चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अधिनियम कानून का साइंटिफिक-एनालिसिस और संविधान के आधार, जानिए सभी समाचार

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🔭 साइंटिफिक-एनालिसिस🔬

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अधिनियम कानून का साइंटिफिक-एनालिसिस और संविधान के आधार पर चुनाव आयुक्त की पुरी चयन प्रक्रिया की रूपरेखा वैज्ञानिक-प्रबंधन सिद्धान्त से

संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग किसे कहां उसकी परिभाषा भी व्याखित करी व उससे सम्बद्धित सारे नियम अनुच्छेद 324 में विस्तार से बताया परन्तु चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया की जवाबदेही स़ंसद पर डाली | यह जवाबदेही आज संविधान लागू होने के 75 सालों बाद भी भारी पड रही हैं और हालात ऐसे लग रहे हैं कि आने वाले 75 वर्षों तक भी यह मामला खत्म नहीं हो पायेगा |

उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने इसके लिए व्यवस्था कर दी परन्तु संसद ने इस व्यवस्था को हटा एक अलग कानून बना दिया | अब यह कानून दुबारा संविधान पीठ के विचाराधीन हैं | भारत का संविधान एक किताब रूप में हैं इसलिए पदासीन लोग अपनी बुद्धि व अपने फायदे एवं स्वार्थ के अनुरूप उसका अलग-अलग अर्थ समझाते है |

युवा वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार बिराणी ने अपने पेटेंटेड आविष्कार असली ए. डी. सिरिंज की फाईल जो करीबन 3 किलो 500 ग्राम व 10 पेज की संकलन सूचि वाली थी, जो भारत ही नहीं पूरी दुनिया के दस्तावेजों को समाहित करे हुए थी, उसे महामहिम राष्ट्रपति को भेजा तो उन्होंने इन्ही दस्तावेजों को संकलन करने के आधार पर राष्ट्रपति के सम्मान में एक ग्राफिक्स इमेज बनाई और इस फाईल के कवर पेज पर लगाया | यह फोटो ही भारत की लोकतान्त्रिक व्यवस्था या सिस्टम की पहली बार बना ग्राफिक्स प्रारूप हैं | इस तरह दुनिया के किसी भी लोकतान्त्रिक देश की व्यवस्था या सिस्टम का ग्राफिक्स रूप आज तक नहीं बना |

लोकतन्त्र की व्यवस्था के इस ग्राफिक्स रूप पर राष्ट्रपति-सचिवालय की मोहर हैं व आधिकारिक हस्ताक्षर हैं। यह फाईल आधिकारिक रूप से दर्ज हुई | आज लोकतान्त्रिक व्यवस्था के इसी ग्राफिक्स रूप से भारत के मुख्य चुनाव आयोग व आयुक्तों की चयन प्रक्रिया को व्याखित करते हैं |

इस पूरे ग्राफिक्स में संवैधानिक पदों, राष्ट्रिय इमारतों व दस्तावेजों का इस्तेमाल करा हैं | इसमें कोई व्यक्ति विशेष का नाम इस्तेमाल नहीं करा हैं | सबसे ऊपर राष्ट्रपति-भवन वाला राष्ट्रिय ध्वज हैं | संविधान के अनुसार लोकतन्त्र के चार स्तम्भ हैं और संविधान में किसी भी स्तम्भ को बड़ा व छोटा नहीं बताया गया हैं अर्थात् चारों लोकतान्त्रिक स्तम्भ बराबर हैं | इसमें प्रत्यक्ष रूप से मीडीया के चौथे स्तम्भ की संरचना नहीं हैं परन्तु अप्रत्यक्ष रूप से स्पष्ट करा हैं इसलिए वर्तमान में हर व्यक्ति मीडिया को लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ कहता हैं |

इसके निचे धरातल पर पहला स्तर व्यवसाहिक ढांचे का हैं, दुसरा स्तर संविधान व कानून का हैं | धरातल के सबसे निचले स्तर पर समय-चक्र को दर्शाया हैं जो सभ्यताएं, वंशों, पूर्वजों का जीवन सार इन्सानों की राष्ट्रीयता व नैतिकता की धुरी पर घुमाता हैं | इस पूरे लोकतन्त्र के ग्राफिक्स के चारों तरफ एक घेरा हैं जो स्वायक्त संस्थाओं से बनता है। इसको साधारण भाषा में एक भवन की स्तम्भों वाली भाषा में दीवारे कह सकते हैं |

