*लोक भवन सूचना परिसर, उत्तराखण्ड*
*राज्यपाल ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 के शुभारम्भ अवसर पर सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र प्रथम भावना का किया आह्वान*

*लोक भवन देहरादून 05 फरवरी, 2026*
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव-2026 के शुभारम्भ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गई एवं राज्यपाल द्वारा प्रदेश में विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 समाजसेवकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनमानस को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक आत्मा, सामूहिक चेतना और प्रकृति के साथ संतुलनपूर्ण जीवन-दृष्टि का प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, ऊर्जा और प्रकाश का संदेश देती है। यह पर्व समाज को निराशा से संकल्प की ओर तथा जड़ता से प्रगति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने उत्तरायणी को ऋतु-चक्र आधारित वैज्ञानिक चेतना और प्रकृति के साथ सामंजस्य का सजीव उदाहरण बताया। उन्होंने उत्तराखण्ड की कौथिक (मेले) परम्परा को लोकजीवन की धड़कन बताते हुए कहा कि ये आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक निरंतरता और लोकस्मृति के जीवंत केंद्र रहे हैं। लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और हस्तशिल्प उत्तराखण्ड की जीवंत, जाग्रत और गौरवशाली सांस्कृतिक परम्परा के प्रतीक हैं।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना से अनुप्राणित भूमि है। देवभूमि के वीर सपूतों ने सदैव राष्ट्र की सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के संकल्प की चर्चा करते हुए कहा कि योग, आयुष, शिक्षा, पर्यटन, जैव विविधता, जल-स्रोत संरक्षण, रक्षा सेवाओं और मानव संसाधन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश को दिशा देने की क्षमता रखता है। राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के लोगों की ईमानदारी, सादगी और कर्मठता को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने स्वामी रामतीर्थ, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली, तीलू रौतेली, गौरा देवी, बछेंद्री पाल, राइफलमैन जसवंत सिंह रावत और जनरल बिपिन रावत जैसे महान व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण साधारण व्यक्ति को भी इतिहास निर्माता बना देता है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव लोककला, लोकसंगीत, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को नई पहचान देता है तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को व्यवहारिक रूप से साकार करता है। उन्होंने युवाओं से नशे और व्यसनों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा, खेल, कौशल और सेवा के माध्यम से ही सशक्त उत्तराखण्ड और सशक्त भारत का निर्माण संभव है।
राज्यपाल ने सेवा संकल्प फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब वह सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी हो। उन्होंने उत्तरायणी महोत्सव को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय गौरव को नई ऊँचाइयाँ देने वाला बताया और सभी को शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर ट्रस्टी संस्थापक, सेवा संकल्प फाउंडेशन श्रीमती गीता धामी, प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर, कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल, आईएमए कमांडेंट ले ज नागेन्द्र सिंह सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं वरिष्ठ अधिकारी गण उपस्थित रहे।
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LIVE: हरिद्वार में आयोजित ‘सन्त सम्मेलन’*
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*सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत पात्रता परीक्षण, सत्यापन एवं भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ और त्वरित करें – सीएम धामी*

*मुख्यमंत्री धामी ने वन-क्लिक प्रणाली से 9.47 लाख से अधिक लाभार्थियों को पेंशन भुगतान किया*

*जनवरी 2026 में ₹141.66 करोड़ की पेंशन राशि DBT के माध्यम से खातों में हस्तांतरित*
*सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और तकनीक आधारित शासन का सशक्त उदाहरण*
*दो माह में 15,784 नए लाभार्थी पेंशन योजनाओं से जुड़े*
*गुड गवर्नेंस मॉडल से अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है योजनाओं का लाभ: मुख्यमंत्री*
मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग को निर्देश दिए हैं कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत पात्रता परीक्षण, सत्यापन एवं भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक निर्बाध रूप से पहुँचता रहे।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत माह जनवरी 2026 की पेंशन किस्त का वन-क्लिक के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में भुगतान किया। यह पहल राज्य सरकार की तकनीक आधारित, पारदर्शी और संवेदनशील शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करती है तथा सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर, वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, किसान, निराश्रित एवं जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रणाली के माध्यम से प्राप्त हो, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) एवं वन-क्लिक भुगतान प्रणाली से न केवल भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है, बल्कि लाभार्थियों को बिना किसी कार्यालयी प्रक्रिया के सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि प्राप्त हो रही है। इससे शासन और आम नागरिक के बीच विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत जनवरी 2026 माह में राज्य के 9,47,345 पात्र लाभार्थियों को पेंशन का लाभ प्रदान किया गया। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न पेंशन एवं सहायता योजनाओं के माध्यम से कुल ₹ 1 अरब 41 करोड़ 66 लाख 51 हजार की धनराशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की गई, जिसमें नियमित पेंशन के साथ-साथ एरियर भुगतान भी सम्मिलित है।
इस अवधि में वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत सर्वाधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई, वहीं विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली एवं बौना पेंशन योजनाओं के माध्यम से भी हजारों पात्र नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा का संबल मिला। यह व्यापक कवरेज राज्य सरकार की समावेशी और संवेदनशील नीति को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पेंशन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम यह है कि 01 दिसम्बर 2025 से 03 फरवरी 2026 की अवधि में 15,784 नए लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मृतक लाभार्थियों का समयबद्ध सत्यापन करते हुए 1,523 अपात्र नामों को पोर्टल से हटाया गया, जिससे योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र व्यक्तियों तक ही सीमित रह सके।
राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई डिजिटल पेंशन पोर्टल प्रणाली, स्वतः आयु-पात्रता पहचान और नियमित मॉनिटरिंग के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 की अवधि में 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही 428 पात्र नागरिकों को स्वतः वृद्धावस्था पेंशन की स्वीकृति दी गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पात्रता निर्धारण और स्वीकृति प्रक्रिया अब अधिक सरल, त्वरित और मानवीय हो गई है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि,
“राज्य सरकार का संकल्प है कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पहुंचे। पेंशन योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार हैं। हमारी सरकार गरीबों, वृद्धों, महिलाओं, दिव्यांगों और किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।”
इस अवसर पर अपर सचिव श्री संदीप तिवारी सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे |
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के कनखल स्थित आश्रम पहुंचकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव भी उपस्थित रहे |
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में ‘संत सम्मेलन’ में किया प्रतिभाग*

*सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना के प्रतीक थे सत्यमित्रानंद गिरी महाराज : मुख्यमंत्री धामी*
*उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी व दंगारोधी कानून लागू : सीएम*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार स्थित सप्तऋषि आश्रम मैदान (भारत माता मंदिर के समीप, सप्त सरोवर मार्ग) में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सनातन चेतना के जीवंत प्रतीक आप सभी संत-महात्मा, धर्मगुरु एवं श्रद्धालुजन, माँ गंगा के पावन तट पर स्थित सप्तऋषि क्षेत्र में एकत्र होकर राष्ट्र और संस्कृति के लिए अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन महापुरुषों ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रधर्म, सेवा, त्याग और करुणा के लिए समर्पित किया, वे केवल संन्यासी नहीं बल्कि राष्ट्र चेतना से जुड़े दिव्य संत थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरी महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए ऐसा जीवन दर्शन प्रस्तुत किया, जिससे अनगिनत लोगों को सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली। उन्होंने भारत माता मंदिर की स्थापना कर सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य किया, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केन्द्र बना हुआ है। वर्ष 1998 के कुंभ मेले में उन्हें आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया, जिसके बाद अब तक 10 लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षा प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यमित्रानंद गिरी महाराज की मूर्ति स्थापना नई पीढ़ी के लिए आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी। संत परंपरा किसी एक पंथ या संप्रदाय तक सीमित न होकर वसुधैव कुटुंबकम के भाव से सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने का कार्य करती है। सनातन धर्म मानव निर्मित नहीं, बल्कि शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है, जो समय के साथ चलता है और कभी पराजित नहीं होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त दंगारोधी कानून, तथा लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी जिहादी मानसिकताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून की स्थापना की गई है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 28 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक उत्थान का नया युग प्रारंभ हुआ है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण तथा बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे कार्य भारत को पुनः विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने कहा कि हरिद्वार में गंगा तट पर स्थित भारत माता मंदिर देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 2027 के कुंभ मेले की तैयारियाँ की जा रही हैं और महाराज जी का जीवन निरंतर सद्कर्म और साधना से प्रेरित रहा।