बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे, वसंत पंचमी पर हुई घोषणा इस पावन पर्व में शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी रहेंगे मौजूद

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बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे, वसंत पंचमी पर हुई घोषणा

वसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी राजदरबार में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा की गई। इसके अनुसार, बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल 6,15 प्रातः को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

इस अवसर पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती १००८ जी महाराज ने समस्त सनातन धर्मावलंबियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
ज्योतिष पीठाधीश्वर ने बताया कि कपटोद्घाटन के अवसर पर वे परंपरानुसार स्वयं बदरीनाथ धाम में उपस्थित रहेंगे।
उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि ग्रीष्मकाल में मंदिर के कपाट खुलने के पश्चात भगवान बदरीनाथ के दर्शन हेतु अवश्य पधारें।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने यह शुभकामना संदेश प्रयागराज में माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने पंडाल के बाहर अनशन स्थल से दिया।

“भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। यह समय आत्मशुद्धि, संयम और धर्म के मार्ग पर अग्रसर होने का संदेश देता है। चारधाम यात्रा के माध्यम से मानव जीवन को दिशा और ऊर्जा प्राप्त होती है।”
शंकराचार्य जी ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान मर्यादा, स्वच्छता एवं प्रकृति संरक्षण का विशेष ध्यान रखने की अपील करते हुए कहा कि देवभूमि की पवित्रता बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि बद्रीनाथ धाम में भगवान नारायण की कृपा से समस्त विश्व का कल्याण हो, यही प्रार्थना है।

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देहरादून 23 जनवरी, 2026
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मण्डल रेल प्रबन्धक, उत्तर रेलवे मुरादाबाद श्रीमती विनीता श्रीवास्तव के साथ मुख्य सचिव कार्यालय में बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान उत्तर रेलवे से सम्बन्धित प्रकरणों एवं परियोजनाओं के सम्बन्ध में विस्तार से चर्चा हुयी।

मुख्य सचिव ने ऋषिकेश- डोईवाला बाईपास रेलवे लाईन परियोजना के तहत् जिलाधिकारी देहरादून को राजाजी नेशनल पार्क एवं वन विभाग की 3.62 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर रेलवे, मुख्य वन्यजीव वार्डन और राजाजी नेशनल पार्क के साथ मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण कराते हुए निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने देहरादून- मोहण्ड- सहारनपुर टनल आधारित रेलवे लाईन परियोजना के सम्बन्ध में परियोजना का फाईनल लोकेशन सर्वे कराते हुए अद्यतन स्थिति से शीघ्र अवगत कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को हर्रावाला रेलवे स्टेशन विस्तारीकरण का मास्टर प्लान को भी शासन से साझा किए जाने की बात कही। कहा कि रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त सर्वे करते हुए शीघ्र ही निरीक्षण आख्या शासन को उपलब्ध कराए।

मुख्य सचिव ने कुम्भ मेला – 2027 के दौरान यातायात व्यवस्था दुरूस्त रखने एवं श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के दृष्टिगत रेलवे अधिकारियों को जिलाधिकारी हरिद्वार, एसएसपी हरिद्वार, मेलाधिकारी एवं राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को मिलकर संयुक्त रूप से ट्रैफिक प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे सुरंग हरिद्वार के पास ढलान स्थिरीकरण (slop stabilization) कार्य को शीघ्र कराते हुए कृत कार्यवाही की आख्या शासन को भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही।

इस अवसर पर सचिव परिवहन श्री बृजेश कुमार संत, अपर सचिव श्रीमती रीना जोशी सहित रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में प्रशासनिक अधिकारियों को किया संबोधित*

*विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में भूमिका निभाएगा विकसित उत्तराखंड का विजन*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस दो दिवसीय शिविर के माध्यम से, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार की जाएगी। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र विकास से जुड़े सभी प्रमुख क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिससे राज्य के भविष्य के लिए एक स्पष्ट, व्यवहारिक और समयबद्ध दिशा निर्धारित की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प तभी साकार हो सकता है जब देश का प्रत्येक राज्य समान रूप से विकसित हो। इसके लिए उत्तराखण्ड को भी अपने संसाधनों, क्षमताओं और विशिष्टताओं के अनुरूप विकास की एक स्पष्ट और दीर्घकालिक दिशा तय करनी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत” का संकल्प किसी एक सरकार, किसी एक कार्यकाल या किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, सामरिक तथा सांस्कृतिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प निहित है। इस विज़न की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें विकास को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे मानव केंद्रित, समावेशी और सतत बनाया गया है। विकसित भारत का अर्थ एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों, जहाँ शासन व्यवस्था पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित हो।

*प्रशासनिक तंत्र की भूमिका*
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर उसके क्रियान्वयन और अंतिम सफलता तक प्रशासन की सक्रियता, संवेदनशीलता और दक्षता ही ये तय होती है। इसलिए इस विज़न को साकार करने में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए हमारे प्रशासन को न केवल तेजी और पारदर्शिता के साथ कार्य करना होगा, बल्कि प्रत्येक नीति, निर्णय और योजना को ‘लक्ष्य आधारित’ एवं ‘जन-केंद्रित’ दृष्टि से लागू करना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आप लोग अपने कार्यों को केवल आदेश देने या मीटिंग करने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दायरे में आने वाले प्रत्येक कार्य को नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्ध और परिणाम केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तत्परता और जवाबदेही के साथ पूर्ण करें। मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि आज हम विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का रोडमैप बना रहे हैं। इसका अर्थ केवल योजनाएं और नीतियां बनाने या लक्ष्य निर्धारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें ये ये देखना होगा कि हमारी योजनाओं और नीतियों से आम नागरिकों के जीवन में क्या बदलाव आएगा। इसके लिए हमें, किसानों की आय वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार सृजन, महिलाओं के लिए समान अवसर जैसे मानकों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति ही विकसित उत्तराखंड और विकसित भारत की वास्तविक कसौटी तय करेंगे।

*टीम उत्तराखंड की तरह कार्य करें*
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के नाते हमारे सामने कुछ विशेष चुनौतियाँ भी हैं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों के भीतर अनेकों अवसर छिपे हुए हैं। यदि हम अपनी नीतियों और योजनाओं को राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालें, तो उत्तराखण्ड इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित कर देश में विकास को नई दिशा दे सकता है। इसके लिए हमें तय करना होगा कि वर्ष 2047 में हमारा राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, तकनीक और सुशासन जैसे क्षेत्रों में किस स्तर तक पहुँचना चाहिए। साथ ही साथ विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर विजन 2047 को साकार करने के लिए सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आगामी पच्चीस वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें “सोलो प्लेयर” वाली मानसिकता से ऊपर उठकर निकलकर “टीम उत्तराखंड” के रूप में कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिस स्थान से आपने अपनी सेवा शुरु की है वहां के विकास पर विशेष ध्यान दें, साथ ही जन जन की सरकार, जन जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सामने आने वाली जनसमस्याओं को डायरी में नोट करते हुए, उनके निराकरण करें।

*विकसित उत्तराखण्ड की नींव*
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तराखंड की नींव सुशासन, तकनीक एवं नवाचार और जन केंद्रित सतत एवं संतुलित विकास के तीन स्तंभों पर टिकी है। सुशासन का अर्थ केवल नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना नहीं बल्कि हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हर निर्णय समय पर हो, हर योजना पारदर्शी हो और हर अधिकारी अपने दायित्व के प्रति जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि हमें ई-गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके शासन को और अधिक प्रभावी, तेज और पारदर्शी बनाना होगा। साथ ही ये भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और सीमांत गाँवों तक भी पहुँचे। इसके साथ ही, हमारी नीतियों और योजनाओं के केंद्र में आम नागरिकों का कल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसे बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आपदा प्रबंधन को हमें विकास योजना का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

