मुख्यमंत्री ने भगवान सूर्य की मूर्ति के जलाभिषेक के लिए कलश यात्रा का फ्लैग ऑफ किया जानिए सभी समाचार एक साथ

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास देहरादून से कुशीनगर जनपद में भगवान सूर्य की मूर्ति के जलाभिषेक के लिए कलश यात्रा का फ्लैग ऑफ किया।

 

कुशीनगर में सूर्य की मूर्ति के जलाभिषेक के लिए देश से लगभग 151 पवित्र नदियों का जल एकत्र किया जा रहा है। इसी क्रम में देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र नदियों से एकत्रित जल की कलश यात्रा को मुख्यमंत्रीने रवाना किया।

इस दौरान महामंडलेश्वर श्री 1008 डॉक्टर स्वामी श्री संतोषानंद देव जी महाराज, पूर्वांचल महोत्सव समिति के अध्यक्ष विनय राय और समिति के सदस्यों मौजूद रहे।

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मुख्यमंत्री धामी ने जनसमस्याओं पर की फरियादियों से बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर अपनी समस्या बताने वाले फरियादियों से बातचीत करते हुए अधिकारियों को उन पर उचित कार्रवाही के निर्देश दिए हैं। डोईवाला तहसील के शेरगढ़ निवासी कर्मचंद ने शिकायत दर्ज कराई थी, कि उनके खेत के लिए आने वाली सिंचाई नहर, टूट गई है, जिस कारण सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ने उनसे पूरी समस्या सुनने के बाद, प्रमुख अभियंता सिंचाई विभाग को मामले में उचित कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इसी तरह मेजर नरेश कुमार सकलानी ने उनकी भूमि पर निजी व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण कर लधु सिंचाई नहर बनाने की शिकायत दर्ज की गई, जिस पर मुख्यमंत्री धामी ने जिलाधिकारी देहरादून को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। एक अन्य शिकायतकर्ता कैनाल रोड निवासी धीरेंद्र शुक्ला ने बिल्डर के खिलाफ परेशान करने की शिकायत दर्ज कराई है, मुख्यमंत्री ने एमडीडीए को इस प्रकरण में जांच करने को कहा है। विकासनगर दिनकर विहार निवासी विशन दत्त शर्मा की सड़क संबंधित शिकायत पर भी मुख्यमंत्री ने सचिव लोक निर्माण विभाग को कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

“जनता के पत्र सिर्फ कागज़ नहीं, उम्मीद और विश्वास का प्रतिबिम्ब होते हैं, आज ऐसे ही कुछ शिकायती पत्र पढ़ने के बाद मैने संबंधित शिकायतकर्ताओं से बात की। साथ ही अधिकारियों को इन पर तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। समाधान ही हमारी सरकार की कार्यशैली की सबसे बड़ी पहचान है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

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मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड औद्योगिक निवेश एवं विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारी समिति (Ex C) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उत्तराखंड नियोजन विभाग के अंतर्गत गठित यूआईआईडीबी द्वारा *हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत हरिद्वार शहर के संपूर्ण डेवलपमेंट और 2027 में हरिद्वार कुंभ मेला की आवश्यकता* से संबंधित विभिन्न प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण दिया गया।

प्रस्तुतीकरण में हरिद्वार शहर का सुगम मोबिलिटी प्लान, सौंदर्यीकरण, सैनिटेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, तीर्थ यात्री फ्रेंडली एक्सेस डेवलपमेंट, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, पब्लिक सुविधाओं का विकास, भीड़ प्रबंधन, कल्चरल हब डेवलपमेंट, पार्किंग, सती कुण्ड डेवलपमेंट, 10 जंक्शंस का ज्यामितीय इंप्रूवमेंट, मल्टी मॉडल टूरिज्म एक्टिविटी, सीसीटीवी कैमरा व पब्लिक ऐड्रेसिंग सिस्टम, तीर्थ यात्री फ्रेंडली सुविधाओं, चंडी देवी, मनसा, देवी, माया देवी व विलकेश्वर मंदिर से जुड़े डेवलपमेंट कार्यों पर आगामी 2027 के कुंभ मेला के दृष्टिगत व्यापक विचार- विमर्श किया गया।

