भाजपा सरकार का विशेष सत्र राजनीतिक नौटंकीः कांग्रेस ,जानिए सभी समाचार

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भाजपा सरकार का विशेष सत्र राजनीतिक नौटंकीः कांग्रेस
देहरादून। कांग्रेस ने धामी सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र को जनता के पैसों की बर्बादी बताया है। आयोजित  विशेष सत्र को कांग्रेस ने भाजपा सरकार की राजनीतिक नौटंकी करार दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा ने विधानसभा के विशेष सत्र को औचित्यहीन बताते हुए  कहा कि यह सत्र केवल केंद्र के आकाओं को खुश करने के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि पीएम मोदी ने जिस तरह सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करके केंद्र में संसद के पटल को राजनीति के लिए उपयोग किया, उसी प्रकार धामी सरकार भी इसी राह पर है।
आलोक शर्मा ने सवाल उठाया एक दिन के चुनावी भाषण के लिए लगभग 10 से 12 करोड़ रुपए खर्च होंगे, आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। उनका कहना है कि जब तक 73वें और 74वें संशोधन जैसे मुद्दे संसद और विधानसभा में क्लियर नहीं होंगे, उनका मानना है कि तब तक किसी के लिए और कहीं ना कहीं अड़चने आती रहेंगी। आलोक शर्मा ने कहा भाजपा सत्ता में है, अगर वह पहल करती है तो हम उससे चार कदम आगे चलेंगे।
आलोक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा सीटें देने की पक्षधर रही है। उन्होंने कटाक्ष किया कि धामी सरकार को भारत रत्न राजीव गांधी के निर्देश पर बनाई गई रामायण जरूर देखनी चाहिए, ताकि रामायण को पूरा देश देख सके। रामायण में रथ पर रावण चला करता था, उसी तर्ज पर भाजपा ने देश भर में भी एक रथ यात्रा निकाली थी, इसलिए वह लोग रथ पर चलने वाले हैं जबकि हम जमीन पर चलने वाले संघर्षरत लोग हैं।
कांग्रेस का कहना है जिस दिन धामी सरकार अंकिता भंडारी को संपूर्ण न्याय दिला देगी, उसी दिन महिला सशक्तिकरण की बात करना। उससे पहले सरकार को महिला सशक्तिकरण की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।

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वेतन पुनर्निधारण शासनादेश निरस्त, हाईकोर्ट में नर्सों की हुई जीत
नैनीताल। मंगलवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवानिवृत्त स्टाफ नर्सों के वेतन का सरकार के द्वारा पुनर्निर्धारण कर उनको पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी करने के शासनादेश को चुनौती देती याचिकाओं पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने वेतन के पुनर्निर्धारण के शासनादेश को नियम विरुद्ध पाते हुए उसे निरस्त कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवानिवृत्त स्टाफ नर्सों को पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी छह माह के भीतर उन्हें वापस देने को कहा है। साथ में कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा है कि अगर वेतन पुनर्निर्धारण से सम्बंधित कुछ बचा है, तो उसे तीन माह के भीतर निस्तारित करें।
मामले के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवानिवृत्त स्टाफ नर्स सुनीता सिंह और अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उन्होंने कहा है कि उनकी नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स के तौर पर हुई थी। नियुक्ति के समय उनका वेतन पांच हजार से आठ हजार के बीच में निर्धारित था।
वर्ष 2011 में राज्य सरकार द्वारा एक शासनादेश जारी कर उन्हें उच्चीकृत वेतन दिया गया। उसके बाद सरकार द्वारा एक और जीओ निकालकर उनके वेतन का पुनर्निर्धारण कर दिया गया। अब सरकार इस जिओ के अनुसार उनसे पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी कर रही है। इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि पूर्व में निर्धारित वेतनमान सही था, उसी के अनुरूप वेतन दिया जाए, न कि पुनर्निर्धारण वाले जीओ के अनुसार।
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हनुमान चट्टी पर दिनदहाड़ हाथी दिखने से श्रद्धालुओं में दहशत


