Good news DM ने चारधाम यात्रा 2026 को लेकर हुई बैठक में सम्बन्धितों को दिये गये निर्देश जानिए सभी समाचार

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टिहरी दिनांक: 13 मार्च, 2026

आगामी चारधाम यात्रा को लेकर हुई एक अहम बैठक सम्बन्धितों को दिये गये आवश्यक निर्देश ।
आज शुक्रवार 13 मार्च को कलेक्ट्रेट वीसी कक्ष में जिलाधिकरी नितिका खण्डेलवाल ने आगामी चारधाम यात्रा को लेकर सभी सम्बन्धित विभागों की बैठक ली तथा आवश्यक निर्देश दिए ।
उन्होंने सभी विभागाध्यक्षो को अगले 15 दिनों में अपने अपने विभागीय सम्बन्धी कार्य स्थलों का निरीक्षण कर जो भी आवश्यकता है उसे समयान्तर्गत पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को
चार धाम यात्रा रूट पर एम्बुलेंस, स्वास्थ्य उपकरणों, दवा, अस्पतालों की साफ सफाई करने, सभी एम्बुलेंस एआरटीओ से चेक कराने, सभी अस्पताल / स्वास्थ्य केन्द्रों पर डॉक्टर और अन्य कार्मिक तैनात रहेंगे ड्यूटी से नदारद न रहें इसकी व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित की जाए ।
पेयजल विभाग को सभी हैण्डपम्पों की चेकिंग कर रंग रोगन करने तथा पेयजल की टंकियों की साफ सफाई सम्बंधी, लोनिवि व एनएच के अधिकारियों को सड़क से मलबा हटाने, साईन बोर्ड लगाने, टूटे हुए पैराफिटो को ठीक करने, तथा जेसीबी सहित अन्य मशीने तैनात करने, पूर्ति व खादय अभिहित विभाग को दुकानों, होटल , ढाबा पर रेट लिस्ट चस्पा कराने, सैंपिलिंग करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने, विद्युत विभाग को विद्युत सम्बन्धी सभी चेकिंग /तैयारियों को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए ।

बैठक में जिलाधिकारी ने वर्चुअल माध्यम से जुड़े एसडीएम नरेंद्र नगर आशीष घिल्डियाल को नगर पालिका क्षेत्र मुनीकीरेति एवं नगर पंचायत तपोवन क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था दुरस्त करने, सीओ नरेन्द्रनगर के साथ मिलकर टैक्सी, राफ्टिंग, होटल के एसोसिएसनो से बैठक कर व्यवस्थाओ को दुरुस्त करने के निर्देश दिए । उन्होंने क्षेत्र के शौचालयों की पूर्ण व्यवस्था मोबाइल शौचालयों, सुलभ शौचालयों पर सभी आवश्यक व्यस्था नगर पालिका / नगर पंचायत से करवाने सम्बन्धी निर्देश दिए । इसी क्षेत्र में जो व्यक्तिगत पानी के टैंकर्स चलते है वे किसी स्थान से पानी ला रहा ये इसकी जानकारी व यात्रा सीजन में टैंकर्सो के आवागमन हेतु टाइमिंग बताने सम्बन्धी कार्य करने के निर्देश दिए ।
बैठक में एसएसपी आयुष अग्रवाल ने बताया कि चारधाम यात्रा के मध्यनजर पुलिस बल की पूर्ण व्यवस्था है जो विभिन्न स्थानों में अपना दायित्व निभाएंगे ।
बैठक में एआरटीओ को निर्देश दिए कि यात्रा सीजन में स्थानीय लोगों को आवागमन में कोई दिक्कत न वाहनों की समुचित व्यवस्था रखने के निर्देश दिए ।
बैठक में एआरटीओ ने बताया कि 01 अप्रैल से सभी चेक पोस्ट कार्य करने लग जायेंगे ।

इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता मनोज बिष्ट, डॉ जितेन्द्र भण्डारी, एआरटीओ सतेन्द्रराज, डीएसओ मनोज कुमार डोभाल, खाद्य अभिहित अधिकारी अधिशासी अभियंता लोनिवि योगेश कुमार व विधुत अमित आनन्द, जल संस्थान प्रशान्त भारद्वाज सहित सम्बन्धित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे ।

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टिहरी दिनांक: 13 मार्च, 2026
जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाला ने जनपद के सभी एलपीजी उपभोक्ताओं से अपील की है कि जनपद भर में एलपीजी का कोई कमी नहीं है हड़बड़ाहट करने की आवश्यकता नहीं जितना कोटा जनपद का है उतना मिल रहा है ।

उन्होंने कहा कि नयी गाईड लाईन के अनुसार पहले 21 दिन में गैस सिलेंडर की बुकिंग होती थी वे अब 25 दिन के बाद होगी । उन्होंने सभी से नयी गाईड लाईन का पालन करने की अपील की ।
उन्होंने कहा कि यदि ऑनलाइन बुकिंग करने में कोई दिक्कत आ रही है तो गैस एजेंसी में जाकर ऑफलाइन बुकिंग करा सकते हैं, इसके उपरांत आपके स्थान / गांवों में मार्केट में जहां पर पूर्व में आपको गैस सिलेंडर मिलता था संबंधित एजेंसी द्वारा सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा । उन्होंने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक उपभोक्ता को सिलेण्डर उपलब्ध कराया जाएगा । बैठक में उप जिलाधिकारी स्नेहिल कुंवर पूर्ति अधिकारी मनोज डोभाल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए

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पशुचिकित्सा रोगों के त्वारित निदान में नये तकनीको के प्रवेश से बदलते परिदृश्य के दृष्टिगत पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियो के कौशल विकास में वृद्धि करने हेतु उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून द्वारा दिनाक 09.03.2026 से 13.03.2026 तक पशुपालन विभाग में कार्यरत 30 फार्मेसी अधिकारियों के लिए पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “Laboratory Techniques for Disease Diagnosis and Outbreak Management” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ निदेशक, पशुपालन विभाग, देहरादून- डॉ. उदय शंकर, व अपर निदेशक, पशुपालन विभाग, गढ़वाल मण्डल, पौडी डॉ. भूपेन्द्र सिह जगपागी तथा अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून डॉ. कैलाश उनियाल द्वारा दीप प्रजवल्लित कर किया गया।

इस अवसर पर डॉ. सतीश जोशी, सयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिभागियों को उक्त प्रशिक्षण के विषय के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण हेतु विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ आलोक खण्डूरी, पशुचिकित्सा अधिकारी, गण्डलीय प्रयोगशाला, पौडी तथा डा० प्रीति पंत, वरिष्ठ पशुचिकित्साधिकारी रोग निदान प्रयोगशाला, पशुलोक, ऋषिकेश द्वारा पशुओं में होने वाली बिमारियों के त्वरित निदान हेतु नवीनतम तकनीको पर विस्तार से बताया गया।

डॉ. प्रलयकर नाथ, रजिस्ट्रार, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद द्वारा अवगत कराया गया कि पशुपालन विभाग के फार्मेसी अधिकारियों के कौशल विकास हेतु विभाग द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे है।

डॉ. उदय शकर, निदेशक, पशुपालन विभाग, देहरादून द्वारा प्रतिभागी फार्मेसी अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए पशुपालको को बेहतर पशुचिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराए।

डॉ. कैलाश उनियाल, अध्यक्ष, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून द्वारा गॉडल पशुचिकित्साल्यों में पशु रोग निदान में उक्त प्रशिक्षण की महत्वता पर विशेष बल दिया गया।

इस अवसर पर डॉ. उदय शंकर गुप्ता, उप रजिस्ट्रार उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, देहरादून भी उपस्थित रहे।
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08 वर्षों से लापता पति; 02 दिव्यांग बेटियों सहित 05 बच्चों की जिम्मेदारी तले दबी मीना ठाकुर की पीड़ा हरने आया जिला प्रशासन; सीएसआर फंड से 01 लाख हस्तांतरण