*हरिद्वार के मुख्य लैंडमार्क (धार्मिक केंद्रों) का पेडेस्ट्रियन वेकिया कि मनसा देवी, चंडी देवी, माया देवी, दक्ष मंदिर, हर की पैड़ी, भारत माता मंदिर, दक्षिणेश्वर काली इत्यादि हरिद्वार के मुख्य धार्मिक केंद्रों का पेडेस्ट्रियन वे सर्किट प्लान बनाएं।

उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रियों का पैदल मार्ग ऐसा हो जिसमें उनको कहीं पर भी थोड़े समय के लिए भी रुकना ना पड़े ( कोई भी अवरोध ना हो) तथा ऐसा पेडेस्ट्रियन मार्ग वन वे हो जिसमें सुरक्षा के भी सभी वैकल्पिक इंतजाम हो।

उन्होंने मेलाधिकारी,स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंसल्टेंट एजेंसी और संबंधित स्टेकहोल्डर को आपसी समन्वय से 15 दिवस के भीतर इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

*हर की पैड़ी में आरती पॉइंट पर व्यवस्थित एंट्री – एग्जिट प्लान बनाने के निर्देश*

मुख्य सचिव ने मेला अधिकारी, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हरकी पैड़ी का आरती पॉइंट सबसे अधिक भीड़ – भाड़ वाला स्थान रहता है तथा यहां पर क्राउड मैनेजमेंट करना सबसे बड़ी चुनौती भी रहती है। इसको दृष्टिगत रखते हुए व्यवस्थित प्रवेश और निकासी का दुरुस्त a बनाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

*हरिद्वार में फॉरेस्ट से सटे क्षेत्रों में डेवलपमेंट हेतु राजाजी पार्क प्रशासन होगी कार्यदाई एजेंसी*

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न धार्मिक केंद्रों,पब्लिक सुविधाओं के विकास और अन्य डेवलपमेंट से संबंधित ऐसे कार्य जो राजाजी पार्क प्रशासन के क्षेत्र के निकट हैं अथवा आंशिक रूप से उनके क्षेत्र से संबंधित हों उन कार्यों के क्रियान्वयन के लिए राजाजी पार्क प्रशासन को कार्यदाई एजेंसी बनाया जाए ताकि डेवलपमेंट से जुड़े कार्य तेजी से पूरे हो सके।

*सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग,भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रबंधन को रखें उच्च प्राथमिकता में*

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि जो कार्य अधिक महत्वपूर्ण प्रकृति के हैं और शीघ्रता से पूरे किए जाने हैं उनको उच्च प्राथमिकता में रखा।

उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के आपातकालीन उपाय इत्यादि कार्यों को उच्च प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए।

*जहां जरूरी हो तो संबंधित स्थानीय निकाय,ट्रस्ट, गंगा सभा, स्थानीय प्रतिनिधि आदि हितधारकों को विश्वास में लेकर कार्य संपादित करें*

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न कार्यों को संपादित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जहां पर स्थानीय लोकल बॉडी, प्रतिनिधि अथवा स्थानीय ट्रस्ट आदि का इन्वॉल्वमेंट जरूरी हो वहां पर उनके समन्वय से कार्य करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और स्टेकहोल्डर को हरिद्वार के डेवलपमेंट के संबंध में संयुक्त रूप से संपूर्ण शहर का विजिट करने के निर्देश दिए और डेवलपमेंट प्लान में जहां पर कुछ और प्रावधान किए जाने की आवश्यकता हो तो उनको भी प्लान में शामिल करने हेतु प्रस्ताव बनाने को कहा।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव एल एल फैनई व आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर व डॉ पंकज कुमार पांडेय, विशेष सचिव अजय मिश्रा, कुंभ मेला अधिकारी हरिद्वार श्रीमती सोनिका सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों द्वारा *उत्तराखंड की इलेक्ट्रिक वाहन (मैन्युफैक्चरिंग एंड परचेजिंग) पॉलिसी- 2025* का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया।

उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल इकोसिस्टम तैयार करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही EV पॉलिसी के विभिन्न आयामों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

*उत्तराखंड ग्रीन परिवहन की अवधारणा को साकार करने के लिए बेहतर इंसेंटिव प्रावधानों को पॉलिसी में शामिल करें: मुख्य सचिव*