चंपावत। हाथी की धमक पूर्णागिरि मार्ग पर हनुमान चट्टी तक पहुंच गई, जिससे श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। वन विभाग ने हाथी को जंगल में खदेड़ा और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ाई है। जिसके बाद वन दारोगा भरत बिष्ट के नेतृत्व में पहुंची टीम ने हाथी को ठुलीगाड़ की तरफ जंगल में खदेड़ा।
हाथी के जंगल की ओर भागने के बाद श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने हाथी का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया में वायरल कर दिया। उचौलीगोठ के ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार की रात हाथी उचौलीगोठ में लगी पानी के टंकी के पास पहुंचा और पानी पीने के बाद जंगल की ओर चला गया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी लगातार पूर्णागिरि मार्ग पर विचरण कर रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
लोगों ने वन विभाग से श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों की सुरक्षा को देखते हुए रात में भी गस्त करने की मांग की है।
रेंजर, बूम रेंज गुलजार हुसैन ने बताया कि  मंगलवार की सुबह 10 बजे करीब हाथी के हनुमान चट्टी के पास आने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा। हाथी से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए गस्त बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं को भी जागरूक किया जा रहा है।
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चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड की आर्थिकी का आधारःधामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान चारधाम यात्रा और प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों पर सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड की आर्थिकी का महत्वपूर्ण आधार है और इसे किसी भी प्रकार की नकारात्मकता का शिकार नहीं होने देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग यात्रा को राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “सरकार का विरोध हो सकता है, बीकेटीसी का विरोध हो सकता है, लेकिन पवित्र चारधाम यात्रा का विरोध न करें। श्री केदारनाथ धाम महादेव का पवित्र स्थल है, और हमारी सरकार यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। चारधाम यात्रा हमारी सामूहिक आस्था की कठिन यात्रा है।”
धामी ने विधानसभा में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर पूछे गए सवाल का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है और इस संदर्भ में उन्होंने एक दिन पहले केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से भी मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व में भारत ने इस वैश्विक संकट के बीच भी उत्सव मनाए हैं।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना महामारी के समय भी विश्व ने भारत की क्षमता पर संदेह किया था। लेकिन भारत ने न केवल महामारी पर नियंत्रण पाया, बल्कि 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजकर वैश्विक संकट में भी योगदान दिया।
मुख्यमंत्री के इस संबोधन ने चारधाम यात्रा, प्रदेश की आर्थिकी और नागरिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार हर स्थिति में यात्रियों और जनता की भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।
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नीयत साफ करे भाजपा, तुरंत लागू करे 33 प्रतिशत आरक्षणः आर्य

देहरादून। उत्तराखंड में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर पूरी तरह विफल करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार को महिला आरक्षण कानून 2023 की मूल भावना के अनुरूप वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में मौजूदा सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल लागू करना चाहिए।
यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर इस ऐतिहासिक कानून को लागू करने में देरी कर रही है, जिससे उसकी नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इसके लिए केंद्र को दोबारा संविधान संशोधन लाना पड़े तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए, लेकिन सरकार इस दिशा में गंभीर नजर नहीं आ रही है। विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस विधायकों द्वारा किए गए जोरदार धरनाकृप्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण, सुरक्षा और सम्मान को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रस्तुत संकल्प को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार न करना लोकतांत्रिक मूल्यों और महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है और यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बावजूद उसकी अधिसूचना में देरी सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जवाब मांगते हुए पूछा कि आखिर किन कारणों से इस कानून को लागू करने में इतना विलंब किया गया।
केंद्र सरकार के हालिया विधेयकों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि यदि लोकसभा सीटों में प्रस्तावित वृद्धि लागू होती है तो उत्तराखंड की हिस्सेदारी घट सकती है, जो राज्य के हितों के खिलाफ होगा। उन्होंने भाजपा सांसदों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह प्रदेश के अधिकारों की अनदेखी है। महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। अंकिता भंडारी प्रकरण सहित कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने में लगी है और अब तक प्रमुख आरोपियों का खुलासा न होना गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही उन्होंने जंगली जानवरों के हमलों में महिलाओं की बढ़ती मौतों पर भी सरकार की निष्क्रियता को कठघरे में खड़ा किया। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार महिला आरक्षण लागू करने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द ठोस कदम नहीं उठाती है तो कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।
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महिला सशक्तिकरण के प्रयासों पर न हो किसी भी प्रकार की राजनीति: धामी

मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को किया संबोधित
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र दृ ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन बिल को यथाशीघ्र लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए सर्वसम्मत संकल्प व्यक्त करने का प्रस्ताव रखा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही उत्तराखंड में नारी शक्ति का प्रतीक गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन, कमला पंत जैसी महिलाओं को नमन करने के साथ किया।

मुख्यमंत्री ने सदन से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उपायों का समर्थन करने में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को देवी मानकर उसकी आराधना की जाती है। माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और माँ सरस्वती के रूप में हम नारी के साहस, समृद्धि और ज्ञान के स्वरूप का वंदन करते हैं। उन्होने कहा कि भारत के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले से लेकर अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला तक नारी शक्ति के असंख्य प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिलते हैं। नारी शक्ति अब केवल ’’सहभागिता’’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ’’नेतृत्व’’ की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता हो, क्रिकेट का विश्व कप जीतना हो, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से पास-आउट होना हो, या फिर सेना और वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर काम करना हो, ये सब नारी शक्ति के उदाहरण हैं। इसी तरह उत्तराखंड भी अदम्य साहस की प्रतीक तीलू रौतेली, उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई कही जाने वाली रानी जिया रानी और चिपको आंदोलन की अग्रदूत गौरा देवी नारी शक्ति का उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य को समझते हुए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ये इन सदनों में केवल मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। प्रधानमंत्री ने इस विराट संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए समस्त देशवासियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों से भी सहयोग और समर्थन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में अगले लोकसभा चुनावों तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकसभा में संख्या बल के कारण जब बिल पारित नहीं हो पाया तो, विपक्षी दल के नेता तालियाँ बजा रहे थे। उस दृश्य को देखकर महाभारत की वो सभा याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।
उन्होंने कहा कि विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, इसीलिए सीटें बढ़ाने का प्राविधान बिल में रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार देने के बारे में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पर जब पहली बार किसी ने सच्चे मन से महिलाओं के हित में कार्य करने का प्रयास किया तो उसे भी नहीं करने दिया। जबकि आदरणीय प्रधानमंत्री लोकसभा में ये स्पष्ट कह चुके थे की यदि ये बिल पास हो जाएगा तो इसका पूरा श्रेय वो विपक्ष को देने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब देश की मातृशक्ति पूरी तरह से समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में शपथ लेने के साथ ही नारी सशक्तिकरण को शासन की प्राथमिकता में रखकर कार्य करना प्रारम्भ कर दिया था। यही कारण है कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2026-27 के बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2015 में शुरू हुए “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान से पिछले 11 वर्षों में लिंगानुपात और बालिका शिक्षा में उल्लेखनीय परिवर्तन आए हैं। पिछले 11 वर्षों में महिला-पुरुष लिंगानुपात में 12 अंकों की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों का कुल नामांकन अनुपात 3 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। इतना ही नहीं, बीते 11 वर्षों में संस्थागत प्रसव 61 प्रतिशत से बढ़कर 97 प्रतिशत हो गया है। आज “सुकन्या समृद्धि योजना” के अंतर्गत बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 8.2 प्रतिशत की उच्च ब्याज दर के साथ टैक्स-फ्री बचत की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं और 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो चुकी है
वहीं “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, “स्वच्छ भारत मिशन” के द्वारा घर-घर शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं को गरिमा और सुरक्षा प्रदान की गई है। जिससे खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिली और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सम्मान दोनों की रक्षा हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से कानूनी संरक्षण प्रदान करने का काम किया है। जबकि पूर्व में सरकारों ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट तक बदलने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज देश के सामान्य घरों की बेटियां रसोई से रायसीना हिल तक का सफर तय कर रही है। राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू से लेकर ‘’ऑपरेशन सिंदूर’’ में अग्रणी भूमिका निभाने वाली विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी इसका उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में भी महिला आरक्षण पर वही झूठ और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन के बाद उत्तराखंड विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 105 हो सकती थी, जिसमें से 35 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती थी। इसी तरह सांसदों कि संख्या भी 5 से बढ़कर 7 या 8 हो जाती, इससे हर किसी का फायदा ही था, फिर भी विपक्ष ने बिल पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य घरों से महिलाएं राजनीति में आ जाएंगी तो कुछ दलों की वंशवादी राजनीति की दुकानें बंद हो जाएंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी के पहले मंत्रीमंडल और राजीव गांधी की कैबिनेट में केवल एक- एक महिला मंत्री थीं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा मंत्रिमंडल में 7 महिला मंत्री हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तिकरण के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। इस वर्ष जेंडर बजट के अंतर्गत लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश सरकार द्वारा ’’उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन’’ के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही, ’’सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ’‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से हमने राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम किया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण और ‘’एकल महिला स्वरोजगार योजना’’ के माध्यम से महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान कर रही है। साथ ही साथ ’’मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में इतिहास रचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, वहीं, सहकारी समितियों में भी आज महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है। खेल के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा लोहाघाट में लगभग 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में सर्वप्रथम “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। यूसीसी से उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। अब यूसीसी की मांग पूरे देश में उठ रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने धारा 370 हटाने, अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर निर्माण और दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारने का काम किया है। उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य भी अवश्य करेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत हितों से ऊपर उठकर सकारात्मक और स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि देश की आधी आबादी को उनका उचित अधिकार मिल सके।