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत में बीते वर्षों में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है और आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल, थल और वायु मार्गों का तीव्र विकास हुआ है तथा युवा शक्ति देश को विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर कर रही है। संत समाज भारतीय संस्कृति को सुदृढ़ करने और देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।
बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संतों का सान्निध्य जीवन के दुखों का समाधान है। भारत की पहचान सनातन संस्कृति से है। शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठ देश की आध्यात्मिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है, उसकी अभिव्यक्ति विभिन्न आस्थाओं के माध्यम से होती है।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, बिहार के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव, शंकराचार्य श्री राजराजेश्वराश्रम महाराज, योग गुरु बाबा रामदेव, सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम बना जनसुनवाई और सेवा का प्रभावी मॉडल*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसमाधान का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार सीधे जनता के द्वार तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रही है।
दिनांक 06 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में कुल 574 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से 12 कैंप आज आयोजित किए गए। इन कैंपों के माध्यम से अब तक 4 लाख 55 हजार 790 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है, जबकि आज अकेले 13 हजार 489 लोगों ने कैंपों में अपनी समस्याएं, शिकायतें एवं आवेदन प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 44,602 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 30,089 शिकायतों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े मुख्यमंत्री श्री धामी की “समाधान के साथ शासन” की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 64,155 आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा 2,52,334 नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया है। विशेष रूप से समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पेंशन, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं में बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थियों को सहायता मिली है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “ *सरकार का दायित्व केवल नीतियां बनाना नहीं, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक उसका लाभ पहुँचाना है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ इसी सोच का परिणाम है।”*
यह कार्यक्रम दूरस्थ, पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है, जहाँ अधिकारी स्वयं जाकर समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं। इससे न केवल प्रशासन पर जनता का विश्वास बढ़ा है, बल्कि उत्तराखंड सुशासन के मॉडल राज्य के रूप में नई पहचान भी बना रहा है।
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टिहरी/दिनांक 05 फरवरी, 2026
“टिहरी में पुनर्वास भूखण्ड आवंटन में अनियमितता पर एफआईआर दर्ज”
माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के निर्देशानुसार प्रदेश में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के क्रम में निरंतर कार्य किया जा रहा है, इसी क्रम में जनपद टिहरी गढ़वाल में जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल के निर्देशन में पुनर्वास में आबंटन प्रक्रिया को पारदर्शी करने के दौरान एक प्रकरण सामने आया, जिसमें ग्राम प्रधान सिंराई एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य सिंराई खदरी खड़कमाफ, विकासखण्ड डोईवाला, जनपद देहरादून द्वारा पुनर्वास स्थल निर्मल (ब्लॉक ए०, बी०) एवं आमबाग में भूखण्डों के कथित रूप से गलत तरीके से भूखंड आवंटन किये जाने के सम्बन्ध में पुनर्वास निदेशालय में एक शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।
उक्त शिकायत के क्रम में जिलाधिकारी/पुनर्वास निदेशक नितिका खण्डेलवाल द्वारा प्रकरण की जांच हेतु अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया। समिति द्वारा जांचोपरान्त प्रस्तुत संस्तुति के आधार पर सुरेश सिंह, नरेश सिंह, खेम सिंह (पुत्रगण महाबीर सिंह), निवासी ग्राम भल्डियाना, तथा सुशीला देवी (पत्नी तेग सिंह), निवासी ग्राम पुन्साडा, जनपद टिहरी गढ़वाल एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में दिनांक 31.01.2026 को कोतवाली नई टिहरी में प्रथम सूचना रिपोर्ट (F.I.R.) पंजीकृत करायी गयी है।
