क्वानू–मीनस मोटर मार्ग दुर्घटना में घायल यात्रियों का हाल पूछने दून अस्पताल पहुँचे मुख्यमंत्री धामी*
*घायलों का हालचाल जाना, पारिवारिक जनों से बातचीत कर इलाज का पूरा भरोसा दिया*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कालसी क्षेत्र अंतर्गत क्वानू–मीनस मोटर मार्ग पर हिमाचल परिवहन निगम की बस दुर्घटना में घायल हुए हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के यात्रियों का हाल-चाल जानने के लिए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया।
मुख्यमंत्री ने दुर्घटना में दिवंगत हुए लोगों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती घायलों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा चिकित्सकों से उपचार की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने चिकित्सकीय टीम को सभी घायलों को सर्वोत्तम एवं त्वरित उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने घायलों के परिजनों से भी बातचीत कर उन्हें विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार द्वारा उपचार में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी तथा सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विकासनगर के उप जिला चिकित्साधिकारी से दूरभाष पर विकासनगर में उपचाराधीन दुर्घटना के घायलों को भी समुचित एवं संवेदनशील चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश सरकार को भी आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में उपचाराधीन हिमाचल के सभी घायल यात्रियों का समुचित एवं निःशुल्क उपचार राज्य सरकार द्वारा सुनिश्चित किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में कौशल विकास व फॉरवर्ड लिंकेज पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

*युवाओं को मांग आधारित कौशल, सुनिश्चित रोजगार और बेहतर वेतन दिलाने पर जोर*
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में कौशल विकास के अंतर्गत अब तक की कार्य प्रगति तथा स्किल प्राप्त युवाओं को फॉरवर्ड लिंकेज से जोड़ने के संबंध में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
*आईटीआई संस्थानों और स्किल प्राप्त युवाओं की वृद्धि के बावजूद रोजगार गैप पर गंभीर मंथन*
बैठक में इस तथ्य पर गहन चर्चा हुई कि राज्य में आईटीआई व तकनीकी संस्थानों तथा प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद उद्योगों में उनकी प्लेसमेंट और संतोषजनक वेतन क्यों नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रबंधन, समन्वय और प्लेटफार्म स्तर पर कमी का संकेत बताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
*बेरोजगारी बनाम कुशल श्रमिकों की कमी, समन्वय की जरूरत*
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर नाई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री, कारपेंटर जैसे दैनिक कार्यों के लिए कुशल श्रमिक आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते, वहीं दूसरी ओर अनेक युवा जो आईटीआई से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं वे रोजगार की आकांक्षा में रहते हैं। उन्होंने तकनीकी, शिक्षा, कौशल और अन्य संबंधित विभागों के बेहतर समन्वय से इस विरोधाभास को दूर करने के निर्देश दिए।
*स्मार्ट मानव संसाधन पर फोकस, उद्योग मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम*
बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि केवल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि स्मार्ट मानव संसाधन तैयार करना प्राथमिकता होगी। उद्योगों और भविष्य की तकनीकी मांग के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित ट्रेनर-शिक्षक और आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड करने पर जोर देने को कहा।
*तीन स्तर की वर्कफोर्स और स्थानीय रोजगार मॉडल*
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्थानीय स्तर पर दैनिक कार्यों के लिए बेसिक स्किल वर्कर, मीडियम तकनीक की वर्कफोर्स और उच्च कुशल तकनीकी वर्कफोर्स तैयार करने का समेकित मॉडल विकसित किया जाए, जिससे विकसित भारत @2047 की आकांक्षा को साकार करने को बल मिले।
*ट्रेनिंग के साथ रोजगार सुनिश्चित, पाठ्यक्रमों की हो सतत समीक्षा*
निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण के लिए चयन होते ही युवाओं को रोजगार प्रदाता संस्थानों से टैग किया जाए, ताकि ट्रेनिंग के दौरान ही जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित हो। तकनीकी पाठ्यक्रमों को समयानुसार रिवाइज करने तथा 6 माह, मध्य अवधि और दीर्घकालिक तीनों स्तरों पर आउटकम सुनिश्चित करने पर बल दिया जाय।
*विदेशों में रोजगार, पारदर्शी भर्ती और न्यायिक प्रकरणों पर निर्देश*
विदेशों में स्वरोजगार/रोजगार के अवसरों के लिए चयनित किए जाने वाले युवाओं को भारत सरकार की विभिन्न देशों के अनुरूप प्रबंधन के संबंध में गाइडलाइंस साझा की जाए। ताकि उनको संबंधित देश में अपने आपको अनुकूलित करने में अधिक आसानी हो।
सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा न्यायालय में लंबित प्रकरणों के प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए, ताकि भर्ती परिणाम अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
