Jiitmani Painyuli editor pahadon ki goonj ने सोशल मीडिया को बढ़ावा दिलाने से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है जानिए सभी समाचार

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सोशल मीडिया पर महिला की छवि धूमिल करने का कर रहा था प्रयास,आरोपी गिरफ्तार
बागेश्वर। सोशल मीडिया पर महिला के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने वाले एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से महिला की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा था।
जानकारी के अनुसार बीती 30 जुलाई को पीड़िता द्वारा थाना कपकोट में तहरीर देकर बताया गया था कि एक व्यक्ति जिसका नाम जगदीश गोस्वामी है उसके द्वारा पीड़िता को बदनाम करने की नीयत से चरित्र पर लांछन लगाते हुए सोशल मीडिया साइड पर वीडियो अपलोड कर दिया गया है।
वहीं दो अगस्त को धर्मेन्द्र सिंह दानू पुत्र दिवान सिंह द्वारा एक प्रार्थना पत्र पुलिस को दिया गया। जिसमें आरोप लगाया गया कि जगदीश गोस्वामी द्वारा विधायक को बदनाम करने व उनकी छवि को धूमिल करने की नियत से सोशल मीडिया में गाली गलौच कर भ्रामक वीडियो प्रसारित किया गया है। पुलिस ने दोनो मामलों में मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। मुकदमा दर्ज होने के उपरांत आरोपी लगातार फरार चल रहा था जिसके घर तथा सम्भावित स्थानो पर दबिश दी गयी घर पर न मिलने पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वांरट प्राप्त किये साथ ही आरोपी के निवास स्थान पर नियमानुसार मुनादी करायी गयी। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस टीम द्वारा उसके मोबाइल नम्बर की लोकेशन के आधार पर रानीखेत, रामनगर ,बिजनौर, हरिद्वार, सहारनपुर एव देहरादून इत्यादि क्षेत्रो में पीछा करते हुए आरोपी के सम्भावित ठहरने के स्थानो पर दबिश दी गयी । जिसके चलते पुलिस व एसओजी टीम द्वारा आरोपी को थाना बैजनाथ क्षेत्रान्तर्गत पिंगलौ बैण्ड कन्धार तिराहा यात्री विश्राम गृह के सामने से गिरफ्तार किया गया है। जिसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
आगे पढ़ेंप्रदेश के 17 राजनीतिक दलों पर गिरी गाज, राजनीति की कागजी पार्टियां सक्रिय सूची से बाहरदेहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक खबर आई है। खबर छोटी लग सकती है, लेकिन उसके भीतर लोकतंत्र का एक बड़ा सवाल छिपा हुआ है। भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तराखंड के 17 पंजीकृत राजनीतिक दलों को अपनी सक्रिय सूची से हटा दिया है। अब यह दल आगामी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, जब तक वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोबारा मान्यता या पंजीकरण हासिल न कर लें। पहली नजर में लगेगा कि इससे क्या फर्क पड़ता है? चुनाव तो भाजपा और कांग्रेस ही लड़ती हैं। लेकिन जरा ठहरिए। सवाल केवल 17 दलों का नहीं है, सवाल यह है कि हमारे लोकतंत्र में राजनीतिक दल बनाना कितना आसान और उसे जीवित रखना कितना कठिन है। उत्तराखंड में पिछले दो दशकों में दर्जनों राजनीतिक दल बने। किसी ने पर्वतीय अस्मिता के नाम पर पार्टी बनाई, किसी ने पलायन के मुद्दे पर, किसी ने रोजगार के लिए और किसी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ। चुनाव आए, पोस्टर लगे, प्रेस कान्फ्रेंस हुई, सोशल मीडिया पर क्रांति भी हुई। लेकिन चुनाव खत्म होते ही अधिकांश दल भी मानो राजनीतिक स्मृति से गायब हो गए।
