Jiitmani Painyuli editor का राष्ट्र को समृद्ध बनाने एक साल पुरानी आवाज, आज भी प्रासंगिक सवाल पढ़ें सभी समाचार

Spread the love

 

एक साल पुरानी आवाज, आज भी प्रासंगिक सवाल

“प्रधानमंत्री मोदी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व में मजबूत करने के लिए संज्ञान लें” — पहाड़ों की गूंज के 2 अगस्त 2025 के अंक में प्रकाशित यह शीर्षक आज भी विचार करने के लिए मजबूर करता है। उस समय राष्ट्रपति सचिवालय को देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से भेजे गए पत्र और उसमें उठाए गए आर्थिक विषयों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। यह केवल एक समाचार नहीं था, बल्कि आर्थिक व्यवस्था को लेकर एक नागरिक की चिंता और सुझावों को सामने रखने का प्रयास था।

आज जब भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक कितना पहुंच रहा है। देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होने का अर्थ केवल बड़े आंकड़े, बड़े उद्योग और बड़े निवेश नहीं है; इसका अर्थ छोटे व्यापारी की बढ़ती आय, युवाओं के लिए रोजगार, किसान की बेहतर आमदनी, मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति और गरीब परिवार के जीवन में आर्थिक सुरक्षा भी है।

एक वर्ष पहले उठाए गए सवालों को आज फिर पढ़ना इसलिए जरूरी है कि समय बदलता है, सरकारें बदलती हैं, नीतियां बदलती हैं, लेकिन आम आदमी की आर्थिक अपेक्षाएं बनी रहती हैं। आर्थिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब देश की प्रगति का लाभ गांव से लेकर शहर तक और समाज के अंतिम व्यक्ति तक दिखाई दे। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है कि एक सामान्य नागरिक भी देश की आर्थिक दिशा पर अपनी बात प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंचा सकता है।

पुराना समाचार, लेकिन सवाल आज भी नया है—भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ क्या हम हर भारतीय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं? यही सवाल इस समाचार को आज भी प्रासंगिक बनाता है।
आगे पढ़ें

वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार बिराणी का आविष्कार केवल तकनीक नहीं—रोजगार और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का संभावित आधार

“प्रधानमंत्री मोदी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व में मजबूत करने के लिए संज्ञान लें”—2 अगस्त 2025 के पहाड़ों की गूंज के अंक में प्रकाशित यह शीर्षक आज एक वर्ष बाद फिर देश के सामने खड़ा दिखाई देता है। उस समय राष्ट्रपति सचिवालय को भेजे गए पत्र के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने और आर्थिक व्यवस्था में सुधार से जुड़े विषयों को उठाया गया था। वह केवल एक समाचार नहीं था, बल्कि एक नागरिक की आर्थिक चिंता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के सुझावों को सामने रखने का प्रयास था।

आज सवाल और बड़ा है—जब देश में प्रतिभाशाली वैज्ञानिक अपने स्तर पर ऐसे आविष्कार कर रहे हैं जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार की संभावना पैदा कर सकते हैं, तो उन आविष्कारों को प्रयोगशाला से उद्योग और उद्योग से आम नागरिक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी है?

यहीं युवा वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र कुमार बिराणी जी का आविष्कार महत्वपूर्ण हो जाता है। उनके आविष्कार को केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं होगा। असली प्रश्न यह है कि इस तरह के स्वदेशी आविष्कारों को भारत की आर्थिक शक्ति और रोजगार-सृजन की मशीन में कैसे बदला जाए?

आविष्कार तभी सफल है, जब वह समाज तक पहुंचे

किसी वैज्ञानिक का आविष्कार प्रयोगशाला में तैयार होकर पेटेंट या तकनीकी उपलब्धि तक पहुंच जाए, यह निश्चित रूप से बड़ी सफलता है। लेकिन आर्थिक दृष्टि से उसकी सबसे बड़ी सफलता तब होगी, जब वह बड़े पैमाने पर उत्पाद बने, उद्योग में इस्तेमाल हो, बाजार में पहुंचे और उससे हजारों युवाओं को रोजगार मिले।