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की  ढलान पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन ने तैयार किया सुरक्षा खाका

देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक के ढलान वाले हिस्से पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक का ढलान वाले हिस्से में एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद सें भारी वाहनों के नियंत्रण खोने और दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं।
करीब 3.5 किलोमीटर लंबी ढलान तेज रफ्तार के कारण सबसे संवेदनशील है। लगातार दुर्घटना के बाद अब प्रशासन ने यहां रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया है।
उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी के नेतृत्व में परिवहन विभाग, पुलिस, एनएचएआइ, लोक निर्माण विभाग और सड़क सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त निरीक्षण कर पाया कि ढलान के कारण वाहन तेजी से गति पकड़ रहे हैं और नीचे आते-आते चालक नियंत्रण खो रहे हैं।
खासकर भारी वाहन सबसे अधिक जोखिम पैदा कर रहे हैं। इसी कारण पूरे खंड में हर 25 मीटर पर ट्रैफिक काल्मिंग उपाय बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
अब मौजूदा ट्रांसवर्स बार मार्किंग को और चौड़ा किया जाएगा। उनके बीच अतिरिक्त कैट-आई लगाए जाएंगे और कम से कम 14 नये ट्रांसवर्स बार विकसित किए जाएंगे, ताकि वाहन स्वतः गति कम करें। पुलिस बैरियर से संयुक्त चेकपोस्ट तक दोनों ओर स्पीड लिमिट बोर्ड भी लगाए जाएंगे।चेकपोस्ट के सामने मौजूद मीडियन कट बंद कर उसे डाटकाली मंदिर की ओर अंडरपास अथवा अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की योजना है। साथ ही वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग गेट बनाए जाएंगे, ताकि क्रास मूवमेंट कम हो। निरीक्षण में आरटीओ प्रवर्तन डा. अनीता चमोला, सहायक निदेशक लोनिवि संजय सिंह बिष्ट, सहायक निदेशक परिवहन विभाग नरेश संगल, सहायक निदेशक पुलिस विभाग अविनाश चौधरी, एनएचएआइ के प्रोजेक्ट मैनेजर रोहित पंवार आदि शामिल रहे।

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विधानसभा कूच पर निकली महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैरिकेडिंग पर रोका,कई कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस हिरासत में