*उद्योग सहभागिता और एकीकृत प्लेटफार्म पर जोर*
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उद्योगों को प्रशिक्षण में भागीदार बनाने का सुझाव दिया, जिससे मांग आधारित कौशल विकसित हों। उन्होंने बताया कि यदि उद्योग भी प्रशिक्षण और तकनीकी पाठ्यक्रम के निर्धारण में शामिल होंगे तो वे उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को स्किल्ड कर पाएंगे। इससे युवाओं को जॉब पाने के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने सभी संबंधित विभागों को एक प्लेटफार्म पर आकर रोजगार व कौशल से जुड़े कार्यों को गति देने के निर्देश दिए।
सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग सी. रविशंकर ने विभागीय प्रयासों, स्थानीय से ओवरसीज प्लेसमेंट तक की रणनीति और बेहतर प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, रंजीत सिन्हा, रविनाथ रामन, विनय शंकर पांडेय, दीपेंद्र चौधरी, डी एस गब्रियाल, हॉफ वन विभाग रंजन मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
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LIVE: केंद्रीय बजट 2026 – 27 के संबंध में हल्द्वानी में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस*
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देहरादून,
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को देहरादून के हर्रावला में नवनिर्मित शकुंतला रानी सरदारी लाल ओबेरॉय राजकीय मैटरनिटी एवं कैंसर चिकित्सालय का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने नवनिर्मित भवन के विषय में विस्तार से जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि इस अस्पताल को राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशलिटी कैंसर अस्पताल के रूप में स्थापित किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, साथ ही इसे बेहतर तरीके से संचालित किए जाने के हर संभव प्रयास किए जाएँगे। उन्होंने भवन में सभी प्रकार के परीक्षण और मेडिकल सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराये जाने की भी बात भी कही।
मुख्य सचिव ने इस अस्पताल के आसपास डॉक्टर्स और स्टाफ के आवासीय भवनों के लिए भूमि तलाशने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने महानिदेशक स्वास्थ्य से मशीनों और उपकरणों की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभाग की योजना साझा किए जाने की भी बात कही।
इस अवसर पर महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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मनसा देवी की भूस्खलन प्रभावित पहाड़ियों का अध्ययन

*देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण*
*भविष्य में उठाए जाने वाले उपायों पर हुई चर्चा*
देहरादून। उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा हिंदू कुश-हिमालय क्षेत्र में आपदा-सक्षम विकास विषय पर आयोजित किए जा रहे पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत देश-विदेश के भूवैज्ञानिकों ने बुधवार को फील्ड विजिट कार्यक्रम के तहत
हरिद्वार स्थित मानसा देवी की पहाड़ियों के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का अध्ययन किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 02 फरवरी से 06 फरवरी 2026 तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण एवं वित्तीय प्रशासन अनुसंधान संस्थान, सुद्धोवाला, देहरादून में उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, विश्व बैंक तथा नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टिट्यूट के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
प्रतिभागियों द्वारा मानसा देवी क्षेत्र में भूस्खलन के उपचार और जोखिम न्यूनीकरण को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने वर्तमान में जारी ढाल स्थिरीकरण, भू-अन्वेषण, ड्रिलिंग तथा अन्य तकनीकी कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और इन कार्यों की प्रगति एवं प्रभावशीलता को समझा। विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाओं में यह बताया गया कि किस प्रकार मौजूदा उपचारात्मक कार्य भूस्खलन के खतरे को कम करने में सहायक हैं तथा आगे किन अतिरिक्त उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक एवं स्थल-विशिष्ट उपचार रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर मनसा देवी की पहाड़ियों के भूस्खलन क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना, ढाल स्थिरता की वर्तमान स्थिति, भूमि उपयोग पैटर्न, जल निकासी व्यवस्था, प्राकृतिक एवं मानवीय प्रेरक कारकों तथा मौजूदा ढाल स्थिरीकरण एवं सुरक्षा उपायों का गहन अवलोकन किया गया। विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाओं में यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार के स्थल-विशिष्ट क्षेत्रीय अध्ययन किस प्रकार प्रभावी भूस्खलन न्यूनीकरण उपायों, जैसे ढाल स्थिरीकरण कार्य, जल निकासी सुधार, निगरानी एवं चेतावनी प्रणालियों तथा दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण रणनीति की योजना एवं डिजाइन में सहायक होते हैं।