एक वैज्ञानिक आविष्कार के पीछे रोजगार की पूरी श्रृंखला बन सकती है।

अनुसंधान → पेटेंट → तकनीकी विकास → उत्पादन → उद्योग → पैकेजिंग → परिवहन → विपणन → निर्यात → रोजगार।

यानी एक आविष्कार केवल एक उत्पाद नहीं बनाता। उसके चारों तरफ पूरी आर्थिक गतिविधि खड़ी हो सकती है।

यही वह वैज्ञानिक-आर्थिक सोच है जिसकी भारत को आज आवश्यकता है।

सरकार को केवल आविष्कार सुनना नहीं, उसे आगे बढ़ाना होगा

देश के युवाओं से लगातार नवाचार और नए समाधान खोजने का आह्वान किया जाता है। लेकिन केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि युवा समाधान खोजें। व्यवस्था का अगला सवाल होना चाहिए—उस समाधान को जमीन पर उतारने के लिए सरकार क्या करेगी?

यदि किसी वैज्ञानिक ने समाधान खोज लिया, पेटेंट प्राप्त कर लिया या कोई उपयोगी तकनीक विकसित कर ली, लेकिन उसके पास उत्पादन शुरू करने की पूंजी नहीं है, उद्योग से जुड़ने का रास्ता नहीं है, सरकारी संस्थानों में उसका परीक्षण और उपयोग नहीं हो पा रहा है और बाजार तक पहुंचने की व्यवस्था नहीं है, तो आविष्कार का वास्तविक आर्थिक लाभ समाज तक कैसे पहुंचेगा?

इसलिए भारत को अब “आविष्कार करो” से आगे बढ़कर “आविष्कार को रोजगार में बदलो” की नीति पर गंभीरता से विचार करना होगा।

डॉ. शैलेन्द्र कुमार बिराणी का उदाहरण क्यों महत्वपूर्ण है?

डॉ. बिराणी का आविष्कार यह सोचने का अवसर देता है कि देश के वैज्ञानिकों और नवाचार करने वाले युवाओं को केवल सम्मान और प्रमाणपत्र देकर उनकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं मानी जानी चाहिए। यदि कोई तकनीक उपयोगी है और उसका बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है तो सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र, निजी उद्योग, शोध संस्थान और निवेश व्यवस्था को मिलकर उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

मान लीजिए किसी स्वदेशी तकनीक का उत्पादन भारत में शुरू होता है। उसके लिए कारखाना लगेगा, तकनीकी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, मशीनें बनेंगी, कच्चा माल आएगा, पैकेजिंग होगी, परिवहन होगा, बिक्री नेटवर्क बनेगा और रखरखाव की व्यवस्था होगी। इन सभी क्षेत्रों में रोजगार पैदा होंगे।

यही वैज्ञानिक आविष्कार को आर्थिक विकास से जोड़ने का वास्तविक अर्थ है।

भारत को जीडीपी से आगे रोजगार की अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा

भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन किसी भी अर्थव्यवस्था की मजबूती का अंतिम मूल्यांकन केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों से नहीं किया जा सकता।

सवाल यह भी होना चाहिए—

कितने युवाओं को रोजगार मिला?
कितने नए उद्योग खड़े हुए?
कितने भारतीय आविष्कार बाजार तक पहुंचे?
कितने वैज्ञानिक अपने शोध को व्यवसाय में बदल सके?
कितने छोटे उद्यम बड़े उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े?
और सबसे महत्वपूर्ण—आर्थिक विकास से आम नागरिक की आय और क्रयशक्ति कितनी बढ़ी?

अगर देश का वैज्ञानिक आविष्कार करता है और उसका उत्पादन किसी दूसरे देश में होता है, तो वैज्ञानिक उपलब्धि भारत की हो सकती है, लेकिन आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा बाहर जा सकता है। इसके विपरीत यदि उसी आविष्कार का अनुसंधान, पेटेंट, उत्पादन और बाजार भारत में विकसित हो, तो ज्ञान से लेकर रोजगार और रोजगार से लेकर राजस्व तक पूरी आर्थिक श्रृंखला देश के भीतर बन सकती है।

एक साल पुराने सवाल को फिर पढ़ने की जरूरत क्यों है?