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि उत्तराखंड में ग्रीन परिवहन की अवधारणा को साकार करने तथा मा. प्रधानमंत्री के इलेक्ट्रिक वाहन के संबंध में 2030 तक के लक्ष्य के अनुरूप पॉलिसी में मैन्युफैक्चरर, उपभोक्ता और संचालक सभी के लिए बेहतर इंसेंटिव का प्रावधान शामिल करें जिससे इलेक्ट्रिक वाहन का एक बेहतर इकोसिस्टम डेवलप हो सके।

उन्होंने बेहतर इंसेंटिव के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल में आने वाले अवरोधों के त्वरित समाधान के लिए पॉलिसी में प्रभावी और त्वरित निगरानी तंत्र का प्रावधान करने के भी निर्देश दिए।

सचिव विनय शंकर पांडेय और परिवहन विभाग द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि उत्तराखंड में इलेक्ट्रिक वाहन के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए इस पॉलिसी में मैन्युफैक्चरर से लेकर उपभोक्ता, संचालक और चार्जिंग स्टेशन स्थापन इत्यादि के लिए बेहतर इंसेंटिव का प्रावधान किया जा रहा है। कहा कि इस पॉलिसी में कार्बन क्रेडिट बेनिफिट के लिए प्रेरक इंसेंटिव, इंडस्ट्री साइड और उपभोक्ता साइड के लिए इंसेंटिव, कैपिटल सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी, ब्याज सब्सिडी, भूमि रिबेट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट फैसिलिटी इत्यादि सभी के लिए इंसेंटिव का प्रावधान की बात है।
इसमें वाहन की अलग-अलग श्रेणी टू व्हीलर, थ्री व्हीलर, फोर व्हीलर, E बस इत्यादि के क्रम में इंसेंटिव का प्रावधान शामिल होगा।

उन्होंने अवगत कराया कि भारत में कुल वाहन की संख्या 34 करोड़ है। जिसमें 61.65 लाख इलेक्ट्रिक वाहन शामिल है।

उत्तराखंड में कुल वाहन 4215496 है जिसमें कुल इलेक्ट्रिक वाहन 84614 हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव विनय शंकर पांडेय, डॉ आर राजेश कुमार व एस एन पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में टेलीकम्युनिकेशन विभाग के तत्वाधान में आठवीं राज्य स्तरीय ब्रॉडबैंड समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में टेलीकम्युनिकेशन विभाग, मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता फर्म और संबंधित अधिकारियों द्वारा भारत सरकार की संचार और इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित परियोजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों से संबंधित विभिन्न मुद्दों और उसके समाधान पर व्यापक विचार- विमर्श किया गया।

बैठक में विभिन्न मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता फर्म द्वारा रिमोट एरिया में उच्च तीव्रता की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रोवाइड करने में कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क का ना होना बताया। जिस पर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि रिमोट एरिया में एक भी विलेज अथवा एक भी कस्बा इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित नहीं होना चाहिए। यदि कुछ जगह सड़क संपर्क मार्ग ना हो तो वहां पर हवाई ट्रांसपोर्ट द्वारा उपकरणों को पहुंचाया जाए और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिटकुल के पास 617 किलोमीटर की फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछी हुई है उसको विभिन्न टेलीकॉम कंपनियां रेंट पर लेकर उसका उपयोग सकती हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि चूंकि राज्य में *RoW (राइट ऑफ वे) रूल्स – 2014* पहले से ही लागू हैं। इसलिए उसके अनुसार ही इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित सेवाएं देना सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव ने पुराने टेलीकॉम टॉवर्स को नियमित करने तथा कॉमन डक्ट और एरियल केबल पॉलिसी बनाने के लिए सचिव आईटी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग, यूपीसीएल, पिटकुल, फॉरेस्ट, बीएसएनल तथा संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि इंटरनेट कनेक्टिविटी और संचार कनेक्टिविटी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित जो भी इश्यू उनसे संबंधित हैं उनका त्वरित निराकरण करें। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन, टेलीकॉम डिपार्टमेंट और संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी के साथ आपसी समन्वय स्थापित करते हुए उनका समाधान निकालें।

