Good news मुख्यमंत्री धामी से प्रदेश के नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने भेंट की जानिए सभी समाचार

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प्रेस को संवैधानिक अधिकार दीजिए सम्पादक जीत मणि पैन्यूली से पहली रिपोर्ट न्यूज के संपादक रेहमान के साथ दिया साक्षात्कार सुने और लोकतंत्र मज़बूत करने के लिए ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए। कमेंट, सुझाव दीजियेगा।

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सीलिंग भूमि मामले में मोर्चा ने जिलाधिकारी के समक्ष रखा पीडितों का दर्द देहरादून- जन संघर्ष मोर्चा प्रतिनिधिमंडल में मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में जिला अधिकारी श्री आशीष चौहान से मुलाकात कर सीलिंग भूमि (चाय बागान भूमि) की आड़ में हो रहे आमजन के उत्पीड़न के खिलाफ एवं मा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की इस मामले में अनुपालन कराने को लेकर ज्ञापन सौंपा |

जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एवं उपजिलाधिकारी, विकासनगर को कार्यवाही के निर्देश दिये | नेगी ने कहा कि जनपद देहरादून के एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन,बदामावाला, अंबाडी, रायपुर, जीवनगढ़,कंडोली, कांवली, हरबंस वाला, मोहकमपुर खुर्द बंजारा वाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूका वाला, मिट्ठी बहेड़ी लाडपुर, नत्थनपुर आदि क्षेत्रों में चाय बागान/ सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों /काश्तकारों को जिला प्रशासन के माध्यम से जबरन शोषण किया जा रहा है,।

 

जबकि सीलिंग भूमि मामले में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 2697/ 1984 दिनांक 24/10/96 के द्वारा अपने आदेश में स्पष्ट किया गया था कि 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि के खरीदारों को यूपी सीलिंग एक्ट की धारा 6 उपधारा 3 के तहत सीलिंग एक्ट से मुक्त रखा गया है, लेकिन कुछ समय पूर्व जिला प्रशासन द्वारा एक जनहित याचिका का संज्ञान लेकर उ. प्र. ग्रामीण सीलिंग आरोपण अधि. 6(1)घ व 6(2) के तहत दिनांक 12/7/ 2023 व 16/5/23 के माध्यम से तहसीलों को उक्त भूमि के क्रय- विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, जबकि जनहित याचिका मा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में ही आयोजित की गई थी | उक्त आदेश के चलते तहसील प्रशासन द्वारा उन लोगों को भी परेशान किया जा रहा है, जिन्होंने 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व जमीन खरीदी थी | इस आदेश की आड़ में भूमि की खरीद-फरोख्त व दाखिल खारिज पर भी रोक लगा दी गई है | इस आदेश के जरिए उन लोगों की भी नींद हराम कर दी गई है,जो इस परिधि में नहीं आ रहे हैं| उक्त फरमान स्पष्ट तौर पर मा. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है | होना तो ये चाहिए था कि सीलिंग प्राधिकारी /जिला प्रशासन को भूमि की वास्तविक विधिक स्थिति, खरीद का वर्ष, स्वामित्व तथा अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन जल्दबाजी में जिला प्रशासन द्वारा कदम उठाया गया, जोकि किसी भी सूरत में विधिक नहीं ठहराया जा सकता | काबिल-ए-गौर है कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा मुख्य भूस्वामी, जो पूर्व में सीलिंग की जद में आ रहे थे, अगर उन भू स्वामियों द्वारा 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व जमीन बेची गई एवं उस खरीदार द्वारा 1975 के बाद वह जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी गई तो वह व्यक्ति भी सीलिंग एक्ट की आड़ में नहीं आ सकता यानी धारा 6 उपधारा 3 इसके आडे नहीं आएगी, लेकिन बगैर बैनामा/ रजिस्ट्री देखे व उनकी पड़ताल करे, आमजन को परेशान करना बहुत ही कष्टकारी है | मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई भूमि सीलिंग की जद में आ रही है तो उस पर जिला प्रशासन को विधिक कार्यवाही करनी चाहिए, बिना जांचे- परखे इस आदेश की आड़ में अधिवक्ताओं का भी शोषण हो रहा है तथा सरकार को भारी राजस्व की हानि हो रही है| प्रतिनिधिमंडल में – हाजी असद, प्रवीण शर्मा पिन्नी व अतुल हांडा मौजूद थे |