चुनाव आयोग एक स्वायत संस्था हैं जो प्राकृतिक न्याय की नैतिकता में पूरी तरह फिट बैठता हैं क्योंकि इसे विधायक से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव करवाना हैं अत: इनमें से किसी का चुनाव कार्य में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दबाव नहीं होगा | संविधान के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को शपथ राष्ट्रपति दिलायेंगे अर्थात् यह राष्ट्रपति के अधीन रहेगा | संविधान ने संसद को चुनाव आयुक्त के मेहनताना व कार्यकाल तय करने का अधिकार दिया हैं वो भी अन्य नियमों को ध्यान मे रखते हुए लेकिन वो लागू राष्ट्रपति की स्वीकृति से ही होंगे | इसका सीधा तात्पर्य चुनाव आयोग संसद यानि विधायिका और कार्यपालिका के अधीन नहीं होगा |

लोकतन्त्र के ग्राफिक्स में सभी स्वायत्त संस्थाओं को चारों तरफ एक सुरक्षा चक्र से प्रदर्शित किया हैं इसलिए चुनाव आयोग का स्थान संविधान के अनुसार ग्राफिक्स में यही हैं |

वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त हैं | हम इसे यही लेकर चलेंगे क्योंकि आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति के माध्यम से हुई और संविधान भी यही कहता हैं | मुख्य चुनाव आयुक्त को राष्ट्रपति शपथ दिलाते हैं जो कार्यक्षेत्र के आधार पर पुरी तरह सही हैं | इसका सीधा अर्थ भारत-सरकार के प्रमुख से अधिकार मील रहे हैं |

चुनाव आयोग में चुनावों को पुरा कराने के लिए पूरे देश में निचे से लेकर ऊपर तक पदों की एक पूरी श्रृंखला हैं | जो जिले के स्तर से चालू होती है। सबसे निचले स्तर पर कर्मचारियों का चयन अन्य विभागों के कर्मचारियों की चयन प्रक्रियाओं की तरह होगा |

इसके ऊपर प्रथम स्तर पर अधिकारीयों का चयन सिविल सर्विस परीक्षा के माध्यम से होगा | जिन्हें आप सामान्य भाषा में जिला स्तर के चुनाव अधिकारी कह सकते हैं |

इसके आगे के स्तर पर हर राज्य के नक्शें के आधार पर चार अलग-अलग जोन होंगे | यहां पर सिनियर चुनाव अधिकारी होगा | इस स्तर के लोगों का चयन सभी जिलों कि चुनाव अधिकारीयों मे से होगा | इसके लिए केन्द्रिय स्तर का चुनाव आयोग एक चयन प्रक्रिया चलायेगा जिसमें कार्य के अनुरूप सभी मापदण्डों को शामिल करेगा |

इससे आगे हर राज्य के प्रादेशिक चुनाव आयोग का स्तर होगा | जिसका चयन देश के सभी जोन के सिनियर चुनाव अधिकारीयों मे से ही होगा | केन्द्रिय स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त मिलकर एक चार्ट बेस अपडेट चयन प्रक्रिया बनायेंगे | यह प्रक्रिया संसद के माध्यम से अन्य कानूनों को ध्यान में रखते हुए विधि का रूप लेंगे और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू होंगे | यह अपडेट प्रक्रिया पांच वर्षों में एक बार होनी चाहिए |

इस चार्ट में शारीरिक, कार्यक्षमता, उपल्बधियां, शिकायतों की लिस्ट, व्यवसाहिक ज्ञान इत्यादि-इत्यादि कालम होंगे | प्रत्येक कॉलम के अधिकतम अंक निर्धारित होंगे जो सभी मिलकर सौंपे अंकों का अधिकतम चयन स्कैल बनायेंगे | कॉलमों का अपडेट एक के बाद एक चलता रहेगा व हर कॉलम की दुबारा पुनरावृत्ति छ महीने के बाद होनी चाहिए | इन सभी कॉलमों में जोन के सिनियर चुनाव अधिकारी जितने अंक प्राप्त करते हैं उन सभी अंकों का योगफल लगातार चार्ट में सर्विस कोड सहित मुख्य बेबसाइट व केन्द्रिय आफिस बोर्ड पर उपलब्ध रहेगा | जैसे ही किसी प्रादेशिक चुनाव आयोग का पद खाली होता हैं उस समय चार्ट में जो शीर्ष पर होगा उसका चयन नये प्रादेशिक चुनाव आयोग के रूप में माना जायेगा | विज्ञान के अनुसार एक श्रृंखला में चयन इसी तरह होता हैं | अधिकारियों का ट्रांसफर, पदोंअवन्नति, स्वैच्छिक सेवानिवृति व दण्डात्मक स्वरुप अस्थाई व स्थाई निलम्बन के लिए एक अलग प्रक्रिया होगी जो चयन प्रक्रिया को क्रास नहीं करेगी |