एक साल पहले उठाई गई आर्थिक चिंता इसलिए आज भी जीवित है क्योंकि सरकारें बदल सकती हैं, नीतियां बदल सकती हैं और आर्थिक परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन रोजगार की जरूरत, युवाओं की आकांक्षा और आम नागरिक की आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती।

आज भारत के सामने अवसर भी असाधारण है। हमारे पास बड़ी युवा आबादी है, वैज्ञानिक प्रतिभा है, इंजीनियर हैं, तकनीकी संस्थान हैं और विशाल घरेलू बाजार है। जरूरत केवल इन संसाधनों को एक-दूसरे से जोड़ने की है।

यदि भारत वैज्ञानिकों के आविष्कारों को उद्योग से जोड़ने की मजबूत व्यवस्था खड़ी कर देता है तो देश में रोजगार का एक नया मॉडल विकसित हो सकता है।

वैज्ञानिक समाधान खोजे।
सरकार रास्ता बनाए।
उद्योग उत्पादन करे।
युवा रोजगार पाए।
देश उत्पादन और निर्यात बढ़ाए।

यही वास्तविक आत्मनिर्भरता होगी।

सवाल सरकार से भी, समाज से भी

अब समय आ गया है कि भारत में हर उपयोगी आविष्कार के बाद केवल यह न पूछा जाए कि “आविष्कार क्या है?”

इसके साथ चार और सवाल पूछे जाएं—

इसका पेटेंट कैसे होगा?
इसका उत्पादन कौन करेगा?
इसका बाजार कितना बड़ा है?
और इससे कितने रोजगार पैदा किए जा सकते हैं?

अगर इन सवालों का उत्तर खोजने की व्यवस्था बन गई तो भारत के हजारों वैज्ञानिक और युवा शोधकर्ता केवल नौकरी खोजने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि रोजगार पैदा करने वाले बन सकते हैं।

यही परिवर्तन भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

प्रधानमंत्री और नीति-निर्माताओं के लिए विचार का विषय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को समस्याओं का समाधान खोजने और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। अब जरूरत उस विचार को अगले चरण तक ले जाने की है।

देश के युवाओं से समाधान मांगने के साथ-साथ सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके समाधान फाइलों में बंद न हों।

भारत के विश्वविद्यालयों, आईआईटी, शोध संस्थानों, छोटे वैज्ञानिकों, स्वतंत्र आविष्कारकों और ग्रामीण क्षेत्रों के नवाचारों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां एक उपयोगी आविष्कार को प्रयोगशाला से प्रोटोटाइप, प्रोटोटाइप से पेटेंट, पेटेंट से उत्पादन और उत्पादन से रोजगार तक पहुंचाने का स्पष्ट रास्ता उपलब्ध हो।

डॉ. शैलेन्द्र कुमार बिराणी जैसे वैज्ञानिकों का उदाहरण इसी दिशा में गंभीर चिंतन का अवसर देता है।

पुराना समाचार, लेकिन सवाल आज भी नया

एक साल पहले उठी आवाज आज फिर इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि देश को केवल विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दौड़ में आगे नहीं बढ़ना है; भारत को ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था बनना है जिसमें हर भारतीय की आर्थिक भागीदारी मजबूत हो।

बड़ा उद्योग जरूरी है।
बड़ा निवेश जरूरी है।
विदेशी पूंजी जरूरी है।
निर्यात जरूरी है।

लेकिन इनके साथ भारतीय वैज्ञानिक का आविष्कार, भारतीय युवा का रोजगार, छोटे उद्यमी की बढ़ती आय और आम नागरिक की बढ़ती क्रयशक्ति भी उतनी ही जरूरी है।

डॉ. शैलेन्द्र कुमार बिराणी का आविष्कार हमें यही सोचने के लिए मजबूर करता है कि देश में वैज्ञानिक प्रतिभा की कमी नहीं है। चुनौती है—उस प्रतिभा को आर्थिक शक्ति में बदलने की।

और शायद अब समय आ गया है कि देश इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार करे—

क्या भारत केवल दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी कर रहा है, या फिर ऐसे वैज्ञानिक आविष्कारों को बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार में बदलकर हर भारतीय को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की भी तैयारी कर रहा है?