देहरादून। मंगलवार को उत्तराखण्ड में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस दौरान उत्तराखण्ड महिला कांग्रेस ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण अविलंब लागू किए जाने की मांग को लेकर विधानसभा कूच किया। जहां पहले से ही मौजूद भारी पुलिस बल ने विशेष सत्र को देखते हुए रिस्पना पुल के निकट लगाए गए बैरिकेडिंग पर प्रदर्शनकारी महिलाओं को रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी महिलाओं ने जमकर हंगामा काटा। बढ़ता हंगामा देख पुलिस ने महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हिरासत में ले लिया और पुलिस लाइन भेज दिया।
अपने पूर्व घांेषित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11 बजे के आसपास कांग्रेस की महिलाएं हरिद्वार रोड स्थित एक होटल परिसर में एकत्रित हुईं। दोपहर को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में पैदल मार्च निकालते हुए विधानसभा कूच किया। जहां पहले से ही मौजूद भारी पुलिस बल ने विशेष सत्र को देखते हुए रिस्पना पुल के निकट लगाए गए बैरिकेडिंग पर प्रदर्शनकारी महिलाओं को रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। इसी नोंक झोंक में महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष अंशुल त्यागी बेहोश हो गई। जिन्हें पुलिस ने एंबुलेंस मंगवा कर अस्पताल भेजा गया। बैरिकेडिंग पर इस दौरान काफी देर तक हंगामा होता रहा। हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया।
इस प्रदर्शन में शामिल हरक सिंह रावत ने कहा उत्तराखंड में महिलाओं के संबंधित उत्पीड़न की घटनाएं घटित हुई हैं, उस पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा  कि जब मुख्यमंत्री महिलाओं के पक्ष में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे होते हैं तब उनके पीछे उस वीआईपी की तस्वीर लगी होती है। हरक सिंह रावत ने भाजपा सरकार को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि जब 2023 में सर्वसम्मति से महिला आरक्षण बिल पारित हो गया है , तब केंद्र सरकार 2027 में परिसीमन और जनगणना के नाम पर दोबारा संसद में प्रस्ताव ले आई। जिससे महिलाओं का आरक्षण 2027 में लागू नहीं हो पाए।
हरक सिंह रावत ने भाजपा पर देश की महिलाओं को आरक्षण के नाम पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। हरक ने कहा लोकसभा और विधानसभाओं में कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन राज्य की धामी सरकार विशेष सत्र बुलाकर नौटंकी कर रही है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर संघीय ढांचे को तहस नहस का काम किया है।
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शातिर महिला चोर गिरफ्तार,दो मंगलसूत्र बरामद

नैनीताल।ं रिक्शे में सवार महिलाओं के गले से मंगलसूत्र चोरी करने की आरोपी शातिर महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसके कब्जे से चुराये गये दो मंगलसूत्र बरामद हुएए है। बताया जा रहा है कि  आरोपी का पति भी शातिर किस्म का अपराधी है। जिसकी तलाश जारी हैै।
मिली जानकारी के अनुसार बीती 26 मार्च को दीपा खडायत पत्नी दिवान सिंह खनायत निवासी आरके टेंट हाउस रोड आशियाना ग्रुप कुसुमखेडा हल्द्वानी जिला नैनीताल द्वारा कोतवाली हल्द्वानी में तहरीर देकर बताया गया था कि 9 मार्च को जब वह कालाढूंगी टैम्पो स्टेंण्ड से अपने घर आर.के .टेण्ट रोड के लिए एक आटो में बैठी। उस वक्त तक मेरे गले में मंगलसूत्र था। जब मैं घर पहुंची तो मेरा मंगलसूत्र गले से गायब था। जिस आटो रिक्शा में मैं बैठी थी उस रिक्शे में ही एक महिला जो कि सावले रंग की थी तथा उसके साथ एक छोटा बच्चा भी था आटो में सवारी ज्यादा बिठाने की वजह से वह औरत बारकृबार मुझे खिसकने को कहती रही तथा मुझसे सटकर बैठ गयी। मुझे शक है कि उसी औरत द्वारा मेरा मंगलसूत्र गले से काट दिया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी महिला की तलाश शुरू कर दी गयी। मामले में कड़ी जांच के बाद पुलिस को उसकी पहचान मुस्कान पत्नी अमित निवासी ब्रजधाम कॉलोनी थाना हाईवे मथुरा जिला मथुरा के रूप में हुई। जिसे पुलिस ने रोडवेज के स्टेशन हल्द्वानी के पास से गिरफ्तार किया गया। आरोपी महिला द्वारा पूछताछ के दौरान बताया कि उसके द्वारा मुखानी क्षेत्र में मंगलसूत्र चोरी करने की घटना को पूर्व में भी अंजाम दिया गया है जिसके आधार पर थाना मुखानी से सम्पर्क करने पर बताया कि उक्त अज्ञात के विरूद्ध थाना मुखानी में एफआईआर दर्ज है व बताया की आरोपी  के पति के द्वारा चोरी की घटनाओं में सहयोग किया जाता है। बहरहाल पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
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कैंपटी फॉल क्षेत्र में टिहरी विकास प्राधिकरण ने दो अवैध निर्माण किये सील