निर्वाचन आयोग का यह कदम बताता है कि केवल पार्टी का नाम रख लेने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सक्रिय संगठन, नियमित राजनीतिक गतिविधियां, कानूनी अनुपालन और जनता के बीच निरंतर उपस्थिति भी जरूरी होती है। लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष भी है। क्या यह केवल 17 दलों की विफलता है? या फिर यह उस राजनीतिक व्यवस्था की भी विफलता है जिसमें छोटे दलों के लिए जगह लगातार सिकुड़ती जा रही है? आज चुनाव लड़ना विचारों से ज्यादा संसाधनों का खेल बनता जा रहा है। बड़े दलों के पास करोड़ों का प्रचार, डिजिटल अभियान, विशाल संगठन और संसाधन हैं। दूसरी ओर, छोटे दल चुनाव आयोग के नियमों, वित्तीय रिपोर्टिंग, संगठनात्मक ढांचे और आर्थिक चुनौतियों के बीच दम तोड़ देते हैं। ऐसे में लोकतंत्र का मैदान बराबरी का नहीं रह जाता।
उत्तराखंड जैसे राज्य में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह वही प्रदेश है जिसकी नींव जनआंदोलनों पर पड़ी थी। अलग राज्य की मांग किसी एक बड़ी पार्टी ने नहीं, बल्कि छोटे संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और हजारों आम लोगों ने मिलकर उठाई थी। अगर छोटे राजनीतिक विकल्प धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे, तो क्या भविष्य में नए विचारों को राजनीति में जगह मिल पाएगी? हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं कि केवल नाम के लिए राजनीतिक दल बने रहें। यदि कोई पार्टी वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ती, अपना लेखा-जोखा जमा नहीं करती, संगठन नहीं चलाती और केवल कागजों पर मौजूद रहती है, तो निर्वाचन आयोग की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा मानी जाएगी। चुनाव आयोग का दायित्व केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि राजनीतिक व्यवस्था को पारदर्शी और नियमबद्ध बनाए रखना भी है। अब सवाल उत्तराखंड की राजनीति का है।
2027 का विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे करीब आ रहा है। भाजपा सत्ता बचाने की तैयारी में है। कांग्रेस वापसी का सपना देख रही है। क्षेत्रीय दल अपनी प्रासंगिकता साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में 17 दलों का बाहर होना चुनावी गणित को भले बहुत बड़ा झटका न दे, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि आने वाले समय में चुनावी मुकाबला और अधिक सीमित हो सकता है। लोकतंत्र की खूबसूरती विकल्पों में होती है। विकल्प खत्म होने लगें, तो चुनाव तो होते हैं, लेकिन राजनीतिक विविधता कमजोर पड़ जाती है। इसलिए यह खबर केवल इतनी नहीं है कि 17 दल सूची से हट गए। असली खबर यह है कि उत्तराखंड की राजनीति में विचारों की जमीन कितनी बची है? क्या नए राजनीतिक प्रयोगों के लिए जगह है? क्या छोटे दल संगठन और जवाबदेही के साथ खुद को खड़ा कर पाएंगे? या फिर राजनीति कुछ बड़े दलों के बीच ही सिमटती चली जाएगी?
लोकतंत्र में चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं होता। लोकतंत्र का स्वास्थ्य इस बात से भी तय होता है कि कितनी आवाजें मैदान में हैं, कितने विचार जनता तक पहुंच रहे हैं और कितने राजनीतिक दल केवल चुनाव नहीं, समाज के सवालों को भी जिंदा रखे हुए हैं। सवाल 17 दलों के हटने का नहीं है। सवाल यह है कि उत्तराखंड की राजनीति में अगला नया विकल्प कौन बनेगा या फिर विकल्प बचेंगे भी या नहीं।
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अवैध खनन के दौरान हुए हादसे में ट्रैक्टर चालक की मौत

