मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अंतर्गत मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और लगन से कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद प्रदेश में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही मिलेट के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में सेब, कीवी, बागवानी एवं औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी, सचिव कृषि श्री एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव श्री आनंद श्रीवास्तव एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को स्थानीय आवश्यकता के अनुसार दिया जाए कौशल प्रशिक्षण*
*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकार्पण*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकापर्ण करने के साथ ही 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तातंरण किया।
मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि, अनुदान वितरण में पारदर्शिता बरते जाने के क्रम में ऑफलाईन अनुदान वितरण बन्द कर ऑनलाईन निस्तारण एवं डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए अब तक 11828 लाभार्थियों को कुल 29.89 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। आज 8005 लाभार्थियों को कुल 17.25 करोड़ की धनराशि वितरित की जा रही है। इस प्रकार विगत 06 माह में अब तक कुल 19833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय श्रमिकों को पलम्बर, इलैक्ट्रिशियन, मिस्त्री, कारपेन्टर आदि क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए। इसी तरह योगा एंव वेलनेस में रोजगार की सम्भावना को देखते हुए आगामी सत्र में श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड निर्माण श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को कौशल प्रशिक्षण उपरान्त विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास करे। इसके लिए विदेश मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकृत एजेन्सी के माध्यम कार्यवाही की जाए। साथ ही श्रमिकों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनका समय- समय पर स्वास्थ्य परीक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इस हेतू श्रमिकों के कार्य स्थल पर ही चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार में व्यवधान उपलब्ध न हो।
इस मौके पर श्रमायुक्त श्री पीसी दुम्का ने बताया कि UKLCCMS Portal पोर्टल के माध्यम से अब तक 16000 अधिष्ठानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके जरिए शुल्क के रूप में 80,00000.00 (रूपये अस्सी लाख मात्र) धनराशि जमा हो चुकी है, साथ ही बोर्ड के पास अब तक कुल 324 करोड़ की धनराशि सेस के रूप में जमा हो चुकी है। जिसे श्रमिकों के कल्याण में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बीच सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। जिससे लाभार्थियों का लाईव फोटो एवं जियो ट्रेकिंग द्वारा सामग्री वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। इस मौके पर उपायुक्त विपिन कुमार सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार श्री भास्कर पोखरियाल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय पोखरियाल का सरल स्वभाव और पत्रकारिता के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।
महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार श्री भास्कर पोखरियाल के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में नैनीताल एवं ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की।*
*मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनका त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।*
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगण अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना शासन व प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अल्पकालिक प्रकृति के कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए, जबकि दीर्घकालिक योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि ऐसी योजनायें, जिनमें एक से अधिक विभागों की सहभागिता है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और समय पर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। इससे न केवल समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि उनके समाधान में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यों में गुणवत्ता और प्रगति दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात से पूर्व सभी बरसाती नालों की सफाई, सिल्ट हटाने तथा जल निकासी से संबंधित अन्य आवश्यक कार्य समय रहते पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध जल और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न समस्याएं रखी गईं, जिनमें सड़क निर्माण एवं मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा कार्य, जलभराव की समस्या सहित अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक समस्या का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें।
बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री सौरभ बहुगुणा, श्री राम सिंह कैड़ा, श्री बंशीधर भगत, श्री दीवान सिंह बिष्ट, श्री त्रिलोक सिंह चीमा, श्री शिव अरोड़ा, श्रीमती सरिता आर्य, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊं कमिश्नर श्री दीपक रावत एवं संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।
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चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- मदन कौशिक*
*कहा-सुरक्षित व सुगम यात्रा के लिए सरकार प्रतिबद्ध*
*चारधाम यात्रा पर माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया*