मीना ठाकुर की 03 बेटियों की शिक्षा प्रोजेक्ट ‘‘नंदा-सुनंदा से पहले ही करा चुकें हैं पुनर्जीवित;

2 बच्चों की परित्यक्ता माता अमृता; बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रसित; छोटो बेटे की पढाई पर आया संकट; जिला प्रशासन बना सहारा

अमृता की गंभीर आर्थिक तंगी के चलते छोटे बेटे को स्कूल ने तथा अमृता को मकान मालिक ने निकाला घर से बाहर; संकटमोचक बना जिला प्रशासन सीएसआर फंड से 01 लाख आर्थिक सहायता

मा0 मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में व्यथित असहाय; दिव्यांग, महिला; बुजुर्ग नौनिहालों के हितो के रक्षण हेतु तत्पर जिला प्रशासन

देहरादून दिनांक 13 मार्च 2026,  जनपद में असहाय, पीड़ित एवं जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के प्रति जिला प्रशासन निंरतर संवेदनशीलता से कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप से विपरीत परिस्थितियों से जूझ रही 5 बच्चों की माता मीना ठाकुर एवं 2 बच्चों की माता परित्यक्ता अमृता जोशी को 1-1 लाख की धनराशि सीएसआर फंड से प्रदान की गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने प्रकरणों पर जांच जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी।
प्रकरण-1 सुद्दोवाला निवासी मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि उनके पति पिछले लगभग आठ वर्षों से लापता हैं, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। ऐसी परिस्थिति में मीना ठाकुर पर अपने पांच बच्चों के लालन-पालन, शिक्षा और भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी आ गई है। आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति के कारण वह किराये के मकान में रहकर बड़ी कठिनाई से अपने परिवार का गुजर-बसर कर रही हैं।
मीना ठाकुर के परिवार में 4 बेटियां तथा 1 बेटा व 2 दिव्यांग बेटी है। बच्चों की शिक्षा तथा परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया था। विशेष रूप से दिव्यांग बेटी के देखभाल एवं उपचार की जिम्मेदारी के कारण आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया था। मीना ठाकुर की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सीएसआर (कॉर्पाेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से 01 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए, जो सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी गई।
जिलाधिकारी द्वारा प्रदान की गई इस सहायता राशि से मीना ठाकुर अब स्वरोजगार के माध्यम से कोई छोटा-मोटा व्यवसाय प्रारंभ कर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए स्थायी आय का स्रोत विकसित कर सकेंगी। इससे उनके बच्चों की शिक्षा तथा परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में भी सहायता मिलेगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि मीना ठाकुर के परिवार को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने मीना ठाकुर की तीनों बेटियों की शिक्षा को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के माध्यम से पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए, जिससे उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला समाज कल्याण अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देशित किया कि मीना ठाकुर की दिव्यांग बेटियों के कल्याण के लिए विभाग द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।
प्रकरण-2 खुड़बुड़ा क्षेत्र में किराये के मकान में निवास कर रही परित्यक्ता महिला अमृता जोशी जीवनयापन के लिए दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। उनके परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उनका बड़ा बेटा मानसिक विकार से ग्रस्त है, जिसके उपचार में निरंतर आर्थिक व्यय हो रहा था। सीमित आय के कारण वह अपने बेटे के उपचार तथा घर की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो रही थीं। इसी बीच कई महीनों से छोटे बेटे की स्कूल फीस जमा न होने के कारण विद्यालय प्रबंधन द्वारा बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया। वहीं आर्थिक तंगी के चलते मकान का किराया भी समय पर अदा न कर पाने के कारण मकान मालिक ने अमृता जोशी और उनके परिवार को घर से बाहर कर दिया। ऐसी विषम परिस्थितियों में अमृता जोशी ने अपनी व्यथा जिलाधिकारी को सुनाई। डीएम ने अमृता की दयनीय स्थिति एवं पारिवारिक जिम्मेदारी को दृष्टिगत रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और सीएसआर (कॉर्पाेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के माध्यम से अमृता जोशी को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके बैंक खाते में हस्तांतरित करवाई।
इस सहायता राशि से अमृता जोशी अब अपने बड़े बेटे का समुचित उपचार कराने के साथ ही छोटे बेटे की स्कूल फीस तथा मकान का बकाया किराया अदा कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त वह इस धनराशि का उपयोग कर कोई छोटा-मोटा स्वरोजगार प्रारंभ कर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए स्थायी आय का स्रोत भी विकसित कर सकेंगी।
जिलाधिकारी की इस पहल से न केवल एक जरूरतमंद परिवारों को संकट की घड़ी में संबल मिला है, जिला प्रशासन द्वारा असहाय, व्यथित एवं पीड़ित व्यक्तियों की समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित और मानवीय कदम उठाए जाते हैं। जिला प्रशासन द्वारा आगे भी ऐसे जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते रहेंगे।