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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विपणन अवसंरचना एवं कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के अभिसरण से पैक्स हेतु अन्न भंडारण योजना के तहत चयनित समितियों एवं भंडारण निर्माण से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा की गई।

बैठक में सहायक निबंधक (कोऑपरेटिव) पान सिंह राणा द्वारा अवगत कराया गया कि पैक्स हेतु अन्न भंडारण योजना के अंतर्गत जनपद की विभिन्न समितियों का चयन किया गया है, जिनमें मंजगांव, म्याणी, ढालवाला, कमांद एवं कोड़ियाला शामिल हैं।

बैठक में एमपैक्स कोड़ियाला के पोर्ट ट्रेडिंग स्थल परिवर्तन के संबंध में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि पूर्व स्थल पर मुख्य सड़क मार्ग से प्रस्तावित गोदाम तक लगभग 20 मीटर के ट्रैक पर आवागमन के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध नहीं था। इसके दृष्टिगत ग्राम पंचायत नाई में स्थल का चयन किया गया है, जो स्थल चयन समिति के कार्यक्षेत्र के केंद्र बिंदुओं में है तथा मुख्य मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। संबंधित स्थल का निरीक्षण किए जाने की जानकारी दी गई।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि स्थल निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही एसडीएम नरेंद्रनगर को भी स्थल का निरीक्षण कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि जनपद में कुल पांच जन औषधि केंद्र खोले जाने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके लिए मलेथा, चंबा, मुखेम, चामाकेमर एवं ढालवाला में केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें से चार जन औषधि केंद्रों को प्रारंभिक एवं सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। वहीं मलेथा, चंबा एवं ढालवाला के जन औषधि केंद्रों को ड्रग लाइसेंस एवं स्टोर कोड भी प्राप्त हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने शेष प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र मलेथा में 1,44329.00 रुपये की दवाइयाँ खरीदी गईं तथा 1,21702.00 रुपये मूल्य की दवाइयाँ बेची गईं।

मेडिकल क्षेत्र के अंतर्गत सीएससी केंद्रों में व्यवसाय वृद्धि के लिए की जा रही व्यवस्थाओं एवं प्रयासों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं तथा सेवाओं को बेहतर बनाने और अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में सीडीओ वरुणा अग्रवाल, आईएएस प्रशिक्षु ज्योति, एडीएम शैलेंद्र नेगी, डीडीओ मो. असलम, जिला पूर्ति अधिकारी सुनील बडोनी आदि संबंधित उपस्थित रहे।

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‎*कलक्ट्रेट सभागार में एडीएम से मिले 18 प्रशिक्षु शिक्षा अधिकारी*

‎*पीसीएस परीक्षा में चयनित अधिकारियों ने लिया प्रशासनिक कार्यप्रणाली का मार्गदर्शन*

‎*सूचना/टिहरी/08 सितंबर, 2026:*‎कलक्ट्रेट सभागार में पीसीएस परीक्षा से चयनित 18 प्रशिक्षु शिक्षा अधिकारियों ने अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपर जिलाधिकारी से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

‎अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को चयन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में शिक्षा अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अधिकारियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में जनहित सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा अधिकारियों को आमजन की समस्याओं को समझते हुए उनके प्रभावी समाधान के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। इस अवसर पर प्रशिक्षु शिक्षा अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और प्रशासनिक कार्यों से संबंधित विभिन्न जानकारियां प्राप्त कीं।