देहरादून। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी चारधाम यात्रा को आपदा सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को गढ़वाल मंडल के सभी सात जनपदों में व्यापक माॅक ड्रिल आयोजित की गई। यह माॅक ड्रिल अलग-अलग आपदाओं के काल्पनिक परिदृश्यों के साथ 50 विभिन्न स्थलों पर एक साथ संपन्न हुई, जिसमें जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायु सेना, अर्द्धसैनिक बल, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, परिवहन, लोक निर्माण, विद्युत, दूरसंचार तथा अन्य संबंधित विभागों ने सहभागिता की। यह माॅक ड्रिल सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित रही।
मा0 आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया तथा वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जनपदों के इंसीडेंट कमाण्डरों, उत्तरदायी अधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों एवं मैदानी टीमों से संवाद कर अभ्यास के दौरान समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता की जानकारी ली। मा0 मंत्री श्री मदन कौशिक ने कहा कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन तंत्र ने लंबा सफर तय किया है। राज्य ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, राहत एवं बचाव संसाधनों तथा संस्थागत समन्वय में लगातार सुधार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान, अर्थव्यवस्था और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे में यात्रा से जुड़े सभी विभागों, एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को यह संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जाए, ताकि देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देश-विदेश तक पहुंचे। उन्होंने मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये यात्रियों तक सभी एलर्ट पहुंचाने के निर्देश दिए ताकि वे सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने संवेदनशील एवं संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, संचार साधनों और राहत दलों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
माॅक ड्रिल में उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन मा0 श्री विनय रूहेला ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और आपात निकासी योजना को और प्रभावी बनाया जाए। यात्रा मार्गों पर भूस्खलन संभावित स्थलों, संकरे मार्गों, पुलों तथा संवेदनशील पड़ावों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, मौसम विभाग और यात्रा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सभी जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन और संचार नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सूचना, समन्वय और राहत कार्य सुनिश्चित हो सके।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील आयोजन के लिए एनडीएमए के सहयोग से यूएसडीएमए द्वारा प्रत्येक वर्ष माॅक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इस अभ्यास से मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ है तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और राहत-बचाव तंत्र की तैयारी और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि माॅक ड्रिल के माध्यम से संभावित चुनौतियों और जिन कमियों की पहचान हुई है, उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले दूर किया जाएगा। इस अवसर पर सचिव श्री आनंद स्वरूप, एनडीएमए के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल, एसीईओ प्रशासन श्री महावीर सिंह चैहान, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, कमाण्डेंट एसडीआरएफ श्री अर्पण यदुवंशी, कमाण्डेंट एनडीआरएफ श्री संतोष कुमार, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे।
*हेली सेवाओं के सुरक्षित संचालन पर दिए दिशा-निर्देश*
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने देहरादून में माॅक ड्रिल के तहत विभिन्न स्थलों का फील्ड निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम ने सबसे पहले सहस्त्रधारा हेलीपैड पहुंचकर हेलीकाॅप्टर संचालन से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया, मौसम आधारित निगरानी तंत्र, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली तथा एयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। इस दौरान आपात स्थिति में हवाई राहत एवं निकासी की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके बाद टीम सपेरा बस्ती पहुंची, जहां अत्यधिक वर्षा के कारण रिस्पना नदी में बाढ़ आने की काल्पनिक स्थिति पर राहत एवं बचाव अभ्यास किया गया। टीम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और संसाधनों के उपयोग की जानकारी ली। इसके पश्चात विशेषज्ञ टीम ने कोरोनेशन अस्पताल पहुंचकर आकस्मिक स्थिति में मरीजों की बढ़ती संख्या से निपटने, ट्रायेज सिस्टम, आपात चिकित्सा, अतिरिक्त बेड व्यवस्था, ऑक्सीजन सपोर्ट, रेफरल प्रबंधन तथा अस्पताल के संकट प्रबंधन तंत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन के साथ क्राइसेस मैनेजमेंट, संसाधनों की उपलब्धता तथा आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की गई।
*विभिन्न परिदृश्यों से परखी तैयारियां*
रुद्रप्रयाग जनपद में केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर की आपात स्थिति का अभ्यास किया गया। तकनीकी खराबी के कारण हार्ड लैंडिंग की सूचना मिलते ही प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और हेली रेस्क्यू टीम तत्काल सक्रिय हुई। घायलों को प्राथमिक उपचार देकर सुरक्षित निकासी की गई तथा हेलीपैड क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आपात संचालन का अभ्यास किया गया।
चमोली जनपद में बदरीनाथ-गोविंदघाट मार्ग पर अचानक भारी हिमपात और हिमस्खलन जैसी स्थिति में यात्रियों के फंसने का परिदृश्य लिया गया। राहत दलों ने मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित होल्डिंग एरिया तक पहुंचाने, भोजन, दवा और आश्रय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का अभ्यास किया।