अब श्रृंखला चुनाव आयुक्तों के चयन पर आती हैं | चुनाव आयोग की संविधान में दी स्वायत्तता को बनाये रखने व कर्मचारियों के अनुभवों व नैतिक एवं ईमानदार कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरी मानते हुए इनका चयन प्रादेशिक चुनाव आयुक्तों में से ही होगा | संविधान के अनुसार चुनाव आयुक्तों की संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित कर सकती हैं | विज्ञान के अनुसार देश को भौगोलिक दिशाओं के अनुसार अलग-अलग जोन में बांटने पर जितने जोन बने उतने चुनाव आयुक्त बनने चाहिए | हर जोन 5 – 10 राज्यों से मीलकर बनेगा | यह जोन सामान्य तौर पर पांच होने चाहिए, उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम व मध्य | वर्तमान में दो चुनाव आयुक्त हैं इसलिए हम दो को लेकर ही आगे बढेंगे | इनकी चयन प्रक्रिया में भी प्रादेशिक चुनाव आयुक्तों की तरह एक चार्ट बेस चयन प्रक्रिया होगी |

अब मामला आता हैं भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया का | यहां भी संवैधानिक स्वायत्तता व ईमानदार कर्तव्यनिष्ठा को बनाये रखते हुए चयन चुनाव आयुक्तों मे से ही होगा न की किसी अन्य विभागों से | अब यह मामला भारत के चुनाव आयुक्त का हैं इसलिए इसके लिए चयन समिति का गठन करना पडेगा | इस चयन समिति के सदस्य भारत-सरकार के संवैधानिक पदों पर कार्यरत माननीय होंगे |

लोकतन्त्र के ग्राफिक्स प्रारूप को देखे तो उसके चार स्तम्भ हैं इसलिए हर स्तम्भ का प्रमुख भारत के मुख्य चुनाव आयोग की चयन समिति का सदस्य होगा | इसका सीधा-सीधा तात्पर्य न्यायपालिका वाले स्तम्भ के प्रमुख मुख्य न्यायाधीश, विधायिका वाले स्तम्भ से ऊपरी सदन राज्यसभा के सभापति, कार्यपालिका वाले स्तम्भ के प्रधानमंत्री व मीडिया वाले स्तम्भ के प्रमुख होंगे | मीडिया वाले स्तम्भ को संवैधानिक चेहरा व जवाबदेही वाला अधिकार नहीं दे रखा हैं इसलिए इस स्तम्भ के प्रमुख का स्थान रिक्त रहेगा | जैसे ही मीडिया के चौथे लोकतान्त्रिक स्तम्भ का प्रमुख बनता हैं व स्वत: भारत के मुख्य चुनाव आयोग की चयन समिति का सदस्य होगा |

़़इस चयन समिति का प्रमुख वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश होंगे क्योंकि संवैधानिक रूप से उनका पद बड़ा है | यह बाद में परिवर्तित हो जायेगा क्योंकि इससे भी बड़ा संवैधानिक पद इस चयन समिति में आयेगा |

मीडिया के स्तम्भ का प्रमुख इस चयन समिति में आ जाने पर सदस्यों की संख्या सम हो जायेगी | इससे सम्भावना बन जाती हैं कि 2 – 2 की बराबरी से चयन ही नहीं हो पायेगा | इसके लिए चयन-समिति में पांचवा सदस्य होगा | यह कौन होगा वो लोकतन्त्र के ग्राफिक्स से स्पष्ट हैं |

आपको जानकारी के लिए बता दूं कि यह पांचवा सदस्य महामहिम राष्ट्रपति नहीं होंगे व दो में से किसी एक का चयन इनके विवेक पर भी नहीं छोड सकते क्योंकि संविधान राष्ट्रपति को इस तरह फैसला लेने का अधिकार नहीं देता है।

वर्तमान कानून चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अधिनियम 2023 के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों के पदों पर विचार करने के लिए पहले खोज/सर्च समिति की स्थापना का प्रस्ताव हैं | इस खोज/सर्च समीति की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे और इसमें सचिव के पद से निचे के दो सदस्य भी होंगे जिनके पास चुनाव से सम्बन्धित मामलों का ज्ञान और अनुभव होगा |

यह खोज/सर्च समिति पूरी तरह असंवैधानिक हैं क्योंकि संविधान के अनुसार चुनाव आयोग को जो स्वायत्तता दी गई उसे पुरी तरह खत्म करती हैं व कार्य के आधार पर ईमानदार, अनुभवी, निष्ठावान वर्तमान कर्मचारियों पर कुठाराघात करती हैं | इसके साथ यह सिस्टम यानि व्यवस्था में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, चयनीत व्यक्ति का शोषण, अवसरवाद व व्यक्तिवाद को सैद्धान्तिक रूप से संवैधानिक शक्तियों के विकेन्द्रीयकरण को तबाह कर केन्द्रिकरण करने के चोर दरवाजे को खोलती है |