उग्र भीड़ं ने शव सड़क पर रखकर किया प्रदर्शन

देहरादून। राजधानी देहरादून में हो रहे अवैध खनन के चलते एक ट्रैक्टर चालक की मौत हो गयी। जिस पर गुस्साये परिजनों व स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के साथ ही मुआवजा देने की मांग की।
मामला देहरादून के सेलाकुई थाना क्षेत्र के भाऊवाला का है, जहां अवैध खनन के दौरान हुए हादसे में एक ट्रैक्टर चालक की मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की।
जानकारी के अनुसार, बिहार के समस्तीपुर निवासी रूपन सिंह ट्रैक्टरकृट्रॉली चला रहे थे। इसी दौरान वन सुरक्षा दल ने उन्हें कथित रूप से अवैध खनन करते हुए देखा और उनका पीछा शुरू कर दिया। पीछा किए जाने के दौरान रूपन सिंह ट्रैक्टरकृट्रॉली के पहिए की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर फैलते ही मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भाऊवाला पुल के पास एकत्र हो गए। उन्होंने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और मृतक के आश्रितों को उचित आर्थिक सहायता व मुआवजा देने की मांग की। वहीं प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को शांत कराने का प्रयास करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।
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सिर्फ पांच हजार की चोरी के संदेह में दोस्त ने ही की थी दोस्त की हत्या
उधमसिंहनगर। निर्माणाधीन भवन के पास छह दिन पूर्व हुई हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस ने हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है। जिसकी निशानदेही पर हत्या की घटना में प्रयुक्त रस्सी व व ईंट बरामद की गयी है। हत्या की यह वारदात मृतक के साथी द्वारा ही अंजाम दी गयी थी जिसने पांच हजार चोरी के संदेह में हुई रंजिश के चलते इस घटना को अंजाम दिया था।
जानकारी के अनुसार बीती 31 जुलाई को थाना ट्रांजिट कैंप क्षेत्रान्तर्गत शिवनगर स्थित एक निर्माणाधीन मकान के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ, जिसके सिर एवं चेहरे पर चोटों के निशान पाए गए। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। जांच के दौरान मृतक की पहचान अनिल कुमार पुत्र स्वर्गीय सुभाष चंद्र, निवासी शिव मंदिर के पास ठाकुर नगर, थाना ट्रांजिट कैंप जिला उ. सिं. नगर के रूप में की गई। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि मृतक की मृत्यु गला दबाकर हत्या किए जाने के कारण हुई है। जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन मृतक ने अपने तीन साथियों के साथ आजादनगर ट्रांजिट कैम्प में शराब पी तथा उसके बाद उसके 2 दोस्त रोहित राजपूत पुत्र अजीत राजपूत निवासी शिवनगर ट्रांजिट कैम्प ओर विजय पुत्र कैलाश चंद निवासी चामुंडा मंदिर के पास ट्रांजिट कैम्प शराब पीकर चले गए थे, ओर उसके बाद मृतक के करीबी मित्र सुनील कुमार उर्फ इक्का पुत्र भारत सिंह निवासी शिवनगर वार्ड न 2 ओम पब्लिक स्कूल के पास कोतवाली ट्राजिट कैम्प जिला उधम सिह नगर मूल पता ग्राम सिडौरा कोतवाली तहसील बिलारी जिला मुरादाबाद ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत उसे शिवनगर स्थित निर्माणाधीन मकान में ले जाकर शराब पिलाई तथा उसके बाद लकड़ी की फन्टी एवं ईंट से हमला किया। अंत में मौके पर उपलब्ध रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को संदेह था कि मृतक द्वारा उसके 5,000 चोरी कर लिए गए है, इसी रंजिश के चलते आरोपी ने हत्या की वारदात को अंजाम दिया । पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त रस्सी तथा ईंट का टुकड़ा भी बरामद कर कब्जे पुलिस में लिया गया है। बहरहाल पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
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धराली आपदा की पहली बरसी पर ग्रामीणों ने दी दिवंगतों को श्रद्धांजलि
उत्तरकाशी। 5 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा को आज एक साल पूरा हो गया है। इस आपदा में कई लोग असमय काल का ग्रास बन गए थे। जबकि कई लोग आज भी लापता है। इस विनाशलीला में में धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो गया था। इसके साथ ही हर्षिल में भी काफी नुकसान पहंुचा था।
वहीं बुधवार को आपदा की बरसी पर ग्रामीणों ने खीरगंगा में आए मलबे की चपेट में जान गंवाने वाले धराली गांव के आठ लोगों समेत कुल 70 मृतकों की आत्मा की शांति के लिए एक दिवसीय पाठ-पूजा का आयोजन किया। श्रद्धांजलि स्वरूप आपदा स्थल पर 101 पौधों का रोपण भी किया गया। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि हर साल पांच अगस्त को आपदा स्थल पर पौधरोपण कर दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस त्रासदी को याद रखें और प्रकृति संरक्षण का संदेश मिले। कार्यक्रम के दौरान पांच विद्वान पंडितों ने रुद्राष्टक, पितृ शांति पाठ और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना की। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों की आंखें उस भयावह मंजर को याद कर नम हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि, एक साल बीत जाने के बाद भी कई परिवार अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। उनके लिए समय जरूर आगे बढ़ गया है, लेकिन आपदा के जख्म आज भी उतने ही गहरे हैं।
इस आपदा ने कई परिवारों को बेघर कर दिया। अनेक लोगों के घर, होटल, दुकानें और वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई आजीविका पलभर में मलबे में समा गई। करीब 30 परिवार आज भी किराए के मकानों या रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि सरकारी सहायता मिली है, लेकिन स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया जल्द पूरी होना जरूरी है। ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें। प्रशासन के अनुसार, 21 परिवारों के पुनर्वास के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। 66 प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि 25 अन्य परिवारों के मामलों में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। आपदा के बाद धराली के लोग धीरे-धीरे खुद को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। सेब बागवानी और नकदी फसलों की खेती फिर से उनकी आजीविका का प्रमुख आधार बन रही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि, खीरगंगा के किनारे दोबारा होटल और बड़े व्यवसाय शुरू करना अभी भी जोखिम भरा है। उनका मानना है कि यदि नदी के किनारों पर मजबूत सुरक्षा कार्य किए जाएं तो खेती और बागवानी को सुरक्षित तरीके से फिर विकसित किया जा सकता है। गांव के युवाओं ने भी हार नहीं मानी है। कई युवतियां परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने के लिए ट्रेकिंग और पर्यटन से जुड़े स्वरोजगार की ओर बढ़ी हैं। जबकि जिन लोगों के होटल और दुकानें सुरक्षित बची थीं, वे उन्हें फिर से शुरू करने में जुटे हैं।
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कांवड़ मेला में नगर निगम का अपग्रेडेड ड्रोन कमांड सिस्टम