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*भारतीय स्कीइंग एवं पर्वतारोहण संस्थान, गुलमर्ग द्वारा टिहरी झील में वाटर स्कीइंग कोर्स का आयोजन*

भारतीय स्कीइंग एवं पर्वतारोहण संस्थान (IISM), गुलमर्ग, जम्मू-कश्मीर, जो कि पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार का एक संस्थान है, द्वारा टिहरी झील में वाटर स्कीइंग के कोर्स आयोजित किए जा रहे हैं।

संस्थान द्वारा पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी टिहरी झील में वाटर स्कीइंग के तीन कोर्स – *बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस* – आयोजित किए जा रहे हैं। इन कोर्सों में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागी आते हैं। इस बार कुल 28 प्रतिभागियों ने नामांकन किया था, जिनमें से 24 प्रतिभागियों ने संस्थान में रिपोर्ट किया है।

संस्थान के अनुसार टिहरी झील का पानी वाटर स्पोर्ट्स और वाटर स्कीइंग के लिए बहुत ही उपयुक्त है। पानी साफ है और यह लोकेशन वाटर स्पोर्ट्स के लिए बहुत अच्छी है। इसी को देखते हुए पर्यटन मंत्रालय ने इस वर्ष भी यहाँ तीन वाटर स्कीइंग कोर्स संचालित करने का निर्णय लिया है।

भारतीय स्कीइंग एवं पर्वतारोहण संस्थान, गुलमर्ग के प्रधानाचार्य कर्नल ईश्वर सिंह थापा, सेना मेडल, विशिष्ठ सेवा मेडल ने बताया कि उनका विजन उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसी के तहत संस्थान द्वारा इस वर्ष उत्तराखंड में *तीन वाटर स्कीइंग कोर्स टिहरी झील में और दो रिवर राफ्टिंग कोर्स ऋषिकेश में* संचालित करने की स्वीकृति दी गई है।

इस अवसर पर आईआईएसएम गुलमर्ग के असिस्टेंट डायरेक्टर रेनू बामरारा, कोर्स इंचार्ज प्रवीण सिंह, इंस्ट्रक्टर अरविंद, खलील, शबीर एवं स्टूडेंट्स इश्वीन, अमलेश, कुश, निकिता, अस्मित मित्तल, नेहा जोशी, गौरी, वर्षा अग्रवाल, अनुराग पांडे आदि उपस्थित रहे।

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‎*डिजिटल लैंड रिकॉर्ड कार्य में तेजी लाएं, 30 सितंबर तक पूरा करें सर्वेक्षण: एडीएम*

‎*तहसील प्रतापनगर के अंतर्गत ग्राम पणसूत व मुखमालगांव में डिजिटल लैंड रिकॉर्ड सर्वेक्षण को 30 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश*

‎*/टिहरी/08 सितंबर, 2026;* डिजिटल इण्डिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के अंतर्गत जनपद टिहरी गढ़वाल की तहसील प्रतापनगर के चयनित राजस्व ग्राम पणसूत एवं मुखमालगांव में संचालित सर्वेक्षण/पुनः सर्वेक्षण कार्य की प्रगति की अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने वर्चुअल माध्यम से समीक्षा की। उन्होंने कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए शेष कार्य को 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

‎समीक्षा के दौरान बताया गया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयनित दोनों गांवों में डिजिटल लैंड रिकॉर्ड तैयार किए जाने के लिए सर्वेक्षण/पुनः सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। ग्राम पणसूत में लगभग 90 प्रतिशत तथा मुखमालगांव में लगभग 43 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। अपर जिलाधिकारी ने शेष कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्धारित समयसीमा में सर्वेक्षण कार्य को पूरा किया जाए।

‎उन्होंने उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार प्रतापनगर को निर्देश दिए कि सर्वेक्षण टीम को आवश्यक राजस्व कार्मिकों एवं अन्य सहयोग उपलब्ध कराते हुए कार्य में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों का तत्काल समाधान किया जाए। उन्होंने संबंधित राजस्व उप निरीक्षकों को सर्वेक्षण टीम के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