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति अधिनियम 2023 में चयन समिति का नियम हैं इसमें अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री, सदस्य के रूप में लोकसभा में विपक्ष के नेता यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता को मान्यता नहीं दी गई तो लोकसभा में सबसे बडे विपक्षी दल का नेता यह भूमिका निभायेगा | इसमें तिसरा सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केन्द्रिय कैबिनेट मंत्री होगा |

अब लोकतन्त्र के ग्राफिक्स रूप से इस चयन समिति का साइंटिफिक-एनालिसिस करते हैं | इसमें अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं जो कार्यपालिका के प्रमुख हैं जबकि चयन भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का हैं इसलिए चयन भी भारत-सरकार से होना चाहिए | अत: यह पूर्णतया संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन हैं |

इसमें कार्यपालिका वाले स्तम्भ से दो पदासीन हैं एक अध्यक्ष हैं व दुसरा उसके अधीन पद हैं | अत: बहुमत के आधार पर इसमें व्यक्तिवाद का अवगुण प्रभावी हैं |

अब उच्चतम न्यायालय द्वारा चयन समिति में भी तीन संवैधानिक पदों को रखा गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री व लोकसभा में विपक्ष के नेता को | इसमें मुख्य न्यायाधीश न्यायपालिका के स्तम्भ से हैं, प्रधानमंत्री कार्यपालिका वाले स्तम्भ से व लोकसभा में विपक्ष के नेता विधायिका के स्तम्भ से हैं | यह कमेटी पुरी तरह से लोकतान्त्रिक स्तम्भों के स्थायित्व व संवैधानिक पदों की प्राथमिकता वाली मर्यादा का पालन नहीं करती हैं | वर्तमान की परिस्थिति, कही संवैधानिक लूपपोल व व्यवस्था के ढांचागत रूप से सैद्धान्तिक तौर पर व्यवस्थित नहीं होने के कारण कुछ हद तक उचित हैं |

वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों व भारतीय तिरंगे के चक्र की गतीशीलता बनी रही व समय की मर्यादा भंग न हो इसके लिए उच्चतम न्यायालय की चयन समिति को प्रभावी करा जा सकता हैं परन्तु इसे समय चक्र की गतिशीलता व संविधान में लिखी गई बातों के गूंढ ज्ञान को समझने व लागू करने के साथ-साथ समय-समय पर अपडेट करना पड़ेगा अन्यथा इस चयन समिति के खिलाफ विरोध उत्पन होता रहेगा व उच्चतम न्यायालय में मुख्य चुनाव आयोग व चुनाव आयुक्तों के चयन को लेकर याचिकाएं दायर होती रहेगी व नई-नई संवैधानिक पीठ गठन का सिलसिला जारी रहेगा व आम लोगों के मुंह के निवाले पर से टैक्स के रूप में वसूला गया पैसा यूहि बहकर बर्बाद होता रहेगा |

शैलेन्द्र कुमार बिराणी
युवा वैज्ञानिक
आप इसे यूट्यूब पर वीडियो से भी समझ सकते हैं |

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयुर्वेद दिवस के अवसर पर भगवान धन्वन्तरि की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के आरोग्य, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा और समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण अंग है। स्वस्थ जीवनशैली और रोगों से बचाव में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज आयुर्वेद और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है।

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*मुख्य सचिव ने किया आईआईएम काशीपुर के देहरादून कैंपस का भूमिपूजन*

*विद्यार्थियों को मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर होंगे प्राप्त: मुख्य सचिव*


मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को देहरादून में भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर के देहरादून कैंपस का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने आईआईएम काशीपुर का कैंपस देहरादून में स्थापित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून में आईआईएम काशीपुर का कैंपस खुलने से प्रदेश के साथ ही इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में मैनेजमेंट से सम्बन्धित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों की उपलब्धता से उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने तथा नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर निदेशक आईआईएम काशीपुर प्रो. नीरज द्विवेदी एवं कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी देहरादून के मुख्य अभियंता श्री देवेंद्र प्रकाश सहित संबंधित विभागों एवं आईआईएम काशीपुर के अधिकारी उपस्थित रहे।

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*पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का बनेगा सशक्त केंद्र – मुख्यमंत्री*

*मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का किया शुभारंभ*

*ज्ञान के साथ संस्कार और आधुनिक विज्ञान के साथ भारतीय जीवन मूल्यों का समन्वय नई पीढ़ी के लिए आवश्यक – मुख्यमंत्री*

*हरिद्वार, 23 सितम्बर, 2026*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को पतंजलि वेलनेस योगग्राम, ग्राम औरंगाबाद, हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने गुरुकुलम् के शुभारंभ पर योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण तथा समस्त पतंजलि परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र है। देवभूमि में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का शुभारंभ भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की गुरुकुल परंपरा हजारों वर्षों से ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण का आधार रही है। गुरुकुलों में विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी बोध कराया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का भाव हमारी प्राचीन शिक्षा परंपरा का आधार रहा है। सच्ची शिक्षा वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, भय और संकीर्णता से मुक्त कर उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। यहां आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलती दुनिया में गुरुकुल शिक्षा की प्रासंगिकता और बढ़ी है। आधुनिक ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और संतुलित जीवन शैली की शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा, अनुसंधान और जन-स्वास्थ्य के क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है। स्वामी रामदेव ने योग को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि आचार्य बालकृष्ण द्वारा आयुर्वेद के अध्ययन, शोध और प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कौशल, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया है। उत्तराखण्ड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। अपनी जड़ों और विरासत से जुड़कर आधुनिक ज्ञान को अपनाने वाली युवा पीढ़ी भविष्य की चुनौतियों का अधिक आत्मविश्वास से सामना कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति के अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध विरासत को जाने, समझे और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विज्ञान, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी विकसित की जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों में साइंस एवं इनोवेशन सेंटर सहित वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर मिले हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् जैसे शिक्षण संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण सहयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् आने वाले समय में उत्तराखण्ड और देश के साथ विश्वभर के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, विज्ञान, योग और आयुर्वेद के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ज्ञान, संस्कार और सेवा की भावना के साथ समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक ज्वालापुर ई.रवि बहादुर, पूर्व कैबिनेट स्वामी यतिस्वारानंद, गोल्डन बाबा, स्वामी भू देव, जिलाध्यक्ष भाजपा आसुतोष शर्मा, जिला अध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्य मंत्री आदेश सैनी, श्यामवीर सैनी, अजीत सिंह, मेयर नगर निगम रुड़की अनीता अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकर्ता भाजपा राजेंद्र चौधरी, लव शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, जॉइन मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ, सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार हर गिरी, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा सहित बड़ी संख्या संस्थान के छात्र-छात्राएं एवं जनप्रतिनिधि में मौजूद रहे।
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*ज्योलिकोट, नैनीताल दूषित पेयजल प्रकरण पर मुख्य सचिव ने ली अधिकारियों के साथ बैठक*

*सम्बन्धित अधिकारियों की लापरवाही पर मुख्य सचिव ने जताई कड़ी नाराजगी*

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। मुख्य सचिव ने घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड स्तर के कार्मिकों का नेटवर्क हमारे पास है। इस नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए इनफॉर्मेशन एवं फीडबैक मैकेनिज्म विकसित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता या अन्य स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित समस्या की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रभावी सूचना एवं फीडबैक मैकेनिज्म तैयार कर नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए।

*प्रदेशभर की वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और भौतिक सत्यापन के दिए निर्देश*

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाटर सप्लाई सिस्टम में सोर्स से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग करायी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स तथा कंज्यूमर एंड पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता एवं उपयोग, पानी में कॉलीफॉर्म सहित अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की जांच और उनका नियमित रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिन्हित कराए जाने एवं जहां पुराने पाइप हैं, वहां उनके रिप्लेसमेंट सहित आवश्यक रेमेडियल मेजर्स लिए जाने के निर्देश दिए।

*पेयजल एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए एसओपी तैयार कर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए*

मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल लाईनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार कर उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी, इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

*पेयजल की नियमित क्वालिटी टेस्टिंग भी करेगा यूकेपीसीबी, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश*

मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी, सरफेस वाटर के साथ ही प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल की क्वालिटी टेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का सरप्राइज इंस्पेक्शन भी कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार के मामले सामने आते हैं, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ एवं सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को रिएक्टिवेट करते हुए डॉक्टरों की टीम को सक्रिय रखा जाए तथा अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस एवं जांच की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सर्विलांस सिस्टम किस प्रकार कार्य कर रहा है, इसकी नियमित समीक्षा की जाए।

*नियमित सूचना एवं फीडबैक के लिए परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म किया जाए तैयार*