उन्होंने सभी मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता कंपनियों को निर्देशित किया कि शहरों और कस्बों में भी जहां पर कनेक्टिविटी का पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं फिर भी अनेक बार कॉल ड्रॉप की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इसके लिए सभी कम्युनिकेशन प्रदाता कंपनियां अपने-अपने रिसोर्सेस का पुनः सर्वे कर लें तथा कॉल ड्रॉप या कनेक्टिविटी में अवरोध जैसी समस्याओं का स्थाई समाधान करना सुनिश्चित करें।

टेलिकॉम विभाग ने अवगत कराया कि भारतनेट स्कीम के अंतर्गत राज्य में 6590 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

राज्य के 30 विकासखंडों की 1819 ग्राम पंचायतों में जिसमें ग्राम पंचायत कार्यालय, पीएससी (प्राथमिक सर्विस सेंटर) इत्यादि में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है। इनमें 13576 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

अवगत कराया कि केंद्र के गति शक्ति GIS पोर्टल पर वर्तमान समय तक राज्य के तीन लाख से अधिक स्ट्रीट फर्नीचर (कनेक्टिविटी से संबंधित विद्युत खंबे, टावर इत्यादि इक्विपमेंट्स) मैप कर दिए गए हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव एल एल फैनई, राज्य में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के नोडल (सचिव आईटी नितेश कुमार झा तथा निदेशक ITDA गौरव कुमार), सचिव सी रविशंकर, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन से ADG वेस्ट UP आर एस परमार व DPG रूरल देहरादून राजीव बंसल के अतिरिक्त बीएसएनल, एयरटेल, जिओ, इंडस टावर तथा संबंधित विभागों व फर्म के अधिकारी व प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित थे।

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*ऋण प्रक्रियाओं और बीमा क्लेम में सरलीकरण हो, ऋण जमा अनुपात बढ़ाने पर दिया जाए विशेष जोर- मुख्यमंत्री*

*राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश*

केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लोगों को पूरा लाभ मिले, इसके लिए लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण देने की प्रक्रियाओं का और सरलीकरण  दियाकिया जाए। जन समस्याओं का समाधान करना हमारी शीर्ष प्राथमिकता हो। कृषि बीमा योजनाओं में बीमा क्लेम की प्रक्रियाओं के सरलीकरण की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। जनपदों में ऋण जमा अनुपात बढ़ाने पर वध्यान जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री श्री पुष्कर धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की विशेष बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का ऋण जमा अनुपात बढ़ाने की दिशा में और प्रयास किए जाएं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का ऋण जमा अनुपात 54 प्रतिशत से बढ़कर 54.26 प्रतिशत हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसे 60 प्रतिशत तक ले जाने के लिए और प्रभावी प्रयास किए जाएं। राज्य के पर्वतीय जनपदों, विशेषकर टिहरी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पौड़ी और बागेश्वर जनपदों में ऋण जमा अनुपात बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों को एक ही स्थान पर एक ही दिन में मिले, इसके लिए अक्टूबर में सभी जनपदों में बड़े स्तर पर कैम्प का आयोजन किया जाए, जिसमें सभी विभाग और बैंकर्स साथ बैठकर जन समस्याओं का समाधान करें और उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करें।

बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखंड में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत प्रति लाख पर 48 हजार व्यक्तियों को बीमा कवरेज प्राप्त हुआ है, जो राष्ट्रीय औसत 40 हजार से अधिक है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत राज्य में प्रति ऋणकर्ता को औसत ऋण राशि 93,900 रुपये वितरित की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 62,686 की तुलना में काफी अधिक है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत राज्य में अब तक 39 लाख खाते खोले जा चुके हैं, यह आंकड़ा पर्वतीय राज्यों में सबसे अधिक है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में अग्रिमों में 10.26 प्रतिशत और जमा में 9.09 प्रतिशत की वृद्धि रही। राज्य सरकार की वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में निरंतर अच्छी प्रगति रही। राज्य के कुल 06 लाख 10 हजार 636 किसानों ने के.सी.सी. सुविधा का लाभ लिया है, जिनमें से 67 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान हैं। राज्य में 70.23 प्रतिशत स्वयं सहायता समूहों का क्रेडिट लिंकेज है। विगत तीन वर्षों में एस.एच.जी. की संख्या में 21 प्रतिशत वृद्धि हुई है।