उत्तरकाशी जनपद में गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने से आई आकस्मिक बाढ़ की स्थिति पर अभ्यास किया गया। सूचना मिलते ही निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया, संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया तथा संचार और राहत समन्वय की व्यवस्था का परीक्षण किया गया।
देहरादून जनपद में ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग लगने और भगदड़ की स्थिति पर माॅक ड्रिल हुई। दमकल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला, घायलों को उपचार उपलब्ध कराया और राहत शिविर संचालन का अभ्यास किया।
पौड़ी जनपद के श्रीनगर स्थित धर्मशाला में भूकंप के झटकों के बाद निकासी और राहत का अभ्यास किया गया। झटके महसूस होते ही धर्मशाला में ठहरे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, भवन की सुरक्षा का आकलन किया तथा खुले सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी राहत व्यवस्था सुनिश्चित की।
टिहरी जनपद में टिहरी बांध से नियंत्रित जल छोड़े जाने के बाद देवप्रयाग और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर माॅक अभ्यास किया गया। अलर्ट मिलते ही प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। नदी किनारे ठहरे यात्रियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, घाटों और निचले इलाकों को खाली कराया गया तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से लोगों को सतर्क किया गया।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने की जनगणना 2027 के लिए स्व-गणना*
*डिजिटल जनगणना में उत्तराखंड ने बढ़ाया कदम, मुख्यमंत्री ने की सक्रिय भागीदारी*

*सीएम धामी ने जनता से की अपील—स्वयं करें स्व-गणना, बनें भागीदार*
*अधिकारियों की मौजूदगी में शुरू हुआ जनगणना का पहला चरण मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जनगणना 2027 के अंतर्गत अपनी स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य में इस महत्वपूर्ण अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर जनगणना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मुख्यमंत्री को डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर अग्रसर हुआ है, जो पारदर्शिता, सटीकता और जनभागीदारी को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को डिजिटल युग में एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाने वाली है।
जनगणना 2027 का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (HLO) है, जिसके अंतर्गत आवासीय स्थिति, सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जा रही है। इस बार ‘स्व-गणना’ की सुविधा के माध्यम से नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और त्रुटिरहित होगी।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अधिकारियों से जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह डेटा राज्य और देश की नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इसलिए इसकी शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि
“ *जनगणना 2027 देश के विकास की आधारशिला है। डिजिटल माध्यम से की जा रही यह जनगणना पारदर्शिता और सटीकता को सुनिश्चित करेगी। मैं प्रदेशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे स्वयं आगे आकर स्व-गणना करें और इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें।”*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक स्व-गणना पोर्टल का उपयोग कर अपने परिवार की सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल आपकी भागीदारी को सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होगा।
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान एकत्रित सभी आंकड़ों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं और इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल सशक्तिकरण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर श्रीमती गीता धामी, निदेशक (जनगणना संचालन) श्रीमती ईवा श्रीवास्तव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे |
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की वार्ता, समाधान की दिशा में पहल*
*इंजीनियर्स की मांगों के परीक्षण हेतु सब-कमेटी गठन*

*जनहित को प्राथमिकता, संवाद से समाधान की ओर बढ़ी सरकार और इंजीनियर्स*
उत्तराखंड में चल रही डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के बीच आज मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारियों ने भेंट कर अपनी विभिन्न मांगों के संबंध में विस्तृत चर्चा की।
महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी 27 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें पदोन्नति, वेतनमान और पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे |
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है और उनकी सभी मांगों का समुचित परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान के लिए एक सब-कमेटी का गठन किया जाएगा, जो संबंधित बिंदुओं का गहन अध्ययन कर शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार संवाद और समन्वय के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों को सुचारू बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और राज्य के विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सभी पक्षों को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने इंजीनियर्स महासंघ से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक रुख अपनाएं और वार्ता प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि शीघ्र समाधान निकल सके। उन्होंने कहा कि “राज्य सरकार डिप्लोमा इंजीनियर्स की मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। संवाद और समन्वय के माध्यम से हम सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
बैठक में सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री दिलीप जावलकर, श्री पंकज कुमार पांडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे |

