संघर्षशील पत्रकार जीतमणि पैन्यूली को नमन एवं शुभकामनाएं; दुर्गा प्रसाद नौटियाल संपादक

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संघर्षशील पत्रकार जीतमणि पैन्यूली को नमन एवं शुभकामनाएं

सभी पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र तथा http://ukpkg.com न्यूज पोर्टल वेब चैनल के देश-विदेश में पढ़ने वाले सभी सुधी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

आज स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर एक ऐसे संघर्षशील पत्रकार एवं जनहित के प्रहरी श्री जीतमणि पैन्यूली जी के योगदान को स्मरण करना आवश्यक है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद पत्रकारिता को केवल समाचार प्रकाशित करने का माध्यम नहीं माना, बल्कि जनहित, उत्तराखंड के विकास और पत्रकारों के अधिकारों की आवाज़ को निरंतर मजबूती से उठाया।

वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद जब उत्तराखंड के पर्यटन और तीर्थाटन को भारी नुकसान पहुंचा, तब उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से प्रदेश की वास्तविक समस्याओं और विकास की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी संघ ने भी उनके योगदान और तीर्थाटन-पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों को देखते हुए उन्हें संरक्षण की जिम्मेदारी देकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल/वेब चैनल को पत्रकारिता के नए माध्यम के रूप में बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए।

इसी क्रम में 1 जुलाई से लगभग 11 माह तक उत्तराखंड पत्रकार संगठन समन्वय समिति के संयोजक के रूप में उन्होंने पत्रकारों की मांगों और न्यूज़ पोर्टल/वेब चैनलों को विज्ञापन नीति में स्थान दिलाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस संघर्ष का व्यक्तिगत रूप से उनके अपने समाचार पत्र के राजस्व पर असर पड़ना स्वाभाविक था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत हित से ऊपर पत्रकारिता के व्यापक हित को रखा। विभिन्न बैठकों में प्राप्त सुझावों के आधार पर 27 विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष तथा नेता प्रतिपक्ष और सांसद श्री अजय भट्ट जी की संस्तुति सहित सरकार को पत्र दिया गया। इसके बाद वर्ष 2014 में उत्तराखंड में न्यूज़ पोर्टल और वेब चैनलों को विज्ञापन दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। आज प्रदेश में बड़ी संख्या में न्यूज़ पोर्टल और वेब चैनल पत्रकारों तथा उनके परिवारों के लिए रोजगार का माध्यम बने हैं।

कोरोना काल में पत्रकारों की स्थिति भी अत्यंत कठिन रही। अनेक पत्रकारों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जान गंवाई। जब सरकारी कर्मचारियों के लिए सहायता की व्यवस्था की गई, तब पत्रकारों की उपेक्षा के विरोध में श्री पैन्यूली जी ने अपनी आवाज़ उठाई। अनुमति न मिलने के बावजूद उन्होंने 29 मई 2021 से अपने गांव लिखवार, भदूरा, प्रतापनगर, टिहरी बांध प्रभावित क्षेत्र में धरना एवं मौन व्रत प्रारंभ किया और 5 जून तक प्रेस को संवैधानिक अधिकार दिए जाने की मांग उठाई। इस संघर्ष को ‘पहाड़ों की गूंज’ हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, देहरादून ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।

यह संघर्ष केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन का संघर्ष नहीं था, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाई गई आवाज़ थी। श्री पैन्यूली जी का मानना है कि पत्रकारिता को जनहित के सवालों को निर्भीकता से उठाने का अधिकार और स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उनका संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि छोटे राज्य के छोटे समाचार पत्र से उठी आवाज़ भी यदि ईमानदारी, निरंतरता और जनहित की भावना से उठाई जाए तो वह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती है।

इसी निरंतर संघर्ष, समर्पण और जनहित की पत्रकारिता को देखते हुए देशभर में उनके कार्यों को अनुकरणीय माना जा रहा है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति कर्मचारी संघ द्वारा उन्हें प्रदेश के विकास के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाना उनके सामाजिक और पत्रकारिता जीवन के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

आज देश के पत्रकारों के बीच यह चर्चा है कि श्री जीतमणि पैन्यूली जी ने जिस दृढ़ता और संघर्षशीलता के साथ पत्रकारों तथा जनहित के मुद्दों को उठाया है, वह आने वाली पीढ़ी के पत्रकारों के लिए प्रेरणादायी है। पिछले वर्षों से IFSMN को गति देने और देशभर के पत्रकारों को एक मंच पर संगठित करने की दिशा में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है।

यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती है तो हमारा विश्वास है कि वे पत्रकारों के अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के अपने संघर्ष को और व्यापक बनाएंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं और अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में व्यक्त किए गए संकल्पों को धरातल तक पहुंचाने में पत्रकार समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

30 अगस्त 2026 को प्रेस क्लब, दिल्ली में प्रातः 10:30 बजे इंडियन फेडरेशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम न्यूज़ पेपर,IFSMN के सदस्यों की बैठक प्रस्तावित है। देशभर के पत्रकार साथियों एवं संगठन से जुड़े सदस्यों से आग्रह है कि अधिक से अधिक संख्या में इस बैठक की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाएं और पत्रकारों के अधिकारों एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की इस मुहिम में सहभागिता करें।

श्री जीतमणि पैन्यूली जी केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और जनहित की आवाज़ हैं। उत्तराखंड की धरती से उठी उनकी यह आवाज़ आज राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता के अधिकारों और लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन रही है। ऐसे संघर्षशील व्यक्तित्व को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर नमन।
दुर्गा प्रसाद नौटियाल संपादक डिजिटल बुक उतरवाणी 11 सुभाष रोड़ देहरादून उत्तराखंड