नेपाल एवं भूटान से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने भूस्खलन जोखिम प्रबंधन में बहु-एजेंसी एवं अंतर-देशीय सहयोग के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। यह भी स्पष्ट किया गया कि भूस्खलन शमन उपायों की प्रभावी योजना, डिजाइन एवं क्रियान्वयन के लिए एकीकृत, समन्वित एवं बहु-विभागीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।
इस एक सप्ताह-व्यापी अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत, नेपाल एवं भूटान से आए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भूस्खलन जोखिम आकलन, जोखिम न्यूनीकरण योजना निर्माण तथा आपदा प्रतिरोधकता को सुदृढ़ करने हेतु क्षेत्रीय एवं संस्थागत क्षमता का विकास करना है। प्रशिक्षण में सैद्धांतिक तकनीकी सत्रों के साथ-साथ व्यावहारिक फील्ड एक्सपोजर को भी सम्मिलित किया गया है, ताकि प्रतिभागियों को भूस्खलन प्रक्रियाओं एवं प्रबंधन रणनीतियों की समग्र एवं व्यवहारिक समझ विकसित हो सके।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि भ्रमण से प्राप्त निष्कर्ष एवं सीख भविष्य में भूस्खलन जोखिम को कम करने, प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने तथा संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी रणनीतियों के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, श्री हाकोन हेयर्डाल, डॉ. जीन-सेबास्टियन लह्यूरू, सुश्री हाइडी हेफ्रे, डॉ. माल्टे फोगे, डॉ. स्पर्शा नागुला तथा डॉ. डोमिनिक लैंग आदि देसी-विदेशी वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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LIVE: नैनीताल में निर्माणाधीन जमरानी बांध परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण*
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण*

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा क्षेत्रवासियों की दशकों पुरानी मांग को स्वीकृति देकर दी गई ऐतिहासिक सौगात*

*परियोजना को निर्धारित समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के दिए निर्देश*
*उत्तराखण्ड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा परियोजना का सीधा लाभ*

*जमरानी बांध सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा – मुख्यमंत्री*
*रोजगार, पर्यटन और समग्र क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद भ्रमण के दौरान गोला नदी पर सिंचाई एवं पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से निर्माणाधीन जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने परियोजना स्थल पर उपस्थित अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों से निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री ने परियोजना की समयबद्धता, गुणवत्ता एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि समस्त निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर, उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किए जाएं। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत चल रहे अन्य निर्माण कार्यों की भी विस्तार से जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निरंतर संवाद के माध्यम से पर्यावरणीय एवं तकनीकी बाधाओं का समाधान किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी ने क्षेत्रवासियों की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए जमरानी बांध परियोजना को स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने वाले स्थानीय निवासियों एवं जनप्रतिनिधियों का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्यमंत्री ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाओं को कागजों तक सीमित न रखते हुए धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार शब्दों में नहीं, कार्यों में विश्वास करती है। जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अड़चन या धनराशि की कमी को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। राज्य में कोई भी जनकल्याणकारी योजना अधूरी नहीं रहेगी, सभी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध परियोजना राज्य की समृद्धि का प्रतीक है। यह परियोजना उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध होगी। बांध के निर्माण से जहां एक ओर सिंचाई एवं पेयजल की सुविधा सुदृढ़ होगी, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग के अनुरूप परियोजना से विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर केन्द्र सरकार से वार्ता की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से कुमाऊं के तराई क्षेत्र के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के किसानों एवं क्षेत्रवासियों को भी प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक श्री महेश खरे ने जानकारी दी कि परियोजना के अंतर्गत निर्मित की जा रही दो टनलों का कार्य लगभग 88 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। नदी के जल प्रवाह के डायवर्जन हेतु कॉफर डैम का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि जून 2026 तक टनल निर्माण एवं कृत्रिम डैम का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, जिसके पश्चात आगामी मानसून के दौरान नदी का जल टनलों के माध्यम से डायवर्ट किया जाएगा। इसके उपरांत स्थायी बांध के निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अवगत कराया कि परियोजना का संपूर्ण निर्माण कार्य जून 2029 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस अवसर पर विधायक कालाढुंगी श्री बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपा दर्मवाल, दर्जा राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, श्री दिनेश आर्य, श्री नवीन वर्मा, श्री दीपक मेहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री प्रताप बिष्ट, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र बिष्ट, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, श्री के.डी. रूबाली, मण्डलायुक्त श्री दीपक रावत, जिलाधिकारी श्री ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, क्षेत्रीय नागरिक एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान बना सुशासन का सशक्त मॉडल*

*“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान से 5.62 लाख से अधिक लोगों को मिला सीधा लाभ*
*मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में 562 शिविरों के माध्यम से 2.45 लाख से अधिक नागरिक हुए लाभान्वित*
*शिकायत निस्तारण से लेकर प्रमाण-पत्र वितरण तक, शासन-प्रशासन पहुँचा जनता के द्वार*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी सोच के परिणामस्वरूप प्रदेशभर में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम ने जनसेवा, पारदर्शिता और त्वरित समाधान का एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अभिनव अभियान के माध्यम से शासन को सीधे जनता तक पहुँचाने का संकल्प धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों में आयोजित 562 जनसेवा शिविरों के माध्यम से अब तक 4,42,301 नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है। इन शिविरों में आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनते हुए त्वरित समाधान किया गया, जिससे शासन-प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 43,507 शिकायतें एवं आवेदन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 29,363 शिकायतों का मौके पर अथवा समयबद्ध रूप से निस्तारण किया गया। यह आंकड़े सरकार की जवाबदेही, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
इसके साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा 82,234 प्रमाण-पत्रों (जैसे आय, जाति, निवास आदि) के लिए आवेदन प्राप्त किए गए, जिन पर तेजी से कार्रवाई की गई। वहीं, सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से 2,45,073 से अधिक व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया, जिससे समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हुआ।
केवल 4 फरवरी 2026 को ही प्रदेश में 7 शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 5,910 नागरिकों ने सहभागिता की। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार निरंतर सक्रियता के साथ जनसेवा में लगी हुई है।
यह अभियान न केवल शिकायत निस्तारण का माध्यम बना है, बल्कि यह आमजन के लिए शासन से संवाद का एक सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप अधिकारी स्वयं गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनता की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, जिससे सुशासन, पारदर्शिता और विश्वास की त्रिवेणी स्थापित हो रही है।
यह भी जाने *मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी* ने कहा

“ *‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति हमारी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हमारी सरकार का संकल्प है कि शासन की प्रत्येक योजना और सेवा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। हम कागजों पर नहीं, धरातल पर काम करने में विश्वास रखते हैं। जब तक प्रदेश का हर नागरिक संतुष्ट और सशक्त नहीं होगा, तब तक हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।”
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केन्द्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सशक्त रोडमैप : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी*

*बजट वर्तमान की आवश्यकताओं से आगे बढ़कर भविष्य के भारत की मजबूत व टिकाऊ आधारशिला*
*पर्यटन, विनिर्माण, आयुष, ग्रीन एनर्जी, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना को मिलेगा नया विस्तार*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दो दिवसीय नैनीताल भ्रमण के दौरान बुधवार को हल्द्वानी रामपुर रोड स्थित होटल अमरदीप में आयोजित प्रेस वार्ता में केन्द्रीय बजट 2026-27 को विकसित भारत-2047 और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वर्तमान की आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों के लिए देश की आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक नींव को मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में पूंजीगत व्यय में की गई उल्लेखनीय वृद्धि से दीर्घकालिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी गई है। उन्होंने कहा कि यह बजट आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ देश की रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता को भी सुदृढ़ करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सरकार के लिए विकास केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव का माध्यम है। यह बजट मध्यम वर्ग, करदाताओं और श्रमिकों के लिए राहत और सम्मान का प्रतीक है। नवाचार, विनिर्माण और रोजगार को केंद्र में रखकर तैयार किया गया यह बजट देश की उत्पादकता क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा, जो दीर्घकालीन आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शक्ति मानती है। सात नए आर्थिक कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स ढांचे का विस्तार निवेश, उद्योग और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूती देगा। वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग, दिल्ली-वाराणसी एवं वाराणसी-सिलीगुड़ी उच्च-गति रेल कॉरिडोर न केवल कनेक्टिविटी परियोजनाएं हैं, बल्कि ये व्यापार, पर्यटन, रोजगार और राष्ट्रीय एकता के नए द्वार खोलने वाले कदम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से उत्तराखंड के समावेशी विकास को सीधा लाभ मिलेगा। पर्वतीय, सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के लिए केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा ₹17,414.57 करोड़ निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश को इस वर्ष ₹1,841.16 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट’ के विस्तार का जो अनुरोध किया गया था, उसे इस बजट में न केवल स्वीकार किया गया है, बल्कि इसके प्रावधान भी बढ़ाए गए हैं। यह राशि संशोधित अनुमान ₹1,44,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,85,000 करोड़ कर दी गई है, जो ₹41,000 करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की व्यवस्था की गई है, जिससे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। रेलवे क्षेत्र में उत्तराखंड को ₹4,769 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो 2009-2014 की तुलना में 26 गुना अधिक है। राज्य में ₹39,491 करोड़ की रेल परियोजनाएं प्रगति पर हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अंतिम चरण की ओर अग्रसर है। 11 रेलवे स्टेशन अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित किए जा रहे हैं, 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, 54 कवच सिस्टम और 106 फ्लाईओवर/अंडरपास के साथ-साथ 3 वंदे भारत और एक अमृत भारत एक्सप्रेस से राज्य की कनेक्टिविटी सुदृढ़ हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को बजट में विशेष प्रोत्साहन मिला है, जिससे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास के लिए हरित ऊर्जा और ग्रीन इकोनॉमी पर विशेष बल दिया गया है, जिससे उत्तराखंड को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा। आयुष, फार्मा, खादी, हथकरघा तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बजट अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक जनपद में महिला छात्रावासों की व्यवस्था से महिला सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘विश्वास आधारित शासन’ से निवेश, रोजगार और जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 किसानों को सशक्त करता है, युवाओं को अवसर देता है, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है, पर्वतीय राज्यों को नई पहचान देता है और देश को आत्मनिर्भरता से विकसित राष्ट्र की ओर मजबूती से आगे ले जाता है। बजट के तीन प्रमुख स्तंभ—संतुलित एवं समावेशी विकास, वंचित वर्गों का क्षमता निर्माण और सबका साथ-सबका विकास—सीमांत क्षेत्रों, गांवों, महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों के समग्र उत्थान का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त करते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास से उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहरों को विशेष लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है तथा राज्य सरकार द्वारा केंद्र को दिए गए प्रस्तावों को बजट में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित किया गया है, जो सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण है।
अंत में मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि केन्द्रीय बजट 2026-27 उत्तराखंड को रोजगार, निवेश, निर्यात, कौशल विकास और शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला सिद्ध होगा और राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास में मील का पत्थर बनेगा।
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हल्द्वानी 4 फरवरी 2026
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा के हल्द्वानी स्थित जज फार्म आवास पर पहुंचकर उनकी दिवंगत माताजी स्व. रेवती देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही शोकाकुल परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।
https://x.com/i/status/2019084097495453764