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*देहरादून 13 मार्च 2026*

क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, देहरादून के द्वारा शहीद दुर्गा मल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला देहरादून में दिनांक 16.03.2026 को पूर्वाहन 10:00 बजे से रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। रोजगार मेले में मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग, हॉस्पिटेलिटी सर्विस, फार्मा, टेलीकॉम, ई-कॉर्मर्स सेल्स एण्ड मार्केटिंग आदि क्षेत्रों की प्रतिष्ठित 35 से अधिक नियोजकों द्वारा 900 से अधिक पदों हेतु साक्षात्कार आयोजित कर बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किया जायेंगे। रोजगार मेले में आठवीं, हाईस्कूल, इण्टरमीडिएट, स्नातक, परास्नातक, आई०टी०आई, डिप्लोमा आदि शैक्षिक योग्यताधारी अभ्यर्थियों द्वारा प्रतिभाग किया जा सकता है। अभ्यर्थी नीचे दिये गये QR Code के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर रोजगार मेले में निःशुल्क भाग लेकर लाभ उठा सकते हैं।
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देहरादून दिनांक 13 मार्च 2026,मा0 मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा एलपीजी गैस से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कंट्रोलरूम सक्रिय है। जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल के निर्देशों जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपातकालीन परिचालन केन्द्र में संचालित कंट्रोलरूम में नागरिकों की एलपीजी गैस सम्बन्धी शिकायतों/समस्याओं के निस्तारण के सम्बन्ध कार्यवाही की जा रही है।