क्योंकि अंततः देश की असली आर्थिक ताकत केवल जीडीपी के आंकड़ों में नहीं, बल्कि उस नागरिक के हाथ में होती है जिसके पास सम्मानजनक रोजगार, बढ़ती आय और सुरक्षित आर्थिक भविष्य होता है।

एक साल पुरानी आवाज फिर सुनाई दे रही है—सवाल वही है, लेकिन अब समय जवाब देने का है।

दुर्गा प्रसाद नौटियाल

आगे पढ़ें

 कांग्रेस को बड़ा झटका, दिनेश कुंजवाल ने छोड़ी कांग्रेस

अल्मोड़ा। दो दिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उत्तराखंड के नेताओं में जोश भरकर गए थे। लेकिन उनके जाते ही कांग्रेस को उनके दिग्गज नेता गोविंद सिंह कुंजवाल के घर से बड़ा झटका लगा है। कुंजवाल के भतीजे ने कांग्रेस छोड़ दी है। उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ दी है।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के लिए सभी राजनैतिक दल अपनी जमीन को संगठन के माध्यम से मजबूत करने में लगे हैं। इसी क्रम में यूकेडी ने कांग्रेस में सेंध मार कर जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में अपनी जमीन मजबूत की है। चुनाव से पहले जागेश्वर की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर के कद्दावर कांग्रेसी नेता गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल ने कांग्रेस से दूरी बनाते हुए उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) का दामन थाम लिया है।
दिनेश कुंजवाल के यूकेडी में शामिल होने को क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता यूकेडी में शामिल हुए हैं। दिनेश कुंजवाल का कांग्रेस छोड़ना इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उनका सीधा संबंध कुंजवाल परिवार के सदस्य हैं। गोविंद सिंह कुंजवाल लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में प्रमुख चेहरा रहे हैं और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के रूप में प्रदेश की राजनीति में उनकी अलग पहचान रही है। ऐसे में उनके परिवार से जुड़े एक प्रमुख व्यक्ति का कांग्रेस से अलग होना पार्टी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर झटका माना जा रहा है।
जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र को लंबे समय से कांग्रेस की मजबूत राजनीतिक जमीन माना जाता रहा है। हालांकि दिनेश कुंजवाल के यूकेडी में जाने के बाद यहां कांग्रेस के पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दिनेश कुंजवाल के इस फैसले का असर स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के संगठन और समर्थकों पर भी पड़ सकता है।
आगे पढ़ेंमुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में राजस्व वृद्धि के सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने लक्ष्य के सापेक्ष अर्जित राजस्व की जानकारी ली एवं राजस्व वृद्धि के नवीन प्रयास एवं नवाचारों पर अधिकारियों से चर्चा की।मुख्य सचिव ने कहा कि एसजीएसटी में अभी काफी पोटेंशियल है। उन्होंने एसजीएसटी विभाग को टैक्स चोरी को रोकने के लिए एआई आधारित जाँच बढ़ाए जाने पर काम किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले 4-5 महीनों में एआई बेस्ड मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, कर सम्बन्धी सभी विभागों का डाटा इंटीग्रेशन किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने परिवहन विभाग के एएनपीआर कैमरों के प्रभावी उपयोग के साथ ही सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में निबंधन और रजिस्ट्रेशन सम्बन्धी रखरखाव कार्यों का डिजिटाईजेशन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वन या गैर क्षेत्रों में नये खनन लाटस चिन्हित किये जाएं तथा इस हेतु जिला प्रशासन का सहयोग भी प्राप्त किया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग द्वारा स्थापित किये गये ए0एन0पी0आर0 कैमरा को खनन विभाग, वन विभाग तथा राज्य कर विभाग के साथ इंटिग्रेट किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि वन निगम जिन खनन व प्रकाष्ठ लॉट्स पर कार्य नहीं कर पा रहा है, उन पर वन विभाग अपने स्तर से कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जड़ी बूटी के क्षेत्र में भी अच्छा पोटेंशियल है। उन्होंने जड़ी बूटियों से सम्भावित आय का अध्ययन किए जाने की बात कही। कहा कि आय के नए स्रोत के रूप में कार्बन क्रेडिट, नये इको टूरिज्म स्थलों का विकास को सम्मिलित किया जाए। उन्होंने जनसामान्य को प्रकाष्ठ की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ऑनलाईन व्यवस्था की सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। साथ ही इसके लिए आईटीडीए से तकनीकी सहायता हेतु समन्वय किए जाने की बात कही।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, श्री बृजेश कुमार संत, श्री रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव श्री हिमांशु खुराना, श्रीमती अनुराधा पाल एवं श्री मनमोहन मैनाली सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