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मसूरी। टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण ने कैंपटी क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो भवनों को सील कर दिया है। प्राधिकरण की इस कार्रवाई से क्षेत्र में आक्रोश की स्थिति बन गई। स्थानीय लोग प्राधिकरण की इस कार्यवाही को पक्षपातपूर्ण और भ्रष्टाचार से प्रेरित बता रहे हैं।
प्राधिकरण कार्यालय, धनोल्टी से जारी आदेश के अनुसार, मसूरी-कैंपटी फॉल मार्ग पर एक व्यक्ति पर बिना अनुमति भवन निर्माण करने का आरोप था। उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 (संशोधित 2013) की धारा 27(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और धारा 28(1) के अंतर्गत निर्माण कार्य रोकने के आदेश भी दिए गए थे।
सुनवाई के बाद निर्माण को अवैध पाए जाने पर धारा 28ए के तहत भवन को सील करने का आदेश पारित किया गया। पूर्व में भी सीलिंग की कार्रवाई तय की गई थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल और भीड़ के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। अब पुनः कार्रवाई करते हुए संबंधित भवन को सील कर दिया गया है।
इस कार्यवाही के बाद आसपास के क्षेत्रों में लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।  स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग चुनिंदा लोगों को निशाना बनाकर उत्पीड़न कर रहा है। जबकि क्षेत्र में कई अन्य अवैध निर्माण बिना किसी रोक-टोक के खड़े हैं। इस संबध में एसडीएम धनोल्टी नीलू चावला ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विभाग द्वारा सभी कार्रवाई सरकार की गाइडलाइन और नियमों के तहत की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन भवनों को सील किया गया है, उनकी विधिवत सुनवाई की गई थी और अवैध पाए जाने के बाद ही कार्रवाई की गई। एसडीएम ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष द्वारा अवैध निर्माण को स्वयं नहीं हटाया गया, तो भविष्य में ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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राहतःपिंजरे में कैद हुआ गुलदार, आदमखोर है या नही इसकी जांच करेगा वन विभाग
नैनीताल। जिले के भीमताल और जौलीकोट क्षेत्र में गुलदार की दहशत के बीच मंगलवार सुबह वन विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक गुलदार भीमताल ब्लॉक के मोरा गांव में कैद हुआ है। यह गुलदार आदमखोर है या नही वन विभाग इसकी जांच करेगा।
भीमताल क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने गुलदार को वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया है। गुलदार के पकड़े जाने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि वन विभाग अभी यह पुष्टि करने में जुटा है कि पकड़ा गया गुलदार ही आदमखोर है या नहीं। जानकारी के अनुसार, मोरा गांव के पास लगाए गए पिंजरे में देर रात गुलदार फंस गया। पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार गुलदार की गतिविधियां बढ़ने के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। खासकर पास के भदयूनी गांव में छह दिन पहले युवक कमल सिंह बिष्ट को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया था। जिसके बाद वन विभाग पर गुलदार को पकड़ने का दबाव बढ़ गया था। बताया जा रहा है कि इससे पहले मोरा गांव से सटे सूर्याजाला और ज्योली क्षेत्र में भी दो महिलाओं को गुलदार ने अपना शिकार बनाया था। लगातार हो रही इन घटनाओं के चलते वन विभाग ने मोरा, भदयूनी समेत आसपास के कई गांवों में पिंजरे लगाए थे और गश्त भी बढ़ा दी थी। वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) नितिन पंत ने बताया कि पिंजरे में कैद हुए गुलदार की जांच की जा रही है। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यही गुलदार आदमखोर है। विशेषज्ञ टीम द्वारा उसके व्यवहार और अन्य पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

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ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर गहरी खाई में गिरी कार, एक घायल; एक लापता

नई टिहरी। ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर मंगलवार सुबह थाना देवप्रयाग क्षेत्रांतर्गत तोताघाटी के पास एक वाहन गिरने की सूचना मिली है। मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ व्यासी के जवानों ने 400 मीटर गहरी खाई में गिरे वाहन तक पहुंच बनाई।
थाना कोतवाल प्रशांत बहुगुणा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि तोताघाटी के सामने कार गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस बल रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच गया था। गहरी खाई और दुर्गम रास्तों के बीच राहत कार्य चलाते हुए टीम ने एक घायल व्यक्ति को सुरक्षित बचा लिया है, जिसे राफ्ट के जरिए नदी के रास्ते से निकालने की प्रक्रिया चल रही है।वहीं, कार में सफर कर रही एक महिला का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। पुलिस के अनुसार कार के जिस तरह से परखच्चे उड़े हैं, उससे अंदेशा जताया जा रहा है कि महिला गहरी खाई में कहीं दूर छिटक गई है। फिलहाल राहत एवं बचाव दल द्वारा लापता महिला की सघन खोजबीन की जा रही है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