आसमान से निगरानी, जमीन पर तुरंत कार्रवाई

हरिद्वार। नगर आयुक्त, नंदन कुमार के निर्देशों के क्रम में नगर निगम हरिद्वार ने कांवड़ मेला-2025 में सफलतापूर्वक अपनाई गई ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को इस वर्ष कांवड़ मेला-2026 में और अधिक उन्नत एवं प्रभावी स्वरूप दिया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पूरे कांवड़ मार्ग पर प्रत्येक स्थान की लगातार मानवीय निगरानी करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे में नगर निगम ने आसमान से रियल-टाइम निगरानी को अपना सबसे प्रभावी हथियार बनाया है।
अब ड्रोन पूरे कांवड़ मार्ग पर लगातार उड़ान भरकर उन स्थानों की पहचान कर रहे हैं जहाँ सामान्य निरीक्षण दलों की नजर तुरंत नहीं पहुँच पाती। यदि कहीं भी झाड़ियों, डिवाइडरों, बैरिकेडिंग के पीछे अथवा भीड़ के बीच छिपा हुआ कूड़ा दिखाई देता है, तो ड्रोन टीम तत्काल उस स्थान का फोटोग्राफ एवं जियोटैग लोकेशन नगर निगम के विशेष व्हाट्सएप कमांड ग्रुप पर साझा करती है। इस कमांड ग्रुप में सभी संबंधित सफाई निरीक्षक, जोन प्रभारी एवं ड्रोन टीम के सदस्य जुड़े हुए हैं। फोटो अपलोड होते ही संबंधित सफाई निरीक्षक को टैग किया जाता है और तत्काल सफाई दल मौके पर भेजा जाता है। सफाई कार्य पूर्ण होने के बाद उसी स्थान की ट्टआफ्टर क्लीनिंग’ फोटो पुनः ग्रुप में साझा की जाती है, जिससे कंट्रोल रूम यह सुनिश्चित करता है कि शिकायत का वास्तविक एवं संतोषजनक निस्तारण हो चुका है। इससे पूरी व्यवस्था रियलकृटाइम, पारदर्शी एवं जवाबदेह बन गई है।
ड्रोन तकनीक का उपयोग केवल गंदगी की पहचान तक सीमित नहीं है। यदि कांवड़ मार्ग पर कहीं भी कोई पशु विचरण करता हुआ दिखाई देता है, तो ड्रोन टीम तत्काल उसकी सटीक लोकेशन साझा करती है। सूचना मिलते ही नगर निगम की संबंधित टीम मौके पर पहुँचकर आवश्यक कार्रवाई करती है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके।
नगर आयुक्त नंदन कुमार ने कहा कि नगर निगम हरिद्वार का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से स्वच्छता प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है।
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मुख्य सचिव ने अंडरग्राउंड विद्युत लाइन परियोजनता का प्रस्ताव तैयार करने के दिये निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मसूरी एवं नैनीताल के लिए अंडरग्राउंड विद्युत लाइन परियोजना का प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं।
बुधवार को यहां मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने वाह्य सहायतित परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने इसके तहत् पूर्ण हो चुकी, गतिमान एवं भावी परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी ली एवं दिशा निर्देश दिए। उन्होंने वाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत प्रदेश में आधारभूत संरचनाओं के विकास पर फोकस किए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की क्लोजर रिपोर्ट फंडिंग एजेंसी, आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय भारत सरकार एवं भारत सरकार में अपने लाइन डिपार्टमेंट को अनिवार्य रूप से प्रेषित किया जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि धीमी गति से चल रहे सभी प्रोजेक्ट्स की लगातार निगरानी करते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उन्होंने प्रोजेक्ट्स को समय से पूर्ण किए जाने हेतु मैनपावर और मशीन बढ़ाते हुए सभी आवश्यक कदम उठाये जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मसूरी एवं नैनीताल के लिए अंडरग्राउंड विघुत लाइन परियोजना का प्रस्ताव तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट में तेजी लाए जाने के लिए डेडिकेटेड पीएमयू स्थापित किए जाने की बात कही। कहा कि डेडिकेटेड पीएमओ और लगातार निगरानी करते हुए प्रोजेक्ट को समय से पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने शिक्षा के क्षेत्र में विशेषकर तकनीकी शिक्षा में सिस्टम को मजबूत किए जाने की दिशा में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के में इंजीनियरिंग कॉलेज पॉलिटेक्निक और आईटीआई में आधारभूत संरचना विकास पर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा इसके लिए ईएपी वित्तपोषित प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएं, साथ ही रिवर रेज्युविनेशन, पशुपालन, डेरी और फिशरीज के उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया जाए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, रणजीत सिंह चैहान, विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव विनीत कुमार एवं हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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जौनपुर-रंवाई को एसटी दर्जा दिलाने की मुहिम तेज