पुनर्वास विभाग टिहरी द्वारा प्रकरण की गम्भीरता को दृष्टिगत रखते हुए जांचोपरान्त पुलिस विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु सूचित किया गया है। विभाग द्वारा जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान किया है।
जिलाधिकारी टिहरी ने अवगत कराया कि पुनर्वास विभाग दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित किये जाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाये जाने हेतु आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं।
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टिहरी/दिनांक: 05 फरवरी, 2026
“दिसम्बर 2025 के खाद्यान्न वितरण की अवधि 15 फरवरी 2026 तक बढ़ाई गई”
“फोर्टिफाइड चावल की अनुपलब्धता के कारण खाद्यान्न वितरण अवधि विस्तारित”
“राशन कार्डधारकों हेतु खाद्यान्न वितरण की नई समय-सीमा जारी”
“जनवरी-फरवरी 2026 का खाद्यान्न वितरण 28 फरवरी तक जारी रहेगा”
जिला पूर्ति अधिकारी टिहरी गढ़वाल मनोज कुमार डोभाल ने जनपद के समस्त राशनकार्ड धारकों को सूचित किया, कि फर्कोटिफाइड चावल (Fortified Rice) की उपलब्धता न होने से राशन कार्डधारकों को माह दिसम्बर 2025 का चावल वितरण न होने के कारण, माह दिसम्बर 2025 के खाद्यान्न वितरण की अवधि दिनांक 15 फरवरी 2026 तक विस्तारित कर दी गयी है, साथ ही माह जनवरी, एवं फरवरी 2026 के खाद्यान्न वितरण की अवधि दिनांक 28 फरवरी 2026 तक रहेगी।
उन्होंने जनपद के समस्त राशन कार्डधारक से अपील की है कि सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता की दुकान से माह दिसम्बर 2025 का खाद्यान्न दिनांक 15 फरवरी, 2026 तक एवं माह जनवरी, फरवरी 2026 का खाद्यान्न दिनांक 28 फरवरी 2026 तक बॉयोमेट्रिक ऑथेन्टिकेशन के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
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टिहरी/दिनांक: 05 फरवरी, 2026
*‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविरों की समीक्षा बैठक आयोजित*
आज जनपद टिहरी गढ़वाल स्थित जिला कलेक्ट्रेट के वीसी कक्ष में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान अंतर्गत आयोजित शिविरों की समीक्षा बैठक संपन्न हुई।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा शिविरों में प्राप्त प्रस्तावों एवं जनसमस्याओं के निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की गई। आयुष विभाग की समीक्षा के दौरान जिला आयुर्वेदिक अधिकारी सुभाष द्वारा अवगत कराया गया कि शिविरों के दौरान कुल 2014 मरीजों का परीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने वितरित की गई दवाओं सहित अन्य कार्यों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
लघु सिंचाई विभाग से अधिशासी अभियंता बृजेश गुप्ता द्वारा शिविरों में प्राप्त मरम्मत कार्यों की मांग के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही पशुपालन विभाग से जिला पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा द्वारा पशु सेवा केंद्र की मांग एवं आपदा से क्षतिग्रस्त गौशालाओं के निर्माण की आवश्यकता से अवगत कराया गया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल, सहायक संख्या अधिकारी धारा सिंह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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टिहरी/दिनांक 05 फरवरी, 2026
“घनसाली जन संघर्ष मोर्चा के सदस्यों के साथ जिलाधिकारी टिहरी ने की बैठक”
आज गुरुवार को जनपद टिहरी गढ़वाल स्थित जिला कलेक्ट्रेट के वीसी कक्ष में तहसील घनसाली में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने वाले ‘घनसाली जन संघर्ष मोर्चा’ के सदस्यों के साथ जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल द्वारा बैठक की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मोर्चा द्वारा पूर्व में उठाई गई मांगों के संबंध में अवगत कराया कि घनसाली में जिला अस्पताल के विषय में शासन को अनुस्मारक प्रस्ताव प्रेषित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के उच्चीकरण की मांग पर शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होना अभी शेष है।
बैठक में उपस्थित मोर्चा के सदस्यों द्वारा धरना स्थल पर लोगों पर की गई कार्यवाही पर रोक लगाए जाने हेतु अनुरोध किया गया तथा पूर्व में हुई गर्भवती महिलाओं की मृत्यु पर मुआवजा दिए जाने की मांग भी रखी, जिसपर जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा तथा शासन स्तर पर लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बैठक में सीएमओ डॉक्टर श्याम विजय एवं एसडीएम अल्केश नौडियाल सहित ‘घनसाली जन संघर्ष मोर्चा’ के कार्यकारी अध्यक्ष संदीप आर्य, जिला पंचायत सदस्य विक्रम सिंग घणाता और अनुज लाल शाह, क्षेत्र पंचायत सदस्य पुरुषोत्तम आर्य, विनोद लाल, सुनीता रावत, अरविंद राणा ब्लॉक अध्यक्ष यूकेडी, शांति श्रीवान, हर्षमणि उनियाल, विनोद चौधरी सहित अन्य संबंधित उपस्थित रहे।
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आवश्यक *सूचना*
कल प्रातः 11:00 बजे विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी महोदया द्वारा टिहरी लेक फेस्टिवल के संबंध में ब्रीफिंग दी जाएगी।
आप सभी पत्रकार बंधुओं से अनुरोध है कि निर्धारित समय पर उपस्थित होने का कष्ट करें।