*निर्धारित करें आउटपुट और आउटकम*
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रत्येक योजना का स्पष्ट आउटपुट और आउटकम निर्धारित करना होगा। केवल रुपया व्यय हो जाना ही किसी योजना की सफलता का पैमाना नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आपका प्रत्येक निर्णय केवल आज को प्रभावित नहीं करता, बल्कि आने वाले भविष्य की दिशा भी तय करता है। बतौर प्रशासनिक अधिकारी आपके निर्णय, कार्य और नीतियों से जनता के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं, वही भविष्य में आपकी वास्तविक पहचान बनेंगे। इसलिए अपने दायित्वों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी न समझें, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का अवसर मानकर निभाएँ। उन्होंने कहा कि कभी कभी देखने में आता है कि जनता की बात अनसुनी रह जाती है, कभी लालफीताशाही कार्यों में देरी लाती है ये स्थितियाँ प्रशासन पर जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड की ये यात्रा लंबी है, यदि हमारी दिशा सही रहेगी, हमारी नीति स्पष्ट रहेगी, हमारी नीयत साफ रहेगी और हमारा संकल्प अडिग रहेगा तो हम अपने लक्ष्य को पूर्ण करने में अवश्य सफल रहेंगे।

*संबोधन में बाद भी मंथन में शामिल हुए सीएम*
सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डॉयलाग ऑन विजन 2047 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उद्घाटन सत्र के बाद भी काफी देर तक शामिल हुए। प्रथम सत्र में संबोधन के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंच के नीचे हॉल की प्रथम पंक्ति में बैठ गए। इस दौरान मंच पर विभिन्न विषयों पर मंथन और संवाद चलता रहा, सीएम पुष्कर सिंह धामी इस दौरान हॉल में बैठकर, परिचर्चा को सुनते रहे, साथ ही संवाद के प्रमुख बिंदुओं और सुझावों को नोट भी करते रहे।

इस अवसर पर सेतु आयोग के सीईओ श्री शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग से प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. नीलम पटेल, आईएएस अधिकारी एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने की मुलाकात*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार में राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने मुलाक़ात की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री धामी एवं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा के मध्य उत्तराखंड में सड़क, राजमार्ग एवं आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार, सड़क सुरक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी तथा चल रही एवं प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड में सड़क एवं परिवहन अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क नेटवर्क न केवल प्रदेश के आर्थिक विकास को गति देगा, बल्कि पर्यटन, चारधाम यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को भी मजबूती प्रदान करेगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा ने उत्तराखंड के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी राज्य को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री धामी की जन-केंद्रित पहल का असर, “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” से 3.56 लाख से अधिक लोग लाभान्वित*

*धामी सरकार जनता के द्वार पर, 452 कैम्पों में 3,56,992 नागरिकों की सहभागिता*

*आज 7 कैम्प, 2933 लोगों को मौके पर मिला समाधान — धामी सरकार का सुशासन मॉडल सफल*

 

प्रदेश में सुशासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम आम जनता के लिए अत्यंत प्रभावी और भरोसेमंद सिद्ध हो रहा है। इस अभिनव पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है।

कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुल 7 कैम्पों का आयोजन किया गया, जिनमें 2933 नागरिकों ने प्रतिभाग कर विभिन्न विभागों से जुड़ी सेवाओं और समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि जनता इस पहल पर पूर्ण विश्वास जता रही है।
अब तक कार्यक्रम की अवधि में कुल 452 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 3,56,992 (तीन लाख छप्पन हजार नौ सौ बानवे) से अधिक नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है। इन कैम्पों के माध्यम से राजस्व, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पेंशन, प्रमाण पत्र, शिकायत निस्तारण सहित अनेक सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम इसी सोच का सशक्त उदाहरण है, जिसमें शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त किया गया है।

इस कार्यक्रम ने न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत किया है, बल्कि आम नागरिकों का सरकार पर विश्वास भी और अधिक गहरा किया है। प्रदेशभर में इस पहल को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के जन-केंद्रित, संवेदनशील और जवाबदेह शासन मॉडल को दर्शाती है।