जिला प्रशासन द्वारा प्रसारित 1077, 0135-2626066, 2726066 और व्हाट्सएप नंबर 7534826066 के माध्यम से 05 बजे तक कुल 405 शिकायतें एलपीजी गैस की आपूर्ति के सम्बन्ध में दर्ज हुई है, वही कंट्रोल रूम में मौजूद जिला खाद्य पूर्ति विभाग, देहरादून में सप्लाई कर रही एलपीजी गैस के सभी एजेंसियों के प्रतिनिधित्व और जिला प्रशासन की टीम द्वारा लगातार आ रही एलपीजी गैस की आपूर्ति, सिलेंडर उपलब्धता या अन्य किसी प्रकार की समस्या को लेकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में आज लगभग 11 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस आपूर्ति की गई है। जबकि 53 हजार के लगभग बैकलॉग है। जिलें में एलपीजी गैस की मांग अनुसार आपूर्ति किये जाने हेतु लोड बढा दिए गए हैं, कल से बैकलॉग में कमी आयेगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कन्ट्रोल रूम में आई०ओ०सी०एल०, एच०पी०सी०एल० व बी०पी०सी०एल० द्वारा अपने प्रतिनिधि नामित किये जायेंगे, यह समस्त अधिकारी निर्धारित प्रारूप में सूचना के साथ प्रत्येक दिवस को प्रातः 11 बजे से अपरान्ह 01 बजे तक आपदा कन्ट्रोलरूम में उपस्थित रहेंगे। गैस आपूर्ति / वितरण विषयक अद्यतन सूचना उपलब्ध करायेंगे तथा गैस की कालाबाजारी, अवैध संग्रहण तथा रिफिलिंग आदि विषयक समस्याओं को दर्ज करते हुए तद्विषयक समाधान सुनिश्चित करेंगे ताकि सामान्य जनमानस में आपूर्ति से सम्बन्धी किसी भी प्रकार का भय अथवा संशय उत्पन्न न हो।
गैस की कालाबाजारी पर जिला प्रशासन ने छापेमारी कार्यवाही करते हुए 50 सिलेंडर जब्त कर दिए हैं, जिनमें देहरादून के सहस्त्रधारा, नालापानी लाडपुर क्षेत्र में 12 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। ऋषिकेश क्षेत्र में खदरी श्यामपुर अन्तर्गत 1 वाहन जिसमें 37 सिलेंडर थे जब्त किया गया है 2 लोगों को पकड़ा है। विकासनगर पीजी में छोपेमारी करते हुए 1 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किया गया है। तथा सम्बन्धित के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है।
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पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल उधम सिंह नगर संसदीय क्षेत्र से सांसद श्री अजय भट्ट ने लोकसभा सत्र के दौरान तारांकिक प्रश्न पूछते हुए विधि एवं न्याय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री अर्जुन राम मेघवाल से पूछा है कि देश में न्यायालय में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को शामिल किए जाने की स्थिति क्या है इसके अलावा न्यायालय में ई फाइलिंग शुरू कर दी गई है या नहीं और उत्तराखंड उच्च न्यायालय सहित न्यायालय और ब्यौरा सहित ई फाइलिंग माध्यम से कितने मामले दर्ज किए गए हैं इसके अलावा ई फाइलिंग भीम की जागरूकता के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

सांसद श्री अजय भट्ट के तारांकिक प्रश्न का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि ई-न्यायालय मिशन मोड परियोजना को न्यायिक प्रणाली में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से देश भर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इस परियोजना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, वर्चुअल न्यायालय, ई-फाइलिंग, ई-भुगतान, न्यायालय अभिलेखों का डिजिटलीकरण, उन्नत केस प्रबंधन प्रणाली और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के माध्यम से निगरानी जैसे विभिन्न उपाय आरंभ किए हैं। 31.01.2026 तक ई-न्यायालय परियोजना के अधीन कुछ प्रमुख पहलें निम्नानुसार हैं :

(i) तेजी से पुनर्प्राप्ति, सुरक्षित भंडारण और निर्बाध डिजिटल कार्यप्रवाह सुनिश्चित करने के लिए विरासत अभिलेखों सहित न्यायालय के अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों को न्यायालयों में डिजिटाइज किया गया है।

(ii) ट्रैफिक चालानों के ऑनलाइन न्यायनिर्णयन को सक्षम करने के लिए 30 वर्चुअल न्यायालय स्थापित किए गए हैं। वर्चुअल न्यायालयों को 10.13 करोड चालान प्राप्त हुए हैं और 1002.73 करोड़ रुपये के चालान का भुगतान किया गया है।

(iii) सभी उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम लागू किए गए हैं।

(iv) 3,240 न्यायालय परिसरों और 1,272 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) सुविधाओं का विस्तार किया गया है। न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाईयां की हैं, जिससे विचाराधीन कैदियों, गवाहों और वकीलों की दूरस्थ सुनवाई में सुविधा हुई है ।

