्यूज चैनल्स जो कभी धड़ाधड़ प्रादेशिक न्यूज चैनल्स खोल रहे थे वह सब के सब धीरे-धीरे बंद होते चले गये। सबसे ज्यादा प्रादेशिक चैनल्स बंद हुए। मेरे एक पत्रकार साथी ने 2016 में बातचीत में कहा था कि एक दिन लाल किले के पीछे बाजार में न्यूज चैनलों के कैमरे और आईडी किलो में बिकेंगी…वह बात आज सच साबित हो रही है..!!
जो न्यूज चैनल्स जिंदा भी हैं उनको विभिन्न राज्यों के सूचना विभाग और दिल्ली की मिनिस्ट्री आफ ब्राड कास्टिंग ने वेंटीलेटर की सुविधा पर रख रखा है।
नाम न खोलने की शर्त पर एक बड़ी कंपनी के सीईओ जो कि मेरे मित्र भी हैं, का कहना है- हर साल हमारी कंपनी का पब्लिसिटी बजट करीब 20 करोड़ का हुआ करता था लेकिन जिस तरह से आम जनता की पर्चेजिंग पावर घटी है और निर्यात में दिक्कतें बढ़ी हैं, अब पब्लिसिटी बजट जारी रख पाना कठिन है। चीन से जबरदस्त चुनौती अलग से है…!! कमोबेश देश की तमाम बड़ी कंपनियों ने अपना पब्लिसिटी बजट घटा दिया है और अब अपनी शर्तों पर विज्ञापन जारी कर रही हैं। उनके रेट पर विज्ञापन लेना हो तो आओ वरना चैनल के आफिस में बैठो..!!!
न्यूज चैनल्स के संदर्भ में हालात अभी और भी खराब होंगें। दर्शकों को बड़े पत्रकारों के यूट्यूब चैनल्स लुभाने लगे हैं…जहां संदर्भों के साथ और बिना किसी सेंसर शिप का कंटेंट हैं..!! कमेंट्स खुला है…सहमति-असहमति प्रगट करने की त्वरित सुविधा है। बहस का एक स्तर है …शाम छह बजे से आठ बजे तक स्टूडियो में बेमतलब के विषयों पर मुर्गे-मुर्गियां लड़ाने की परंपरा नहीं है। … इंटरटेनमेंट के लिए तमाम ओटीटी प्लेटफॉर्म हैं और तात्कालिक न्यूज के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं।
इधर चैनलों की मंहगी विज्ञापन दरों की काट देश के कुछ सूचना विभागों ने निकाल ही है। वे कम लागत में एलईडी वैन पर गांव-गांव व सुदूर कस्बों तक सरकारी योजनाओं को सीधे जनता तक कनेक्ट करने में सफल हो रहे हैं। जहां विज्ञापन की अवधि और उस बढी अवधि के हिसाब से दरों के बढ़ने का डर नहीं है। एलईडी वैन की जीपीएस से मानीटरिंग हो रही है…!!! कम लागत और सीधे जनता से कनेक्टिविटी का यह प्रयोग छोटे राज्यों में धीरे-धीरे लोकप्रिय होता जा रहा है।
भारत में न्यूज़ चैनल्स की शुरुआत औपचारिक रूप से 1965 में दूरदर्शन से हुई थी। 1965 में दूरदर्शन पर मात्र 5 मिनट का पहला नियमित समाचार बुलेटिन प्रतिमा पुरी द्वारा पढ़ा गया था. इसके बाद दूरदर्शन न्यूज का एक लंबा युग चला। प्रादेशिक समाचार प्रसारण भी आरंभ हुए। वर्ष, 1991 में जब खाड़ी युद्ध आरंभ हुआ और CNN जैसे विदेशी चैनल्स ने कवरेज दी तो लोग आश्चर्यचकित रह गये। भारत में 1992 में पहला प्राइवेट ब्रॉडकास्टिंग न्यूज चैनल जी न्यूज आया और फिर आज तक …सैटेलाइट टीवी के आने के बाद बहुत कुछ बदला। वर्ष, 1999 में आज तक डीडी से हटा और 24 घंटे का स्वतंत्र चैनल बना।
2000 के बाद तमाम न्यूज चैनल्स आए और 2025 के अंत तक आते-आते अब सरेंडर युग की ओर जा रहे हैं‌ ।