आगे पढ़ें

LIVE: देहरादून में आयोजित ‘महिला संवाद’ एवं ‘सम्मान समारोह’ कार्यक्रम*

आगे पढ़ें

सरकारी नीतियों में शामिल किए जाएंगे छात्र – छात्राओं के सुझाव – सीएम पुष्कर सिंह धामी*

*मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी*

*सीएम धामी बोले – आज के विद्यार्थी ही भविष्य में उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन, में आयोजित मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने “मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन” पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इसी के साथ विद्यालयी छात्र छात्राओं के बीच होने वाली “मेरे सपनों का उत्तराखण्ड: एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण” विषय की निबंध प्रतियोगिता का शुभारंभ हो गया है।

आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के 140 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इन चयनित छात्र- छात्राओं का NEET, JEE, CLAT, SAT जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग सहित एवं अन्य आवश्यक शुल्कों का वहन भी राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के 2828 सरकारी / गैर सरकारी स्कूलों के 11 एवं 12 वीं के 3 लाख से अधिक छात्र- छात्राओं ने वर्चुअल तरीके से प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने खेलों को बढ़ावा देने, सप्ताह में चार दिन खेल पीरियड आयोजित करने, विद्यालयों में मिल रहे विभिन्न अवसरों को और बढ़ाने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी बनाने, राज्य में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने सहित विभिन्न सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए स्वयं नोट किया और अधिकारियों को इनके अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र-छात्राओं द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार की नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र-छात्राएं देश का वर्तमान और भविष्य हैं। उन्होंने कहा विद्यार्थियों को अपने सपनों को साकार करने की ओर आगे बढ़ना चाहिए। परीक्षा में नंबरों से ज्यादा विषयों की समझ होना जरूरी है। जीवन में संस्कार और अनुशासन अपनाने से सफलता अवश्य मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा छात्र छात्राओं को पढ़ने के तरीके को बदलने की आवश्यकता है। पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि भविष्य संवारने के रास्ते के तौर पर देखना होगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि छात्र – छात्राओं को अपने जीवन में लीडर बनकर आगे बढ़ना है। लीडर वो होता है जो अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ काम करता है। उन्होंने कहा अपने काम, समाज के प्रति संवेदना, और कार्य के प्रति लगन किसी के नाम को भी अमर बना सकती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता स्वयं आगे बढ़ने में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपनी प्रतिभा और ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग करते हुए समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने और चुनौतियों से सीख लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा हमें अपने जीवन में संकल्प लेना चाहिए और उस संकल्प में कोई विकल्प नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा जब हम बिना विकल्प के संकल्प लेते हैं तो हमें और तेजी से सफलता मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा आज के विद्यार्थी ही भविष्य के उत्तराखंड और देश का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तभी करें, जब उसकी वास्तव में आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि AI हमारे लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक है, लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग के कुछ दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय पर सबसे पहले अपने विवेक, बुद्धि और सोचने की क्षमता का उपयोग करें तथा गुरुजनों के मार्गदर्शन और अनुभव से सीखें, इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर AI की सहायता लें। उन्होंने कहा कि तकनीक हमारी सहयोगी होनी चाहिए, हमारी सोचने और सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी बढ़ावा देना जरूरी है। उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के साथ ही खेलों के प्रति युवाओं और समाज में नई जागरूकता पैदा हुई है। अब हमारे छात्र खेलों में भी अपना भविष्य देख रहे हैं और विभिन्न खेल विधाओं में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना भी लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे विद्यार्थियों की सोच, उनकी आकांक्षाओं और भविष्य को लेकर उनके मन में चल रहे विचारों से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि उनके घर में स्वयं जैन अल्फा और जैन जी हैं, इसलिए वे नई पीढ़ी की सोच, उनकी रुचियों और भविष्य को लेकर उनकी आकांक्षाओं को करीब से समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के लिए संवाद का रास्ता हमेशा खुला है। विद्यार्थी अपनी समस्याओं, सुझावों और विचारों को खुलकर साझा कर सकते हैं। सरकार युवाओं की बात सुनने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए हमेशा तत्पर है। उन्होंने कहा कि निरंतर संवाद से ही बेहतर समझ और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।