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहें। समितियां ग्राउंड लेवल अधिकारियों के साथ ब्रेनस्टॉर्मिंग कर अपने क्षेत्रों से नियमित सूचना एवं फीडबैक प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था वन टाइम एक्सरसाइज नहीं बल्कि परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म के रूप में विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार स्थायी स्टैंडिंग कमेटी गठित करते हुए नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग को अपने सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ-साथ इंस्टीट्यूशनल मेमोरी का भी उपयोग करना चाहिए। सेवानिवृत्त लाइनमैन एवं लंबे समय तक फील्ड में कार्य कर चुके अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं लेकर पुराने नेटवर्क, पाइपलाइन, क्रॉसिंग एवं संवेदनशील स्थलों की जानकारी प्राप्त करते हुए उनको दुरूस्त किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर सचिव डॉॅ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य महाप्रबन्धक जल संस्थान श्री डी.के. सिंह एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल श्री ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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लवप्रीत की संवेदनशील सोच ने छुआ मुख्यमंत्री धामी का दिल, घर पहुंचा टैब*

‘ *मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की चिंता की थी लवप्रीत ने*

*सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट देने की मुख्यमंत्री पहले ही कर चुके हैं घोषणा, DBT के माध्यम से मिलेगा लाभ*

*मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने घर पहुंचकर लवप्रीत को सौंपा टैब, चेहरे पर खिली खुशी*

किसी विद्यार्थी के सपने को पंख देने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, कई बार एक संवेदनशील सोच और किसी की जरूरत को समझने की भावना भी बड़ा बदलाव ला सकती है। ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने जब अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की बात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखी, तो उसकी यह संवेदनशील सोच मुख्यमंत्री के मन को छू गई।

लवप्रीत ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह विषय रखा था कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने चाहिए, ताकि संसाधनों के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करने वाली लवप्रीत की सोच ने मुख्यमंत्री श्री धामी को प्रभावित किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के दौरान ही विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को टैबलेट की सुविधा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा और प्रतिभा के विकास में बाधा न बने।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने लवप्रीत द्वारा कार्यक्रम के दौरान रखी गई आवश्यकता का भी व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारी लवप्रीत के घर पहुंचे और उसे टैब प्रदान किया।

घर पर जब शिक्षा विभाग के अधिकारी टैब लेकर पहुंचे तो लवप्रीत के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उसे शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई उसकी बात इतनी जल्दी अमल में भी आएगी। टैब मिलने पर उसने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए आत्मीयता से ‘थैंक्यू’ कहा।

लवप्रीत के लिए यह टैब केवल एक डिजिटल डिवाइस नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई को नई गति देने का माध्यम है। ऑनलाइन अध्ययन, शैक्षिक सामग्री तक आसान पहुंच और डिजिटल माध्यम से सीखने के अवसरों के साथ यह सुविधा उसकी शिक्षा को और बेहतर बनाने में सहायक होगी। साथ ही, लवप्रीत की कहानी यह भी संदेश देती है कि जब युवा केवल अपनी चिंता न कर समाज और अपने साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में सोचते हैं, तो उनकी संवेदनशीलता बदलाव का माध्यम बन सकती है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा और आवश्यक संसाधनों से जुड़ सके। आर्थिक या अन्य किसी कारण से संसाधनों की कमी विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके सपनों के आड़े न आए, इसके लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़कर उनके लिए सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लवप्रीत जैसी बेटियों की संवेदनशील सोच उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की पहचान है। अपनी जरूरत से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करना यह दर्शाता है कि हमारे युवाओं में केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा ही विकसित और समर्थ उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

राज्य सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से टैबलेट उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की पहुंच को व्यापक बनाना है। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री और ज्ञान के विभिन्न माध्यमों से जुड़ने में सुविधा मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि गांव से लेकर शहर तक प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिल सके।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में लवप्रीत की कही गई बात और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता इस कार्यक्रम की उस भावना को भी सामने लाती है, जिसमें युवाओं को केवल अपनी बात रखने का मंच ही नहीं, बल्कि उनकी सोच और सुझावों को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर दिया जा रहा है।

लवप्रीत के घर पहुंचा यह टैब इसी संवाद और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण है—जहां एक छात्रा ने दूसरों की चिंता रखी, मुख्यमंत्री ने उस भावना को समझा और उसे सहायता के रूप में जमीन पर उतारने की पहल की।
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*लवप्रीत की संवेदनशील सोच ने छुआ मुख्यमंत्री धामी का दिल, घर पहुंचा टैब*

‘ *मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की चिंता की थी लवप्रीत ने*

*सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट देने की मुख्यमंत्री पहले ही कर चुके हैं घोषणा, DBT के माध्यम से मिलेगा लाभ*

*मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने घर पहुंचकर लवप्रीत को सौंपा टैब, चेहरे पर खिली खुशी*

 

किसी विद्यार्थी के सपने को पंख देने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, कई बार एक संवेदनशील सोच और किसी की जरूरत को समझने की भावना भी बड़ा बदलाव ला सकती है। ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने जब अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की बात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखी, तो उसकी यह संवेदनशील सोच मुख्यमंत्री के मन को छू गई।