(v) 11 उच्च न्यायालयों में न्यायालय कार्यवाहियों की लाइव स्ट्रीमिंग चालू है।

(vi) मामलों की ऑनलाइन फाइलिंग और न्यायालय फीस तथा जुर्माने के डिजिटल भुगतान की अनुमति देने के लिए ई-फाइलिंग और ई-भुगतान प्रणालियों को लागू किया गया है। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 1.07 करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं और ई-भुगतान प्रणाली ने 1,404 करोड़ रुपये की न्यायालय-फीस और 75 करोड़ रुपये के जुर्माने का लेनदेन किया है।

(vii) एनजेडीजी देश भर के न्यायालयों के मामले डेटा, आँकड़ों तक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है और मामलों की पहचान करने, प्रबंधन करने और लंबन को कम करने के लिए एक निगरानी उपकरण के रूप में काम करने वाले एक बेहतर डैशबोर्ड के साथ उसे अद्यतन किया गया है ।

सीआईएस 4.0 को सभी न्यायालयों में लागू किया गया है, जिसमें बढ़ी हुई उपयोगिता, गोपनीयता सुरक्षा उपाय और एनजेडीजी, ई-फाइलिंग, वर्चुअल न्यायालय और आईसीजेएस जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण शामिल है ।

(ix) एस3 डब्ल्यूएएएस प्लेटफॉर्म 730 जिला न्यायालय वेबसाइटों को होस्ट करता है, जो सुरक्षित और सुलभ वेब अवसंरचना को सुनिश्चित करता है।

(x) रियल-टाइम डिजिटल सेवाओं का काफी विस्तार हुआ है, एसएमएस पुश एंड पुल (प्रतिदिन 4 लाख से अधिक एसएमएस भेजे गए), ईमेल (प्रतिदिन 6 लाख से अधिक भेजे गए) और बहुभाषी ई-न्यायालय सेवा पोर्टल (प्रतिदिन 35 लाख हिट) के माध्यम से मामलों की अद्यतन जानकारियां वकीलों और वादकारियों को भेजी जा रही हैं।

(xi) ई-न्यायालय सर्विसेज मोबाइल ऐप (3.59 करोड़ डाउनलोड) वकीलों और वादकारियों को मामले की स्थिति, कारण सूची आदि के बारे में प्रासंगिक जानकारी प्रदान करता है।

(xii) जस्टआईएस ऐप (22,133 डाउनलोड) न्यायाधीशों के लिए एक प्रबंधन उपकरण है जो उन्हें अपने न्यायिक कार्य को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने और निगरानी करने में सहायता करता है ।

(xiii) सभी उच्च न्यायालयों में 48 ई-सेवा केंद्र और जिला न्यायालयों में 2,396 ई-सेवा केंद्र कार्यरत हैं ।

(xiv) मोबाइल आधारित और जीपीएस सक्षम वितरण तंत्र का उपयोग करके समन और नोटिस की इलेक्ट्रॉनिक सेवा और ट्रैकिंग के लिए नेशनल सर्विस एंड ट्रैकिंग ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोसेस (एनएसटीईपी) प्रणाली लागू की गई है। एनएसटीपीई के अधीन, न्यायालयों ने 7.29 करोड़ ई-आदेशिकाओं को प्रक्रियागत किया है ।

(xv) डिजिटल न्यायालय 2.1 कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) का उपयोग करके अनुवाद और प्रतिलेखन की सुविधा के साथ पेपरलेस न्यायालयों के लिए एक अनुकूलित अनुप्रयोग है। यह न्यायाधीशों को सभी मामले से संबंधित दस्तावेजों, अभिवचनों और साक्ष्यों को डिजिटल रूप से अभिगमन करने में सक्षम बनाता है, जो एक पेपरलेस न्यायालय इकोसिस्टम की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग है।

(ख) से (घ): ई-फाइलिंग प्रणाली विधिक दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग के लिए विकसित