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कांग्रेस विधायक ने विधानसभा के बाहर गन्ने से भरी ट्रॉली पलटाकर  किया विरोध- प्रदर्शन

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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र मंगलवार को बुलाया गया है। सत्र शुरू होने से पहले ही बवाल शुरू हो गया। राज्य की विधानसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है, जहां कांग्रेस पार्टी के विधायक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंच गए और उसमें लदे हुए गन्ने को गेट के बाहर पलट दिया। इस घटना से अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। विधायक की इस हरकत से हड़कंप मच गया। सुरक्षा में तैनात पुलिस वाले भी हैरान रह गए। कांग्रेस विधायक वीरेन्द्र जाती ने गन्ने से भरी ट्रॉली पलटकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों के बकाये भुगतान का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस विधायक ने विरोध जताते हुए इकबालपुर चीनी मिल का 110 करोड़ बकाया भुगतान की मांग की।  मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत स्थिति को संभाला।
बता दें कि यह विशेष सत्र महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई है।

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पुलिस लाइन में तैनात एएसआई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

उधम सिंह नगर। जिले की पुलिस लाइन में तैनात एएसआई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक एएसआई के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
जानकारी के अनुसार रविवार को उनकी नाइट ड्यूटी निर्धारित थी। ड्यूटी से पहले वे सुबह उठे, भोजन किया और आराम करने के लिए सो गए। दोपहर में भी वे उठे, खाना खाया और फिर से सो गए। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन रात करीब 10 बजे, जब उनकी ड्यूटी का समय नजदीक आया और वे नहीं जागे, तो उनकी पत्नी ने उन्हें उठाने की कोशिश की। काफी प्रयासों के बावजूद जब संजय खाती नहीं उठे, तो परिजनों को चिंता हुई। तुरंत 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
रूद्रपुर कोतवाली के एसएसआई अनिल जोशी ने बताया कि सूचना मिलने के तुरंत बाद आवश्यक कार्रवाई की गई। शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके.
मंगलवार सुबह एसआई धीरज टम्टा द्वारा पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल पाएगी। अचानक हुई इस मौत से पुलिस विभाग में गहरा शोक व्याप्त है।
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धामी सरकार ने किया हीट वेव से निपटने के लिए विस्तृत प्लान तैयार
देहरादून। राज्य में चढ़ते पारे के बीच धामी सरकार ने हीट वेव से निपटने के लिए विस्तृत प्लान तैयार किया है।  लू के जानलेवा प्रकोप को रोकने के लिए शासन ने शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक के लिए एडवाजरी लागू कर दी है। मुख्य सचिव कार्यालय से जारी हुए एक आदेश के जरिए सभी विभागों को युद्धस्तर पर हीट वेव से लड़ने के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए गये हैं। राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और वन विभाग तक को एक्शन मोड में रहने को कहा गया है।
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनता से विषेश अपील की है। उन्होंने बताया मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों के विस्तृत चर्चा कर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सचिव ने कहा कि हीट वेव को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क हैं। हमने स्कूलों के समय को बदलने के अलाना स्कूलों में बच्चों के लिए वॉटर बेल शुरू करने और मजदूरों के काम के घंटों में बदलाव जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं। अस्पतालों में विशेष वार्डों की व्यवस्था की गई है। उन्होने प्रदेशवासियों से अपील है कि वे सरकारी एडवाइजरी का पालन करें और गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए सतर्क रहें। सरकार ने नौनिहालों और बीमारों के लिए सबसे कड़े नियम बनाए हैं। शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि तापमान सीमा से बाहर जाता है, तो स्कूलों के पठन-पाठन के समय में तुरंत बदलाव किया जाए. स्कूलों में अब श्वॉटर बेल की व्यवस्था होगी. जिसके बजने पर सभी विद्यार्थियों को पानी पीना अनिवार्य होगा। जिससे वे डिहाइड्रेशन का शिकार न हों। कक्षाओं में वेंटिलेशन और हवा की सुविधा सुनिश्चित करने के साथ-साथ हर स्कूल में ओआरएस  और प्राथमिक उपचार की किट रखना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, चिकित्सा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीजों के लिए डेडिकेटेड वार्ड  आरक्षित किए जाएं. पीएचसी, सीएचसी और जिला अस्पतालों के साथ-साथ एम्बुलेंस में भी ओआरएस पैकेट और आइस पैक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। पैरामेडिकल स्टाफ और आशा वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. जिससे वे गांवों और कस्बों में हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान कर तुरंत इलाज शुरू कर सकें।
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आरटीआई में बीकेटीसी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा, दर्जाधारी राज्यमंत्री ने पत्नी को नियुक्त किया अपना चपरासी !