‎अपर जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था टोपोग्राफिकल जियो सॉल्यूशन के प्रतिनिधियों को भी निर्देशित किया कि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए सर्वेक्षण कार्य में तेजी लाई जाए और प्रतिदिन की प्रगति की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल लैंड रिकॉर्ड तैयार होने से भूमि संबंधी अभिलेखों के आधुनिकीकरण एवं प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

‎वर्चुअल बैठक में उप जिलाधिकारी प्रतापनगर मंजू राजपूत, तहसीलदार प्रतापनगर प्रदीप कंडारी, कार्यदायी संस्था के दिनेश ममगाईं एवं प्रदीप चौहान सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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*एसआईआर-2026: टिहरी में 99.99% सुनवाई पूरी*

‎*/टिहरी/08 सितंबर, 2026;* उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर-2026) के अंतर्गत प्राप्त दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण की सुनवाई के संबंध में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।

‎उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर-2026 के तहत दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथियों में संशोधन किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तिथि 28 सितंबर 2026 तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 03 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।

‎उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित निर्वाचक नामावली के अनुसार जनपद की छह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 994 मतदान केंद्र तथा 4,63,628 मतदाता हैं। अनमैप एवं विसंगति की श्रेणी में चिह्नित निर्वाचकों को नोटिस वितरित कर सुनवाई की जा रही है। जनपद में कुल 1,17,501 नोटिस जारी एवं वितरित किए गए, जिनमें से 1,17,500 नोटिसों की सुनवाई पूर्ण कर ली गई है। इस प्रकार 99.99 प्रतिशत सुनवाई पूर्ण हो चुकी है।

‎उन्होंने बताया कि 15 जुलाई से 07 सितंबर 2026 तक 18-49 आयु वर्ग के लिए प्राप्त प्रपत्र-6 के 3,171 आवेदनों में 1,634 स्वीकार, 62 निरस्त तथा 489 प्रपत्र मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। प्रपत्र-7 के 613 आवेदनों में 168 स्वीकार, 16 निरस्त तथा 360 प्रपत्र शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। इसी प्रकार प्रपत्र-8 के 1,021 आवेदनों में 549 स्वीकार, 15 निरस्त तथा 58 प्रपत्र मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में हैं।

‎बैठक में सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी विजय तिवारी, वरिष्ठ सहायक मनोज भट्ट, जिलाध्यक्ष कांग्रेस मुरारी लाल खंडवाल, भाजपा से राजेंद्र प्रसाद डोभाल एवं जयेन्द्र पंवार, उत्तराखंड क्रांति दल से लोकेंद्र दत्त जोशी सहित संबंधित अधिकारी एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में तंजानिया स्थित अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण करने वाले उत्तराखंड के नन्हे पर्वतारोही मास्टर रियांश पंत और प्रिशा रावत ने भेंट की।

मुख्यमंत्री ने दोनों बच्चों को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में माउंट किलिमंजारो जैसी चुनौतीपूर्ण चोटी का सफल आरोहण करना उनके साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का परिचायक है। दोनों बच्चों ने अपनी इस उपलब्धि से उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता प्रदेश के अन्य बच्चों और युवाओं को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।
9 वर्षीय मास्टर रियांश पंत अल्मोड़ा के चीनाखान और 10 वर्षीय प्रिशा रावत नैनीताल जनपद के बैलपड़ाव की निवासी हैं। दोनों ने 22 अगस्त 2026 को 5,895 मीटर ऊंची माउंट किलिमंजारो चोटी का सफल आरोहण कर तिरंगा फहराया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के बच्चों और युवाओं में प्रतिभा, साहस और सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के युवा पर्वतारोहण, खेल एवं अन्य साहसिक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रहे हैं। राज्य सरकार युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

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LIVE: देहरादून में आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान-2026 एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह’*