लवप्रीत ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह विषय रखा था कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने चाहिए, ताकि संसाधनों के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करने वाली लवप्रीत की सोच ने मुख्यमंत्री श्री धामी को प्रभावित किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के दौरान ही विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को टैबलेट की सुविधा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा और प्रतिभा के विकास में बाधा न बने।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने लवप्रीत द्वारा कार्यक्रम के दौरान रखी गई आवश्यकता का भी व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारी लवप्रीत के घर पहुंचे और उसे टैब प्रदान किया।

घर पर जब शिक्षा विभाग के अधिकारी टैब लेकर पहुंचे तो लवप्रीत के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उसे शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई उसकी बात इतनी जल्दी अमल में भी आएगी। टैब मिलने पर उसने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए आत्मीयता से ‘थैंक्यू’ कहा।

लवप्रीत के लिए यह टैब केवल एक डिजिटल डिवाइस नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई को नई गति देने का माध्यम है। ऑनलाइन अध्ययन, शैक्षिक सामग्री तक आसान पहुंच और डिजिटल माध्यम से सीखने के अवसरों के साथ यह सुविधा उसकी शिक्षा को और बेहतर बनाने में सहायक होगी। साथ ही, लवप्रीत की कहानी यह भी संदेश देती है कि जब युवा केवल अपनी चिंता न कर समाज और अपने साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में सोचते हैं, तो उनकी संवेदनशीलता बदलाव का माध्यम बन सकती है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा और आवश्यक संसाधनों से जुड़ सके। आर्थिक या अन्य किसी कारण से संसाधनों की कमी विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके सपनों के आड़े न आए, इसके लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़कर उनके लिए सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लवप्रीत जैसी बेटियों की संवेदनशील सोच उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की पहचान है। अपनी जरूरत से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करना यह दर्शाता है कि हमारे युवाओं में केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा ही विकसित और समर्थ उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

राज्य सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से टैबलेट उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की पहुंच को व्यापक बनाना है। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री और ज्ञान के विभिन्न माध्यमों से जुड़ने में सुविधा मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि गांव से लेकर शहर तक प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिल सके।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में लवप्रीत की कही गई बात और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता इस कार्यक्रम की उस भावना को भी सामने लाती है, जिसमें युवाओं को केवल अपनी बात रखने का मंच ही नहीं, बल्कि उनकी सोच और सुझावों को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर दिया जा रहा है।

लवप्रीत के घर पहुंचा यह टैब इसी संवाद और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण है—जहां एक छात्रा ने दूसरों की चिंता रखी, मुख्यमंत्री ने उस भावना को समझा और उसे सहायता के रूप में जमीन पर उतारने की पहल की।

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*श्रीबदरीनाथ धाम में परंपरा-विरुद्ध आयोजनों, सांस्कृतिक फूहड़ता एवं धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन पर घोर आपत्ति*

23 सितम्बर 2026
ज्योतिर्मठ, चमोली, उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम के आध्यात्मिक माहात्म्य के विषय में सभी पुराणों में बिस्तार से वर्णन किया गया है , ब्रह्मा जी के मानस पुत्र धर्म की संतान के रूप में भगवान ‘नर’ और ‘नारायण’ का प्राकट्य हुआ। उन्होंने समस्त संसार के कल्याण हेतु बदरिकाश्रम के पावन क्षेत्र में आकर अत्यंत कठिन एवं दीर्घकालिक तपस्या की । शिवपुराण (कोटिरुद्र संहिता, 19वां अध्याय): बदरीवन की यात्रा करने वाला मनुष्य जीवनमुक्त हो जाता है, क्योंकि वहाँ भगवान नर-नारायण स्वयं लोक-कल्याण हेतु साधना में लीन हैं।

*शांति और संयम का मापदंड* बदरिकाश्रम वह पावन क्षेत्र है जहाँ ऋषियों-मुनियों ने अत्यंत शांति और संयम का नियम तय किया है। इस क्षेत्र में शंख बजाना तक वर्जित है, ताकि तपस्यारत भगवान नर-नारायण एवं साधकों की एकाग्रता में कोई विघ्न न पड़े दूसरी ओर वर्तमान व्यवस्था रोज बडी बडी मशीनों के शोर से और इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से यहां का धार्मिक वातावरण बिगाड रही है ।

* हिमालयी संस्कृति की संवेदनशीलता: उत्तराखंड की परंपरा अत्यंत गंभीर और मर्यादित है। यहाँ ब्रह्मकमल जैसे अति संवेदनशील पुष्प को भी विशेष नियमों, पवित्रता और श्रद्धा के साथ प्रभु चरणों में अर्पित किया जाता है, जहां फूल के संरक्षण के लिए हम इतने प्रतिबद्ध हैं, वहां इस तरह का ध्वनि प्रदूषण, सांस्कृतिक प्रदूषण कहां तक उचित है ?