देहरादून। प्रसिद्ध बदरीनाथ व केदारनाथ धामों का प्रबंधन देखने वाली श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) यात्रा व्यवस्था कायम करने में विफल साबित हो रही है। मगर उसके पदाधिकारी श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन को ठिकाने लगाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बीकेटीसी में उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त दर्जा राज्यमंत्री विजय कप्रवाण अपनी पत्नी को अपने साथ अनुचर (चतुर्थ श्रेणी कार्मिक) दिखा कर बारह हजार रूपये प्रतिमाह भुगतान ले रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने उक्त आरोप लगाते हुए बताया कि उनके द्वारा बीकेटीसी से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों- करोड़ों सनातनियों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र बदरीनाथ व केदारनाथ धामों को बीकेटीसी के पदाधिकारियों ने भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न निगम व बोर्डों में तैनात दायित्वधारियों को सरकारी कार्मिक उपलब्ध नहीं होने की दशा में निजी स्तर पर एक वैयक्तिक सहायक व एक चतुर्थ श्रेणी कार्मिक नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। वैयक्तिक सहायक को पंद्रह हजार और चतुर्थ श्रेणी कार्मिक को बारह हजार रूपये प्रतिमाह का प्रावधान किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि बीकेटीसी में जरुरत से ज्यादा अस्थायी कार्मिक नियुक्त हैं।  मगर उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने बीकेटीसी के कार्मिकों को संबद्ध करने बजाय अपने पड़ोस के एक युवक को वैयक्तिक सहायक के रूप में दर्शाया है। हैरानी की बात यह है कि बीकेटीसी जैसी प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था के उपाध्यक्ष ने सारी नैतिकता ताक पर रख कर अपनी पत्नी को ही अपने साथ चतुर्थ श्रेणी कार्मिक दर्शा कर बारह हजार रूपये प्रतिमाह का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासन ने सरकारी कार्यालय व आवास उपलब्ध नहीं होने की दशा में दायित्वधारियों के लिए पच्चीस हजार रूपये प्रतिमाह का प्रावधान किया है। बीकेटीसी का मुख्यालय जोशीमठ और कैंप कार्यालय राजधानी देहरादून में स्थित है। देहरादून कार्यालय में  उपाध्यक्ष को भी कक्ष आवंटित है। मगर इसके बावजूद कप्रवाण अपना आवास व कार्यालय रुद्रप्रयाग में दर्शा कर भत्ते के रूप में प्रतिमाह पच्चीस हजार रूपये ले रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्त्ता व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने कहा कि कार्यालय और आवास की व्यवस्था मुख्यालय अथवा कैम्प कार्यालय वाले स्थान में ही हो सकती है। मगर कप्रवाण ने अपने गृह नगर रुद्रप्रयाग में आवास और कार्यालय दर्शाया हुआ है। कार्यालय में फर्नीचर इत्यादि भी बीकेटीसी के पैंसे से खरीदा गया। उन्होंने आश्चर्य जताया कि बीकेटीसी द्वारा मंदिर समिति एक्ट और शासनादेशों का उल्लंघन कर कप्रवाण को लगातार भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि प्रकरण उनके संज्ञान में आ चुका है और इसकी जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, आरोपों से घिरे उपाध्यक्ष विजय कपरवाण ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी पत्नी समिति की कर्मचारी नहीं हैं और न ही उन्हें किसी प्रकार का वेतन दिया गया है। उनके अनुसार, उनके निजी स्टाफ में कार्यरत दो महिला कर्मचारियों का भुगतान तकनीकी कारणों से एक ही नाम से बिल बनाकर किया गया, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी। उन्होंने पूरे मामले को उनकी छवि खराब करने की साजिश करार दिया।