बैठक में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, श्री नितेश कुमार झा, श्रीमती राधिका झा, श्री श्रीधर बाबू अदांकी, आरबीआई के रीजनल डायरेक्टर श्री अरविंद कुमार, एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक श्री देवाशीष मिश्रा, अपर सचिव श्रीमती रंजना राजगुरु, श्री हिमांशु खुराना, श्री मनमोहन मैनाली और संबंधित बैंकों के अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को आई.आर.डी.टी ऑडिटोरियम, सर्वे चौक, देहरादून में सी.एस.सी (कॉमन सर्विस सेंटर) दिवस-2025 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने सीएससी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को CSC वी.एल.ई पुरस्कार से भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएससी उस परिवर्तन का प्रतीक है, जो देश के कोने-कोने तक पहुंच गया है। यह आम लोगों के विश्वास का केंद्र होने के साथ-साथ लोगों की आकांक्षाओं को भी पूरा करता है। सीएससी के माध्यम से शहरों की सेवाएं एक क्लिक में गांव तक पहुंच रही हैं तथा देश की ग्राम पंचायतें डिजिटल पंचायतें बन रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सीएससी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएससी संचालक ग्राम स्तर पर लोगों के जीवन को सरल और सुगम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीएससी संचालक गांव के भविष्य को संवारने का कार्य कर रहे हैं। सीएससी ने डिजिटल सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने के साथ ही समाज में रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। उत्तराखंड राज्य में 13 हजार से अधिक सीएससी संचालित हैं। इनके माध्यम से यूसीसी पंजीकरण, विभिन्न प्रमाण पत्रों और डिजिटल ट्रांजेक्शन जैसे विभिन्न कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में साइंस बेस्ड नॉलेज इकोनॉमी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया के संकल्प को देश के सामने रखा था, जो आज पूरा होता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति सरकार की स्पष्ट नीति और नियत का उदाहरण है। भारत के गांव-गांव में डिजिटल क्रांति पहुंच गई है। दुनिया में सबसे अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहे हैं। आज देश की छोटी से छोटी दुकान में भी डिजिटल ट्रांजेक्शन का उपयोग हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कम्प्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार डिजिटल और नवाचार को निरंतर बढ़ावा दे रही है। विभिन्न सरकारी सेवाओं को ई-गवर्नेंस के अंतर्गत ऑनलाइन करके सरल बनाया गया है। ई-टूरिज्म के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी डाटा एनालिटिक्स और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक श्री खजान दास, विधायक श्री उमेश शर्मा काऊ, श्री भगवान पाटिल, श्री कृष्ण कुमार सिंह, श्री अश्विनी कुमार एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

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मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के जनपदों से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण के संबंध में जिलाधिकारियों और जनपद के संबंधित अधिकारियों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी विभाग संबंधित जिलाधिकारियों के समन्वय से अपनी सभी विभागीय परिसंपत्तियों और एसेट्स का सितंबर माह के अंत तक जियो टैगिंग और जिओ फैंसिंग कराना सुनिश्चित करें।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को संबंधित डीएफओ और विभागों के साथ वन भूमि स्थानांतरण से संबंधित मामलों के निराकरण के लिए प्रत्येक माह समीक्षा बैठक करने के निर्देश दिए।

साथ ही विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भूमि की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक जनपद को पूर्व में लैंड बैंक बनाने के दिए गए निर्देशों का गंभीरता से अनुपालन करने के निर्देश दिए।
वन क्षेत्रों में डिग्रेडेड फॉरेस्ट लैंड का विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन विभाग को भूमि स्थानांतरण से संबंधित सभी प्रकरणों की SOP बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि पब्लिक ग्रीवांस पोर्टल पर सेवा के अधिकार से संबंधित ऐसी दूसरी सेवाओं को भी शामिल करें जिनकी समय सापेक्ष अधिक प्रासंगिकता है।