इस अवसर पर मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो.गोविंद सिंह, सचिव शिक्षा श्रीमती ज्योति यादव, अपर सचिव श्रीमती नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोंडे, श्री गोविंद राम जायसवाल, राहुल अग्रवाल, रिया अग्रवाल एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

आगे पढ़ें

मुख्यमंत्री ने समस्त जिलाधिकारियों के साथ की वर्चुअल बैठक*

*15 अक्टूबर तक किसी भी स्थिति में प्रदेश की सभी सड़कों को किया जाए गड्ढामुक्त*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, आपदा प्रबन्धन, जन-जन के द्वार कार्यक्रम, सत्यापन अभियान, गड्ढा मुक्त सड़के जैसे विभिन्न विषयों पर दिशा निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून के दृष्टिगत सतर्कता बढ़ाते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने फोन चालू रखें और किसी भी परिस्थिति में संपर्क से बाहर न रहें। किसी भी तरह की अनहोनी से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एवं तैयारियां सुनिश्चित की जाएं, ताकि मानसून के दौरान आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान आपदा अथवा अत्यधिक वर्षा के कारण जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, मार्ग अवरुद्ध या टूटे हैं तथा ड्रेनेज सिस्टम में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न हुई है, उनका जिलाधिकारी स्तर पर विस्तृत विवरण तैयार किया जाए। उन्होंने कहा ऐसे स्थानों का चिन्हीकरण कर मानसून समाप्त होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों, मार्गों एवं ड्रेनेज व्यवस्था के पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अपने-अपने जिलों में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करते हुए समिति गठित करें और कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून समाप्त होने के बाद 15 अक्टूबर तक किसी भी स्थिति में प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में मानसून के बाद और तेजी लाई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों एवं ग्रामों में अभी तक इन शिविरों का आयोजन नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कैंप आयोजित कर अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये शिविर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि आमजन की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम हैं।

मुख्यमंत्री ने 1905 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्यभर में चल रहे सत्यापन अभियान में भी तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपात्र लोगों का चिन्हीकरण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके। उन्होंने राज्य में स्टेट सेक्टर फिजिकल वेरिफिकेशन में भी तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत राज्यभर में 5 वर्ष की अवधि पूर्ण कर चुकी एवं खराब स्थिति वाली सड़कों को चिन्हित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी सड़कों की स्थिति का आकलन कर उनके डामरीकरण एवं सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, आवश्यकता के अनुसार इन सड़कों को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर एवं सुगम सड़क सुविधा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि घोषणाओं से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण हो सकें और उनका लाभ आमजन तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के बाद स्वच्छता अभियान में और तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाते हुए अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री एवं तस्करी पर कड़ी कार्रवाई करने तथा ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कृषि, बागवानी एवं पशुपालन से जुड़ी योजनाओं पर विशेष ध्यान देते हुए अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इनसे जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं प्रभावी तरीके से किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों तक पहुंचाया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सके।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर.के सुधांशु, वर्चुअल माध्यम से आयुक्त कुमाऊं श्री दीपक रावत, गढ़वाल श्री आनंद स्वरूप, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक मौजद रहे।

आगे पढ़ें

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना : हरित ऊर्जा के साथ मिल रहा स्वरोजगार*

*योजना के तहत 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 210 मेगावाट क्षमता सौर उर्जा का उत्पादन*

देहरादून। उत्तराखंड के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना (एमएसएसवाई) राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन रही है। योजना के तहत जून माह तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित हो चुके हैं, जिससे 3500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य प्रदान किया है। योजना के अंतर्गत स्थानीय निवासियों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है। शेष परियोजनाओं पर स्थापना का कार्य चल रहा है।

*टिहरी जिले ने बनाई बढ़त*
जिलेवार आंकड़ों में टिहरी सबसे आगे है। यहां 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है। उत्तरकाशी में 227 संयंत्रों से 43,660 किलोवाट और चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है। इसी तरह हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट, पौड़ी में 88 संयंत्रों की 15,440 किलोवाट, चमोली में 72 संयंत्रों की 11,725 किलोवाट और अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की 5,600 किलोवाट क्षमता दर्ज की गई है। देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं।