मुख्यमंत्री ने ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह’ में शिक्षकों को किया सम्मानित, मेधावी विद्यार्थियों को प्रदान की छात्रवृत्ति*

*शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है : मुख्यमंत्री*

*बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी जरूरी : मुख्यमंत्री*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में कुसुम कांता फाउंडेशन एवं मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को सम्मानित किया तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों एवं छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान गंगा सम्मान समारोह केवल सम्मान और छात्रवृत्ति वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को पहचान देने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का सराहनीय प्रयास है। किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग करना केवल उसकी आर्थिक सहायता करना नहीं, बल्कि उसके सपनों को पूरा करने में सहभागी बनना है।

मुख्यमंत्री ने स्व. श्रीमती कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति उनका समर्पण प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, सामाजिक जागरूकता एवं जनकल्याण के क्षेत्र में मंथन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि विद्यार्थी को दृष्टि, आत्मविश्वास और संस्कार देने के साथ उसकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एक शिक्षक कक्षा में केवल एक विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ऐसे संस्कार और जीवन-मूल्य देने का आह्वान किया, जो उन्हें अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उत्तराखंड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों को सुविधाएं देने के साथ अपना समय, अच्छे संस्कार और अनुशासन देने तथा प्रत्येक परिस्थिति में उनका सकारात्मक मार्गदर्शन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का उज्ज्वल भविष्य केवल अच्छी शिक्षा से नहीं बनता, इसके लिए विद्यालय और परिवार दोनों का साथ चलना आवश्यक है। आने वाली पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली असफलताओं से सीखते हुए लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। कठिन रास्ते ही अक्सर बड़ी मंजिलों तक लेकर जाते हैं। विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, खिलाड़ी, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी अथवा किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, सबसे पहले एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा, मेहनत और अच्छे संस्कारों के बल पर उत्तराखंड और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. श्रीमती कुसुम कांता का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति उनका विशेष अनुराग था। एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को सदैव महत्वपूर्ण स्थान दिया। उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भाव को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा एवं समाज हित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।

डॉ. निशंक ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, श्री आर्यन देव उनियाल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

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सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना*

*सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी*

*मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं*

प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से संभावित जोखिमों को कम करने तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल के सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हो गया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके अंतर्गत झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। मा0 मुख्यमंत्री ने कहा कि संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय रहते चेतावनी पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली तथा अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
माननीय आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने बताया कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है, जबकि शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल को रवाना किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान दोनों ग्लेशियर झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।
सचिव श्री सुमन ने बताया कि सरस्वती ताल लगभग 5700 मीटर तथा केदारताल लगभग 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अत्यधिक ऊंचाई एवं कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित इन झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
वहीं माननीय उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) ने भी विशेषज्ञ दल को शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे।

*विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त भागीदारी*
देहरादून। सर्वेक्षण अभियान में विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों एवं सुरक्षा बलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