मुख्य सचिव ने सभी जनपदों को दो बेस्ट प्रैक्टिसेज (सफलता की कहानियों) का विवरण देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजन, बैठक, कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों के उपयोग से संबंधित पूर्व में जो निर्देश दिए गए हैं उनका सक्ति से अनुपालन सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी हरेला पर्व पर व्यापक वृक्षारोपण के लिए सभी जिलाधिकारी संबंधित विभागों के समन्वय से तत्काल प्लांटेशन प्लान प्रस्तुत तैयार करें।

मुख्य सचिव ने क्लस्टर विद्यालयों के संबंध में शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि संबंधित जिला अधिकारी के समन्वय से ट्रांसपोर्टेशन प्लान बनाना सुनिश्चित करें। प्रथम चरण में जिन माध्यमिक विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालयों से जोड़ने का काम हो चुका है उनका उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रेषित करें जिससे अग्रिम चरण की वित्तीय धनराशि जारी की जा सके।

शिक्षा सचिव ने अवगत कराया कि पहले चरण में माध्यमिक विद्यालयों को क्लस्टर विद्यालय से जोड़ने का कार्य चल रहा है और शीघ्र ही प्राथमिक विद्यालयों को भी जोड़ने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

उन्होंने अवगत कराया कि 559 माध्यमिक विद्यालयों में से 68 क्लस्टर विद्यालय इस वित वर्ष संचालित हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत विभिन्न जनपदों से संबंधित पार्किंग के प्रकरणों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्किंग के लिए साइट का चयन पार्किंग की आवश्यकता के आधार पर करें ना की भूमि उपलब्धता की सुविधा के आधार पर। उन्होंने कहा कि जहां पार्किंग की डिमांड होती है वहां पर ही पार्किंग बनाई जानी चाहिए। उन्होंने निर्देशित किया कि जिन जनपदों से पार्किंग निर्माण से संबंधित प्रस्ताव अभी तक अप्राप्त हैं वे तत्काल प्रस्ताव तैयार करके प्रेषित करें।

महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला और बच्चों से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन करें तथा इसके लिए नियमित बैठक करें तथा निगरानी तंत्र को भी मजबूत करें।

इस दौरान सचिव आईसीडीएस ने अवगत कराया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बाल विकास एवं महिला कल्याण से संबंधित संचालित की जा रही विभिन्न योजना और कार्यक्रमों का FRS (फेसियल रिकॉग्निशन सिस्टम) से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु व मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, रविनाथ रमन, सी रविशंकर, चंद्रेश कुमार यादव, विनोद कुमार सुमन वन विभाग से रंजन कुमार मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी सभागार में उपस्थित थे तथा आयुक्त गढ़वाल व कुमायूं और संबंधित जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में उपस्थित थे।

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मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की वित्तीय और भौतिक प्रगति का प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया।

प्रेजेंटेशन में अवगत कराया गया कि वर्तमान समय में PMGSY योजना का चौथा चरण गतिमान है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- 4 में 2645 गांव को आच्छादित करते हुए 9500 किलोमीटर की सड़क बनाने का लक्ष्य है। इसके प्रथम फेज में 1370 किलोमीटर की 212 सड़कों की डीपीआर का अनुमोदन किया गया है। जिन पर कार्य चल रहा है।

बताया कि विभाग द्वारा *इंस्पेक्ट टू परफेक्ट एप* डेवलप किया गया है जिससे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की *रियल टाइम मॉनिटरिंग* की जा रही है।

मुख्य सचिव ने PMGSY के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के कार्यों की गुणवत्ता बेहतर रखें तथा उसकी प्रगति भी तेजी से बढ़ाना सुनिश्चित करें।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि पिथौरागढ़ के दुर्गम क्षेत्र में कुछ गांव ऐसे हैं जहां पर इंटरनेट कनेक्टिविटी दी जानी है तथा उसके लिए सड़क की एप्रोच होना जरूरी है, उन्होंने रिमोट एरिया के सड़क से वंचित इन गांवों को भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए होमवर्क करने तथा इस संबंध में अग्रिम कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव राधिका झा, सी रवि शंकर व श्रीधर बाबू अद्यंकी, अपर सचिव अभिषेक रोहेला सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति बोर्ड बैठक