*3500 लोगों को रोजगार*
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना केवल सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने के माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है। योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हो रही हैं। जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है।

*मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें। इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है।*
आगे पढ़ें

मुख्यमंत्री धामी ने मातृशक्ति से किया सीधा संवाद, महिला सशक्तिकरण को बताया विकास का आधार*


– *तीज उत्सव पर महिलाओं को सम्मान, मुख्यमंत्री बोले— उत्तराखंड की असली शक्ति हमारी मातृशक्ति*

– *उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का मुख्यमंत्री ने किया अभिनंदन, आत्मनिर्भर उत्तराखंड का लिया संकल्प*

– *महिला संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सुनी महिलाओं की अपेक्षाएं और सुझाव*

– ‘ *सशक्त नारी–समृद्ध उत्तराखंड’ के विजन को साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री*

– *महिलाओं को निर्णय लेने वाली शक्ति और नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास: मुख्यमंत्री*

– *स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार और कौशल विकास से बदल रही उत्तराखंड की महिलाओं की तस्वीर*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून के भाऊवाला में तीज उत्सव के अवसर पर आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया तथा बड़ी संख्या में उपस्थित मातृशक्ति से आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए उनके विचार, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं से खुलकर संवाद करने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां तभी अधिक प्रभावी बनती हैं जब उनमें जनता की आवाज और अनुभव शामिल होते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड की मातृशक्ति आने वाले समय में भी राज्य के विकास और समृद्धि की सबसे बड़ी शक्ति बनेगी तथा ‘सशक्त नारी–समृद्ध उत्तराखंड’ का संकल्प साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी महिलाओं को तीज पर्व और स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए उनके स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद के प्रति आभार व्यक्त किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसकी मातृशक्ति है, जिसने कठिन परिस्थितियों में परिवार, समाज और राज्य को नई दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के संघर्ष से लेकर आज के विकास यात्रा तक महिलाओं की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं केवल घरेलू दायित्वों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार, स्थानीय उत्पादों, कृषि, बागवानी, होमस्टे, उद्यमिता और तकनीक आधारित गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि उन्हें अवसर, सम्मान, नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है। उज्ज्वला योजना, मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, लखपति दीदी योजना, मिशन शक्ति, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी अनेक पहलों ने महिलाओं के जीवन में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन लाया है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का मूल उद्देश्य महिलाओं को विकास की सहभागी और देश की आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी महिलाओं की शिक्षा, स्वरोजगार, कौशल विकास, आजीविका, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत तथा सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया गया है। एकल महिला स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और लखपति दीदी योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और लाखों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे मंच विकसित किए जा रहे हैं, जबकि ‘ड्रोन दीदी’, ‘सोलर सखी’ और ‘महिला सारथी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आधुनिक तकनीक और नए आर्थिक अवसरों से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति के स्वास्थ्य और सम्मान को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। ईजा-बोई शगुन, महालक्ष्मी किट, पोषण योजनाएं, आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकत्रियों के मानदेय में वृद्धि, नंदा गौरा योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क धार्मिक यात्रा जैसी पहलें इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, सम्मानित और सशक्त नागरिक के रूप में स्थापित करना है।

 

इस अवसर पर विधायक श्री सहदेव सिंह पुंडीर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं, विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

आगे पढ़ें
मुख्यमंत्री ने नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का किया निरीक्षण*


*भाऊवाला से लौटते समय नंदा की चौकी पहुंचकर व्यवस्थाओं का लिया जायजा*

*एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने पर राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 12 घंटे के भीतर कराया था पुनर्निर्माण*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सहसपुर के भाऊवाला में आयोजित महिला संवाद एवं सम्मान कार्यक्रम से वापस लौटते समय प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी पुल के एप्रोच रोड के पुनर्निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कार्यस्थल पर पहुंचकर पुनर्निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