विशेषज्ञ दल में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों की स्थिति, संभावित जोखिमों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का बहुआयामी एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। दल में श्री रोहित कुमार (यूएसडीएमए, देहरादून), श्री निखिल पुनिया (यूएसडीएमए, देहरादून), डॉ. विशाल (यूएलएमएमसी, देहरादून), श्री दीपक भट्ट (यूएलएमएमसी, देहरादून), डॉ. शेख नवाज अली (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री शुभजीत घोष (बीएसआईपी, लखनऊ), श्री प्रकाश रंजन जेना (बीएसआईपी, लखनऊ), डॉ. पिंकी बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री स्वप्निल बिष्ट (वाडिया, देहरादून), श्री शिव्यांक सिंह नेगी (वाडिया, देहरादून), श्री शिव शंकर यादव (एनआईएच, रुड़की), डॉ. शिवानंद मंडराहा (एनआईएच, रुड़की), श्री नितेश खेतवाल (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री संदीप सिंह (एसडीआरएफ, देहरादून), श्री सचिन कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री मनीष कुमार (एनडीआरएफ, गदरपुर), श्री महेंद्र (जिला चमोली), श्री मनोज सिंह (जिला चमोली), श्री शार्दुल गुसाईं, डीडीएमओ (जिला उत्तरकाशी) तथा इंजी. नरेंद्र सिंह रावत (जिला उत्तरकाशी) शामिल हैं।
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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने अभियोजन विभाग की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनपदों में अभियोजन से संबंधित मामलों की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मामलों के निस्तारण में तेजी लाते हुए अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाए जाने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अभियोजन की प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है। इसके लिए सम्बन्धित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ मामलों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें निर्धारित समय पर आयोजित नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठकें नियमित एवं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि अभियोजन से सम्बन्धित मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों में जघन्य अपराधों के मामलों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करते हुए प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। इसलिए जघन्य अपराधों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अभियोजन प्रक्रिया के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर प्रक्रियात्मक अथवा समन्वय सम्बन्धी समस्या सामने आती है, तो उसका तत्काल समाधान किया जाए, ताकि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को और बेहतर किया जाए। इसके लिए लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के साथ-साथ प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी ने *सेवा संकल्प अभियान* के तहत सभी जिलाधिकारियों को 15 सितम्बर, 2026 से 18 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अवसर पर प्रदेश में 15 सितम्बर से 18 अक्टूबर, 2026 तक विभिन्न कार्यक्रम एवं जनभागीदारी आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ‘भारत 2047’ कार्यक्रम के अंतर्गत 17 सितम्बर से 08 अक्टूबर, 2026 तक विकसित भारत एवं ‘भारत 2047’ विषय पर छात्र निबंध, चित्र एवं भाषण प्रस्तुत करेंगे। जिला स्तर पर प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी तथा श्रेष्ठ चित्रों को एनिमेटेड लघु फिल्मों में सम्मिलित कर प्रदर्शित किया जाएगा।

महानिदेशक सूचना ने कहा कि ‘सेवा और सपना’ के अंतर्गत प्रदेशभर के विद्यालयों में प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि 01 से 07 अक्टूबर, 2026 तक ‘हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज’ का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें युवाओं, स्टार्टअप्स एवं रिसर्चर्स को टेक्नोलॉजी, विकास एवं सोशल इनोवेशन सहित विभिन्न विषयों पर भारत के भविष्य के लिए समाधान तैयार करने हेतु आमंत्रित किया जाएगा।

महानिदेशक सूचना ने कहा कि ‘जन कल्याण संवाद’ के माध्यम से प्रौद्योगिकी, खेल, कला, विज्ञान एवं सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में प्रभावशाली व्यक्तियों को एक मंच पर लाया जाएगा। संवाद के माध्यम से समाज एवं दुनिया के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का अन्वेषण किया जाएगा। इसके साथ ही, 07 अक्टूबर, 2026 को ‘सेवा ज्योति यात्रा दिवस’ के अवसर पर रिले मैराथन में पेशेवर एथलीटों के साथ आम नागरिक भी प्रतिभाग करेंगे। इसके साथ ही खेल प्रतियोगिता, साइकिलिंग तथा बाइक रैली का आयोजन भी किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर के सुधांशु, श्री एल फ़ेनाई, विशेष प्रमुख सचिव श्री अमित सिन्हा, सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री नितेश कुमार झा, श्री विजय कुमार, श्री चंद्रेश कुमार यादव, श्री रविनाथ रमन, डॉ पंकज कुमार पांडेय, श्री बृजेश कुमार संत, श्री रणवीर सिंह चौहान, डॉ वी षणमुगम, श्री युगल किशोर पंत, श्री विनोद कुमार सुमन, श्री राजेंद्र कुमार, श्री धीराज सिंह गरब्याल एवं कमिश्नर कुमाऊँ श्री दीपक रावत एवं कमिश्नर गढ़वाल श्री आनन्द स्वरूप सहित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।