देहरादून। जौनपुर-रवांई क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग अब नए सिरे से तेज होती दिख रही है। मसूरी नगर पालिका के टाउन हॉल में आयोजित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि जौनपुर-रवांई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाता है तो इसका लाभ पूरे क्षेत्र को मिलना चाहिए।
बैठक में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सीमित क्षेत्र को ही एसटी में शामिल कराने की कोशिश कर रहे हैं। जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जौनपुर और रंवाई की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान जौनसार-बावर से काफी हद तक मेल खाती है। रहन-सहन, खानपान, बोली, रीति-रिवाज और पारंपरिक जीवन शैली समान होने के बावजूद वर्ष 1967 में जौनसार-बावर को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल गया, जबकि जौनपुर और रंवाई इससे वंचित रह गए. वक्ताओं का कहना था कि यह मांग नई नहीं, बल्कि वर्ष 1952 से लगातार उठाई जाती रही है।
पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि हाल ही में रंवाई और बड़कोट क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे जाने की जानकारी मिलने के बाद सभी जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर बैठक बुलाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा यदि सरकार इस विषय पर विचार करती है तो जौनपुर और रंवाई के गोडर-खाड़र सहित पूरे क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए। किसी एक हिस्से को शामिल करने का प्रयास क्षेत्र की एकता और मूल उद्देश्य के खिलाफ होगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से भी बातचीत की जाएगी। जिनके कार्यकाल में जौनपुर-रंवाई को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल किया गया। साथ ही विषय के विशेषज्ञों और इतिहासकारों से भी राय ली जाएगी। जिससे सरकार के समक्ष तथ्यात्मक और मजबूत पक्ष रखा जा सके। उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले दिवंगत नेताओं दौलतराम रंवाल्टा, जोत सिंह रंवाल्टा, हुकम सिंह पंवार और सरदार सिंह के योगदान को भी याद किया।
जौनपुर प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रदीप कवि ने कहा जौनपुर-रंवाई की एसटी की मांग ऐतिहासिक और न्यायसंगत है। उन्होंने कहा आने वाले दिनों में क्षेत्र के सभी विधायकों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों को इस अभियान से जोड़ने के लिए अलग-अलग स्थानों पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। जिससे सरकार के समक्ष एकजुट होकर मांग रखी जा सके। जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह रावत ने कहा कि यह आंदोलन सात दशक से अधिक पुराना है। अब इसे निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की प्रक्रिया क्या है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने यह भी बताया कि किसी भी समुदाय या क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास नहीं होता। सामान्य प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजती है। इसके बाद भारत के रजिस्ट्रार जनरल और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की राय ली जाती है। दोनों संस्थाओं की सहमति के बाद केंद्र सरकार संसद में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में संशोधन संबंधी विधेयक लाती है। संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही किसी क्षेत्र या समुदाय को आधिकारिक रूप से अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलता है।
आगे पढ़ेंबर्थ सर्टिफिकेट के बदले नियम, देरी पर कोर्ट के लगाने पड़ेंगे चक्करदेहरादून। बच्चों के जन्म के बाद बर्थ सर्टिफिकेट (जन्म प्रमाणपत्र) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। जिसके जरिए तमाम डॉक्यूमेंट बनाने या फिर स्कूल में दाखिला दिलाने के दौरान इसकी जरूरत होती है। लेकिन वर्तमान में प्रदेश के अस्पतालों में बर्थ सर्टिफिकेट बनाने में काफी देरी देखी जा रही है। जबकि नियमानुसार, बच्चा पैदा होने के 7 दिन के भीतर बर्थ सर्टिफिकेट बनाना अनिवार्य है। हालांकि, समय के साथ ही इसमें तमाम बदलाव भी हुए। ऐसे में भारत सरकार के स्तर से भी बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले ही उत्तराखंड में बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले की संख्या में काफी अधिक इजाफा देखा जा रहा है।
जन्म प्रमाण पत्र किसी भी बच्चे के जन्म का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जिसके आधार पर ही आधार कार्ड से लेकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर स्कूल में दाखिला मिलता है। साल 2023 में भारत सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण एक्ट में संशोधन किया था। जिसके बाद जन्मतिथि का एकमात्र डॉक्यूमेंट जन्म प्रमाण पत्र बन गया है। जिसके बाद से जन्म प्रमाणपत्र का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यही नहीं, साल 2023 में संशोधन के साथ ही जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को ऑनलाइन के साथ ही नेशनल स्तर पर भी कर दिया है। वहीं, भारत सरकार ने एक बार फिर इस एक्ट में बड़ा संशोधन किया है। हालांकि, ये व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में 31 जुलाई 2026 को पारित हो गया है। जिसमें भारत सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी करने संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। वर्तमान समय में बच्चे के जन्म के बाद 21 दिन के भीतर अगर बर्थ सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं तो बेहद ही सरल प्रक्रिया से जन्म प्रमाण पत्र बन जाएगा।  ऐसे में भारत सरकार की ऑफिशल वेबसाइट सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है.लेकिन भारत सरकार के संशोधन के बाद अब जन्म प्रमाण पत्र बनाना और भी जटिल हो जाएगा. फिर एक से 2 साल की देरी की जाती है तो फिर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट/ एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अगर 2 साल से अधिक की देरी होती है तो जन्म प्रमाण पत्र, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही बन पाएगा। सरकार जन्म और मृत्यु के पंजीयन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है और ये विधेयक उसी के तहत लाया गया है. सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के साथ फर्जी दस्तावेजों पर लगाम लगाने की तैयारी में है। नया कानून लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र को दूसरे अहम सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं के लिए प्रमुख दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा। नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र भारतवासी के जीवन का सबसे जरूरी दस्तावेज बन जाएगा। इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद एक साल के भीतर जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा। उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में भी भारत सरकार की ओर से साल 2023 में किए गए संशोधन के बाद नई व्यवस्था लागू हो गई थी। जिसके तहत प्रदेश में भारत सरकार की सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए ही जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। लेकिन प्रदेश के खासकर सरकारी अस्पतालों में कई बार जन्म प्रमाण पत्र समय पर न जारी होने के मामले सामने आ चुके हैं। जिस कारण अभिभावकों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार तकनीकी खामियों या फिर अत्यधिक कामों की व्यवस्था के चलते सर्टिफिकेट जारी करने में देरी हो जाती है, लेकिन विभाग की कोशिश यही है, इस समय पर सर्टिफिकेट जारी किए जाए।
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बनबसा रेलवे स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस का ठहराव हुआ स्वीकृत