उल्लेखनीय है कि नंदा की चौकी पुल का एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को तत्काल राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देशन में युद्धस्तर पर कार्य करते हुए एप्रोच रोड का पुनर्निर्माण मात्र 12 घंटे के भीतर पूर्ण कर लिया गया, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था शीघ्र सामान्य हो सकी और आमजन को होने वाली असुविधा से राहत मिली।

मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्माण कार्य में सलंग्न अधिकारियों, अभियंताओं एवं कार्मिकों के त्वरित एवं समर्पित प्रयासों की सराहना भी की।

आगे पढ़ें
https://www.facebook.com/share/v/1DHQTucqGp/

आगे पढ़ें

https://www.facebook.com/share/v/1DQJqiFqVo आगे पढ़ें

*तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना का माननीय मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, निचले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के निर्देश*
*मुख्यमंत्री धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से ली घटना की जानकारी*
देहरादून। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अत्यधिक जलप्रवाह के कारण बेली ब्रिज बहने की घटना का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन से घटना की जानकारी ली। माननीय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निचले क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाने, संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखने के निर्देश दिए।

माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा बेली ब्रिज बहने के कारण आसपास के गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन को विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा की आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गो से ग्रामीणों तक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

माननीय मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि नदी-नालों एवं जलप्रवाह वाले क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रखा जाए और आवश्यकता के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रोका जाए। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी न रहने तथा सभी संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगातार बदल रहे मौसम को देखते हुए प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ कार्य करे और किसी भी संभावित स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

*SEOC से लगातार स्थिति पर नजर : विनोद कुमार सुमन*
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार 24×7 निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से लगातार समन्वय किया जा रहा है तथा आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज अत्यधिक जलप्रवाह के कारण पूरी तरह बह गया है। घटना के संबंध में प्राप्त सूचना के अनुसार नाले में अचानक बढ़े पानी के तेज बहाव की चपेट में आने से एक व्यक्ति एवं एक वाहन (कैंपर) के बहने की सूचना प्राप्त हुई है।

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों द्वारा भी आवश्यक राहत एवं बचाव कार्रवाई की जा रही है। घटना स्थल पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
मलारी की ओर आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित
सुरक्षा के दृष्टिगत ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर मलारी की ओर वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। प्रशासन द्वारा लोगों को प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्र से दूर रहने तथा मार्ग की स्थिति सामान्य होने तक इस मार्ग पर यात्रा न करने की सलाह दी गई है।

सचिव आपदा प्रबंधन ने कहा कि नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने तथा अचानक तेज जलप्रवाह की संभावना को देखते हुए निचले एवं नदी किनारे के क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संबंधित जिला प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक एहतियाती कदम उठाने तथा लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

आगे पढ़ें

महानिदेशक डॉ टम्टा को मिलना दूसरी बार हुआ है।

उनसे जनता के दर्द को साझा किया। मुझे ना विधायक बनाना है और न सांसद हमें जितना बुद्धि दी है उसका जन हित में सदुपयोग कर मुझे तो जन सेवा के लिए जनता की बात करनी है। और सता से सवाल करना प्रेस का काम है।
प्रतापनगर टिहरी बांध प्रभावित प्रतापनगर की आबादी विश्व में 12 देशों से ज्यादा है विकास के लिए बांध बनाया गया है तो जनता को सुविधाएं देने का कर्तव्य सरकार का है। इनकी कृपा से तीन महिलाओं ने प्रसव पीड़ा से दम तोड़ दिया है। कितने घर बर्बाद करने पर लगे हैं।एक मेडीकल कॉलेज/अस्पताल कोरोनेशन जैसा खोलने के लिए मै जनवरी 26 में मिला था । आज पुनः वही बात दोहराई है।इसके लिए प्रस्ताव भारत सरकार को प्रस्ताव भेजने हेतु हमने जन प्रतिनिधि यों के माध्यम से भिजवाए जाने हेतु सीएमओ को उन से कह लाया था। बीडीसी की बैठक में यह प्रस्ताव भिजवा दिया जाय। तब इसके लिए कार्य करने में उर्जा लगाई जाय । बीडीसी से प्रस्ताव भेजने का काम हमारे जन प्रतिनिधि करें। प्रति अखबार को भी दें। तो उस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री से संस्तुति की जा सकती है।
अब पुनः सीएमओ को संज्ञान में लाना है इस खबर  को शेयर कीजिए