एक समग्र समाधान है। यह वादकारियों और वकीलों को कहीं से भी और किसी भी समय मामले से संबंधित दस्तावेजों तक पहुंचने और अपलोड करने में सक्षम बनाता है, जिससे ऐसे दस्तावेजों को फाइल करने के लिए शारीरिक रूप से न्यायालयों में जाने की आवश्यकता कम हो जाती है। देश के सभी न्यायालयों में मामलों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग की प्रक्रिया को मानकीकृत करने के लिए भारत के उच्चतम न्यायालय की ई-समिति द्वारा ई-फाइलिंग के लिए मॉडल नियम तैयार किए गए थे। ई-फाइलिंग उत्तराखंड उच्च न्यायालय और उसके सभी जिला न्यायालयों सहित 25 उच्च न्यायालयों और संबंधित जिला न्यायालयों में चालू है । 31.01.2026 तक ई-फाइल किए गए मामलों की उच्च न्यायालय-वार संख्या उपाबंध में है।

ई-न्यायालय परियोजना के अधीन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और न्यायालय कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाओं, ई-न्यायालय सेवा पोर्टल और ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपयोगकर्ता मैनुअल, न्यायालय परिसरों में स्थापित ई-सेवा केंद्र और देश भर में आउटरीच पहलों के माध्यम से ई-फाइलिंग प्रक्रिया के बारे में जागरूकता पैदा की जा रही है।

इसके अलावा 13 मार्च 2026 तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 341 ई फाइलिंग के मामले और 101854 जिला न्यायालय के मामले सहित कुल 102195 मामले की ई फाइलिंग में दर्ज है।
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भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष व सांसद डा. नरेश बंसल ने सदन मे स्वदेश दर्शन के अंतर्गत परियोजनाएं संबंधित प्रश्न किया।

डा. नरेश बंसल ने पश्न किया कि क्या पर्यटन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः-
क- स्वदेश दर्शन तथा स्वदेशन दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत संस्वीकृत परियोजनाओं की संख्या कितनी-कितनी है।
ख- अब तक पूर्ण की गई परियोजनाओं की संख्या कितनी है
ग- चुनौती आधारित गंतव्य विकास (सीबीडीडी) पहल के उद्देश्य क्या हैं और इसके अंतर्गत समर्थित परियोजनाओं की श्रेणियां कौन-कौन सी हैं
घ- क्या दीर्घकालिक ब्याज रहित वित्तीय सहायता का उपयोग प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास के लिए किया जा रहा है और
ड- यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?

इस प्रश्न् के उत्तर मे माननीय पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सदन मे बताया कि-:

क से डः पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2014-15 में देश में विषयगत परिपथ विकसित करने के विचार के साथ स्वदेश दर्शन नामक अपनी योजना शुरू की और देश में पर्यटन अवसंरचना का विकास करने के लिए 5290.33 करोड़ रूपये की 76 पर्यटन संबंधी परियोजनाओं को मंजूरी दी और इनमें से 75 परियोजनाओं के भौतिक रूप से पूरा होने की सूचना है। इस योजना को स्थायी और उत्तरदायी पर्यटन स्थलों का विकास करने के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0) के नाम से बाद में नया रूप दिया गया। और मंत्रीयल ने 53 परियोजनाओं के लिए 2208.31 करोड़ रूपये की मंजूरी दी, जो संबंधित राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों की ओर से कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। मंत्रालय ने स्वदेश के दर्शन के तहत चुनौती आधारित गंतव्य विकास-सीबीडीडी नामक अपनी पहल के तहत राज्य सरकारों/संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए और 4 श्रेणियों अर्थात संस्कृति और विरासत आध्यात्मिक पर्यटन, जीवंत ग्राम और पारिस्थितिकी-पर्यटन एवं अमृत धरोहर स्थल के तहत 697.94 करोड़ रूपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सीबीडीडी पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यटक के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए गंतव्यों का समग्र विकास करना और पर्यटन स्थलों को स्थायी और उत्तरदायी स्थलों के रूप में परिवर्तित करना है।
देश में प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों का विकास करने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय ने पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई) नामक योजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के टेम्पलेट के साथ परिचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी किए। तद्नुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस योजना के तहत 3295.76 करोड़ रूपये की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।