रेलमंत्री ने मुख्यमंत्री के अनुरोध पर दी मंजूरी
चम्पावत। जनपद एवं सीमांत क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सौगात के रूप में बनबसा रेलवे स्टेशन पर गाड़ी संख्या 15093/15094 अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के ठहराव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
भारत सरकार के रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौघोगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्कर सिंह धामी को भेजे पत्र में अवगत कराया है कि मुख्यमंत्री द्वारा 8 जुलाई 2026 को जनसुविधा के दृष्टिगत बनबसा रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी के ठहराव का अनुरोध किया गया था। इस अनुरोध पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए बनबसा रेलवे स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के ठहराव की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से जनपद चम्पावत एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों को एक महत्वपूर्ण रेल सुविधा प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से यात्रियों को आवागमन में अधिक सुविधा मिलेगी तथा पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। जिलाधिकारी ने इस जनहितकारी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री एवं रेल मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा सीमांत क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगी और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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डॉ. विजयकांत पुरोहित को मिला कर्मयोगी सम्मान

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श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित को बड़ा सम्मान मिला है। उन्हें हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती के विस्तार, किसानों के प्रशिक्षण तथा जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय से किए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए कर्मयोगी सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान जनपद चमोली के नंदानगर स्थित सितेल में आयोजित जड़ी-बूटी प्रशिक्षण एवं वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नेचर ऑर्गेनिक सोसायटी, नंदानगर (चमोली) एवं उद्योगिनी संस्था, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। डॉ. पुरोहित की ओर से उनके प्रतिनिधि डॉ. जयदेव चैहान ने यह सम्मान ग्रहण किया। समारोह में क्षेत्र के किसान, जड़ी-बूटी उत्पादक, शोधकर्ता तथा सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर नेचर ऑर्गेनिक सोसायटी के संस्थापक पुष्कर सिंह बिष्ट तथा उद्योगिनी संस्था, नई दिल्ली के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवम ने बताया कि डॉ. पुरोहित के मार्गदर्शन में चमोली सहित उत्तराखंड के सीमांत जनपदों के अनेक किसानों ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की वैज्ञानिक खेती को अपनाया है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण को भी नई मजबूती मिली है। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पुरोहित के प्रयासों से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को नई पहचान मिली है। इससे स्वरोजगार और सतत आजीविका के नए अवसर विकसित हुए हैं तथा स्थानीय युवाओं का जड़ी-बूटी आधारित उद्यमों की ओर रुझान भी बढ़ा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. पुरोहित भविष्य में भी सीमांत क्षेत्रों के किसानों का मार्गदर्शन करते हुए हिमालयी जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन तथा समाजहित के कार्यों में अपना महत्वपूर्ण योगदान निरंतर देते रहेंगे।
डॉ. विजयकांत पुरोहित को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि हिमालयी औषधीय संपदा के संरक्षण, वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है। पंत ने कहा कि डॉ. विजयकांत पुरोहित ने वैज्ञानिक शोध को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे किसानों के खेतों तक पहुंचाकर व्यवहारिक रूप दिया।
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बारिश और कोहरे का फायदा उठाकर  शिकारी वन्यजीव ने हमला कर महिला को उतारा मौत के घाट