परंपरा और मर्यादा के उल्लंघन पर गंभीर आपत्ति

कपाट बंद रहने की अवधि में देव-पूजा का उल्लंघन: भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद रहने पर 6 महीने मनुष्यों की ओर से रावल जी पूजा करते हैं और शेष 6 महीने देवताओं की ओर से श्री नारद जी पूजा करते हैं। इस अवधि में मानवीय गतिविधियाँ पूर्णतः वर्जित रहती हैं । किंतु इस वर्ष कपाट खुलने से पूर्व ही स्थानीय सैन्य अधिकारियों एवं आयोजकों द्वारा कार्यक्रम विशेष का आयोजन किया गया, जो विगत अनेक वर्षों के इतिहास में अभूतपूर्व निन्दनीय घटना में से अभिन्न है और धार्मिक परंपरा का सीधा-सीधा उल्लंघन है ।

सांस्कृतिक उत्सव के नाम पर फूहड़ता

हाल ही में ‘अराइवल प्लाजा’ के समीप फेस्टिवल के नाम पर बड़े-बड़े डीजे साउंड लगाकर नाच-गाने और फूहड़ता का प्रदर्शन किया गया। हालाँकि उत्तराखंड के व्यंजन, वेशभूषा और सेना के शौर्य का प्रदर्शन प्रशंसनीय है, परंतु तेज डीजे, अश्लील गाने और फूहड़ता बदरीनाथ धाम की पावन मर्यादा के सर्वथा विपरीत है ।

उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की प्रमुख मांग –

* माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी से अपील इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें ।

उत्तराम्नाय ज्योतिर्मठ की से प्रदेश सरकार के मुखिया का ध्यान इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की ओर आकृष्ट करते हुए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया जाता है कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई किया जाए ।
परंपराओं के उल्लंघन, मर्यादाहीन कृत्यों और फूहड़ आयोजनों के जिम्मेदार आयोजकों के विरुद्ध निष्पक्ष व कठोर कार्रवाई की जाए ।

अमर्यादित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध: बदरीनाथ धाम एवं अन्य तीर्थ क्षेत्रों में डीजे, फूहड़ प्रदर्शन और शोरजी

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*अति महत्वपूर्ण*
*अपील / सूचना*
🙏🌹🙏 / 📢 📢 📢

मान्यवर ,
हम लोग 27 सितंबर 2026 को
*UGC Equity Regulations, 2026*,
*SC-ST (Prevention of Atrocities) Act 1989*
तथा
*“Reform and Restructuring of the Reservation System”* (आरक्षण व्यवस्था में व्यापक बदलाव/पुनर्गठन )
पर एक सेमिनार राजधानी वेडिंग पॉइंट (शास्त्री नगर,रिस्पना पुल तथा जोगीवाला चौक के मध्य स्थित )
में आयोजित कर रहे हैं,
जिसमें विशेष तौर पर बाहरी राज्यों से इस विषय के प्रख्यात वक्ता/अधिवक्ता भी शामिल हों रहे हैं ।
हम आपको इस कार्यक्रम में सादर आमंत्रित करते हैं,
आपके आने से कार्यक्रम की शोभा भी बढ़ेगी ।

आप से यह विशेष विनम्र अनुरोध है कि आप अपने साथ साथ अपने अधिकतम परिचितों को इस सेमिनार में प्रतिभाग करने हेतु प्रेरित करेंगे,
ऐसे अवसर बहुत मुश्किल से ही प्राप्त हो पाते हैं ।
मुझे आप पर पूर्ण विश्वास है कि आप मेरे द्वारा व्यक्तिगत तौर पर किए गए इस विनम्र अनुरोध को अवश्य स्वीकार करेंगे ।
(दिन का भोजन भी कार्यस्थल पर ही है )

*दिनांक 27 सितम्बर , रविवार को आपके दर्शनों की प्रतीक्षा में*
एवं
उससे पूर्व यदि आप कोई सुझाव देना चाहें तो उसकी प्रतीक्षा में ।

आपका शुभेच्छु
इं.विनोद नौटियाल।
राष्ट्रीय महासचिव ,
अखिल भारतीय समानता मंच।

कार्यक्रम स्थल :-
राजधानी वेडिंग पॉइंट ,
हरिद्वार रोड , देहरादून । दिनांक :-
27/09/2026 (रविवार)
समय :-
10.00 बजे से 3.00 बजे साँय।