• बीकेटीसी 2025-26 हेतु 127 करोड़ के बजट का अनुमोदन।

देहरादून 9 जुलाई।श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बोर्ड औपचारिक बैठक अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी जी की अध्यक्षता में समिति के केनाल रोड कार्यालय सभागार में शुरु हुई ।भगवान श्री बदरीविशाल तथा भगवान श्री केदारनाथ की आरती के साथ बैठक की शुरुआत हुई।बैठक में सर्वप्रथम नवनियुक्त सदस्यों का परिचय हुआ साथ ही पदाधिकारियों तथा सदस्यों का स्वागत किया गया । देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप अब तक सफलतापूर्वक चल चारधाम यात्रा कुशल मार्गदर्शन हेतु प्रदेश सरकार तथा यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया गया।

बैठक का संचालन करते हुए बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल ने नवगठित बीकेटीसी की पहली बैठक में सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का स्वागत किया इसके बाद वित्त अधिकारी मनीष कुमार उप्रेती ने बजट मंदिर समिति बोर्ड के समक्ष रखा बैठक में चर्चा के बाद मंदिर समिति के वर्ष 2025-26 के बजट का अनुमोदन किया गया।‌

श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि श्री बदरीनाथ धाम तथा श्री केदारनाथ धाम हेतु कुल 1,270999070 (एक सौ सत्ताईस करोड़ नौ लाख निन्यानबे हजार सत्तर) रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
श्री बदरीनाथ धाम हेड 64,2227070 (चौसठ करोड़ बाईस लाख सत्ताईस हजार सत्तर रुपये) का बजट प्रावधान किया गया है. इसे प्रस्तावित आय माना गया है।
श्री केदारनाथ धाम हेड 628770000 (बासठ करोड़ सत्तासी लाख सत्तर हजार रुपये बजट प्राव‌धान किया है। यह बजट में प्रस्तावित आय है। आय के सापेक्ष श्री केदारनाथ धाम हेतु 409337000 चालीस करोड़ तिरानबे लाख सैंतीस हजार रुपये व्यय दिखाया गया है इसी तरह श्री बदरीनाथ धाम हेतु प्रस्तावित आय के सापेक्ष 568683320 ( छप्पन करोड़ छियासी लाख तिरासी हजार तीन सौ बीस रुपये व्यय दिखाया गया है।

बताया कि श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम में 8 जुलाई 2025 तक 2478963 (चौबीस लाख अठहत्तर हजार नौ सौ तिरसठ तीर्थ यात्रियों ने दर्शन कर लिये है। जिनमें से श्री बदरीनाथ धाम में 1137628 (बारह लाख सैतीस हजार छ सौ अठाइस श्रद्धालुओं ने दर्शन किये है तथा श्री केदारनाथ धाम में 1341335 (तेरह लाख इकतालीस हजार तीन सौ पैंतीस तीर्थ यात्रियों ने दर्शन किये हैं।
श्री बदरीनाथ धाम हेतु अभी तक 1432983 पजीकरण हुए है तथा श्री केदारनाथ धाम हेतु 1549930 तीर्थ यानियों ने पंजीकरण करवाया है। चारों धामों में यात्रा सुचारु है तथा मानसून के मौसम में यात्रा सतत चल रही है। बैठक में सभी पदाधिकारियो, दोनों उपाध्यक्षों सहित सभी सदस्यगणों ने बैठक चर्चा प्रतिभाग किया।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने अवगत कराया कि बैठक की समाप्ति से पहले केदारनाथ हैली दुर्घटना में दिवंगत हुए मंदिर समिति कर्मचारी विक्रम रावत सहित यात्राकाल के दौरान दुर्घटनाओं में दिवंगत हुए तीर्थयात्रियों के प्रति शोक संवेदना स्वरूप दो मिनट का मौन रखा गया।

 

बैठक में उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण, सदस्यगण क्रमशः श्रीनिवास पोस्ती, महेंद्र शर्मा,धीरज पंचभैया मोनू, देवी प्रसाद देवली, राजपाल जड़धारी, प्रह्लाद पुष्पवान, डा. विनीत पोस्ती, राजेंद्र प्रसाद डिमरी,नीलम पुरी,दिनेश डोभाल सहित प्रभारी अधिकारी बदरीनाथ विपिन तिवारी, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल, निजी सचिव प्रमोद नौटियाल, अतुल डिमरी, विश्वनाथ, संजय भट्ट आदि मौजूद रहे।