बागेश्वर। जिले की कांडा तहसील में 19 परिवारों के करीब 50 से ज्यादा मवेशियों को चराने जंगल गई एक महिला की  शिकारी वन्यजीव  के हमले से दर्दनाक मौत हो गई। महिला पर हमले के वक्त जंगल में तेज बारिश हो रही थी और घना कोहरा छाया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गुलदार ने झाड़ियों की ओट और खराब मौसम का फायदा उठाकर महिला पर अचानक हमला किया।  घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है, जबकि ग्रामीणों ने क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को जल्द पकड़ने की मांग की है।
कांडा तहसील क्षेत्र के बाझीरौट, खड़खेत गांव के जंगल में मंगलवार को मवेशी चराने गई 48 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। घटना के बाद मौके से गुलदार को भागते हुए देखने का दावा किया गया है। पुलिस और वन विभाग इसे प्रथम दृष्टया गुलदार का हमला मान रहे हैं, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
मिली जानकारी के अनुसार, बाझीरौट निवासी कमला देवी, पत्नी पूरन राम, मंगलवार को गांव के 19 परिवारों के लगभग 50 से अधिक गाय, बैल और बकरियों को चराने के लिए जंगल गई थी। उनके साथ उनके पति पूरन राम भी थे। अचानक कमला देवी की चीख सुनाई दी।
घटनास्थल से गुलदार को भागते देखारू जब पति पूरन राम और पास में बकरियां चरा रहे पंकज राम मौके पर पहुंचे, तो कमला देवी लहूलुहान अवस्था में पड़ी मिली। दोनों का दावा है कि उन्होंने एक गुलदार को नीचे की ओर भागते हुए देखा। उस समय क्षेत्र में तेज बारिश और घना कोहरा होने के कारण गुलदार कुछ ही देर में ओझल हो गया।
घटना की सूचना क्षेत्र पंचायत सदस्य भगवान भंडारी ने पुलिस को दी। इसके बाद ग्राम प्रधान प्रकाश राम और थाना प्रभारी बलवंत कंबोज पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
कमला देवी अपने पीछे पति और चार बच्चों का परिवार छोड़ गई है। उनका बड़ा पुत्र बबलू कुमार विवाहित है और परिवार के साथ बाहर रहता है। दो पुत्रियों का विवाह हो चुका है, जबकि 23 वर्षीय पुत्र पुष्पेश कुमार अविवाहित है। कमला का मायका पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग क्षेत्र के लोहाथल गांव में है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी बलवंत कंबोज ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला गुलदार के हमले का प्रतीत हो रहा है। मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। वन विभाग भी मामले की जांच में जुटा है।
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पंचक खत्म, हरिद्वार में उमड़ी शिव भक्तों की भीड़


हरिद्वार। मंगलवार की रात को पंचक समाप्त होने के बाद बुधबार सुबह से कांवड़ उठाने वाले शिव भक्तों की हरिद्वार में भीड़ उमड़ने लगी है। विभिन्न माध्यमों से बड़ी संख्या में शिव भक्त हरिद्वार पहुंच रहे हैं।
कांवड़ यात्रा शुरू होने से लेकर मंगलवार की शाम छह बजे तक 1.40 करोड़ कांवड़ यात्री गंगा जल लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए थे।एक-दो दिन के अंतराल में कांवड़ यात्रियों की संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हरिद्वार में जल लेकर लौट रहे कांवड़ यात्रियों को आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं है।
बुधवार सुबह वर्षा के बाद भी कांवड़ यात्रियों की यात्रा निरंतर जारी रही। कई स्थानों पर कांवड़ पटरी से हाईवे पर जाने के लिए कांवड़ यात्री और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति भी बनी। कांवड़ मेले के शुरुआती दिनों में अपेक्षाकृत शांत रहा कनखल का बैरागी कैंप अब डाक कांवड़ यात्रियों की आमद के साथ पूरी तरह आबाद होने की तैयारी में है।  पंचक समाप्त होते ही बुधवार से डाक कांवड़ यात्रियों के बड़े जत्थे हरिद्वार पहुंचने शुरू हो गए। इसे देखते हुए प्रशासन ने पहले ही बैरागी कैंप की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया था। अगले कुछ दिनों में पूरा क्षेत्र वाहनों, शिवभक्तों और अस्थायी बाजारों की चहल-पहल से गुलजार रहेगा। बैरागी कैंप हर साल डाक कांवड़ यात्रियों के लिए सबसे अहम पड़ावों में शामिल रहता है। जलाभिषेक से करीब पांच दिन पहले यहां हजारों डाक कांवड़िए अपने वाहनों के साथ पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्किंग स्थलों को तैयार कर लिया गया है। पुलिस ने पार्किंग और निकासी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

टिहरी गढ़वाल, 05 अगस्त 2026

*एसआईआर के तहत भेजे गए नोटिसों की सुनवाई जारी, जिला निर्वाचन अधिकारी लगातार कर रही हैं मॉनिटरिंग*

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जनपद टिहरी गढ़वाल में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान के अंतर्गत जारी नोटिसों पर नियमानुसार सुनवाई की कार्यवाही निरंतर की जा रही है।

मंगलवार 04 अगस्त 2026 तक प्राप्त प्रगति के अनुसार जनपद की सभी छह विधानसभा क्षेत्रों में सुनवाई एवं नोटिस निस्तारण का कार्य तेज गति से जारी है।
अब तक जनपद में 1,17,501 नोटिस के सापेक्ष  1,07,712 नोटिसों का वितरण किया जा चुका है। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कुल 5,230 मामलों की सुनवाई संपन्न हो चुकी है, जबकि समयावधि पूर्ण होने के  वर्तमान में 814 प्रकरण लंबित हैं, जिनका नियमानुसार शीघ्र निस्तारण किया जा रहा है। साथ ही पात्रता के संबंध में प्राप्त अभ्यावेदनों एवं आपत्तियों का भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षण किया जा रहा है।

जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल द्वारा एसआईआर अभियान की प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ( एईआरओ) एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रत्येक प्रकरण का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन करते हुए किसी भी पात्र मतदाता को असुविधा न हो।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जाए।

निर्धारित रोस्टर के अनुसार आज 05 अगस्त 2026 को घनसाली विधानसभा क्षेत्र में 9 स्थानों पर नोटिसों की सुनवाई निर्धारित की गई है वहीं देवप्रयाग में 12 स्थानों , नरेंद्रनगर 15 स्थानो पर, प्रतापनगर 13 स्थानों पर, टिहरी में 10 स्थानो पर तथा धनोल्टी में  11 मतदेय स्थानों पर नोटिसों की सुनवाई कार्य गतिमान है।

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‎*खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच, मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी की तैयारियां तेज*

‎*15 अगस्त तक पूरी हों खेल महाकुंभ-2026 की तैयारियां, सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी: सीडीओ*

‎*सूचना/टिहरी/05 अगस्त, 2026:* मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन सभागार में खेल महाकुंभ-2026 के अंतर्गत आयोजित होने वाली मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी की तैयारियों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रतियोगिताओं के सफल, सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध आयोजन के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

‎युवा कल्याण अधिकारी रविन्द्र सिंह फोनिया ने बताया कि विभाग द्वारा खेल महाकुंभ-2026 का आयोजन सितंबर से अक्टूबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रतियोगिताओं में अंडर-14 एवं अंडर-19 आयु वर्ग के बालक एवं बालिका खिलाड़ियों के साथ चयनित स्पर्धाओं में महिला, पुरुष ओपन तथा दिव्यांगजन वर्ग के खिलाड़ी भी प्रतिभाग करेंगे। मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि खेल महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए गठित सभी समितियां 15 अगस्त तक अपनी बैठकें आयोजित कर आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर लें। उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण  विभाग को अन्य खेल प्रतियोगिताओं का रोस्टर भी जारी करने निर्देश दिए, ताकि प्रतियोगिताओं की तिथियों में किसी प्रकार का टकराव न हो।

‎मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि खेल महाकुंभ-2026 में खेल, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की भूमिका आयोजन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी। सभी खेल स्थलों पर प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), एंबुलेंस तथा आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं समय से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही पंचायती राज एवं ग्राम्य विकास विभाग को निर्देशित किया कि न्याय पंचायत स्तर पर तैनात कार्मिकों को खेल प्रतियोगिताओं के संचालन में पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

‎बैठक में बताया गया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं 1 से 10 सितंबर, विधानसभा क्षेत्र स्तर पर विधायक चैम्पियनशिप ट्रॉफी 11 से 20 सितंबर, संसदीय क्षेत्र स्तर पर सांसद चैम्पियनशिप ट्रॉफी 21 से 30 सितंबर तथा राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी का आयोजन 30 अक्टूबर 2026 तक संपन्न कराया जाएगा।

‎बैठक में पुलिस उपाधीक्षक महेश लखेड़ा, एसीएमओ डॉ. बृजेश डोभाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी दीपक रावत, शिक्षा विभाग से प्रधानाचार्य अवतार सिंह राणा, सहायक पंचायती राज अधिकारी ऋषि राम उनियाल, ब्लॉक समन्वयक यशपाल सिंह, सभी विकासखंडों के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, व्यायाम प्रशिक्षक तथा विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।