भटवाड़ा में ध्याणियों ने कराया श्री नर्सिंग महापुराण का भव्य आयोजन जानिए सभी समाचार

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भटवाड़ा में ध्याणियों ने कराया श्री नर्सिंग महापुराण का भव्य आयोजन
प्रतापनगर। पट्टी धारमंडल की ग्राम सभा भटवाड़ा स्थित श्री केदारी नर्सिंग देवता मंदिर प्रांगण में सोमवार को ध्याणियों के तत्वावधान में श्री नर्सिंग महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा एवं बुजुर्ग शामिल हुए और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।
इस अवसर पर प्रतापनगर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजेश्वर पैन्यूली ने कथा पंडाल पहुंचकर व्यासपीठ पर विराजमान व्यास श्री मुकेश रयाल से नर्सिंग महापुराण कथा का श्रवण किया तथा नर्सिंग देवता के औतारया श्री देवेंद्र जोशी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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आयोजन में ध्याणियों श्रीमती विजय लक्ष्मी रयाल, श्रीमती सरिता भद्री, श्रीमती मकानी देवी तिवाड़ी सहित ग्राम सभा की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्रामीणों ने नर्सिंग देवता से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी भी साझा की। इस दौरान ग्राम प्रधान शांति प्रसाद पेटवाल, ग्राम प्रधान गुड्डी देवी सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों से भी मुलाकात हुई।
कार्यक्रम में उत्तम सिंह, कुलवीर पंवार तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्यसेवक सदन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, प्राविधिक शिक्षा विभाग, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग तथा वन विभाग के अंतर्गत चयनित कुल 276 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। जिसमें वन विभाग के अंतर्गत 109, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत 88, प्राविधिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत 65 एवं नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग में चयनित 14 अभ्यर्थी शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनसेवा के नए दायित्व की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि वर्षों के परिश्रम, अनुशासन, संघर्ष और धैर्य के बाद युवाओं को यह सफलता प्राप्त हुई है, जो उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और समर्पण का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं जवाबदेह बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नकल माफियाओं और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप आज प्रदेश में युवाओं की सफलता का आधार केवल उनकी योग्यता और मेरिट है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कि पिछले साढ़े चार वर्षों में लगभग 33 हजार युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं मेरिट के आधार पर सरकारी सेवाओं से जोड़ने का कार्य किया गया है। उन्होंने नवचयनित कार्मिकों से अपेक्षा की कि वे अपनी कार्यकुशलता, ईमानदारी, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के माध्यम से जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जब योग्य और कर्मठ युवा आगे आते हैं, तब विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों में चयनित युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के कार्मिक प्रदेश के सुनियोजित विकास में योगदान देंगे, प्राविधिक शिक्षा विभाग से जुड़े युवा तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को नई दिशा देंगे, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के कार्मिक मातृ एवं बाल कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन करेंगे तथा वन विभाग में चयनित युवा राज्य की वन संपदा एवं जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत-2047 के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार भी विकसित उत्तराखंड के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आधारभूत संरचना का तेजी से विकास हो रहा है, निवेश बढ़ रहा है तथा युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी कार्यसंस्कृति को बढ़ावा दे रही है, जहां घोषणा से अधिक डिलीवरी, वादों से अधिक परिणाम और राजनीति से अधिक विकास को महत्व दिया जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी नवचयनित युवा अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते हुए उत्तराखंड के विकास और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, डॉ. धन सिंह रावत, श्रीमती रेखा आर्या, श्री खजान दास, राज्यसभा सांसद श्री नरेश बंसल, विधायक श्रीमती सविता कपूर, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, श्री चन्द्रेश कुमार, डॉ. आर. राजेश कुमार एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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*‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ सीमांत क्षेत्रों में नए विश्वास, पर्यटन और रोजगार का बनेगा माध्यम- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी*

*नीति घाटी का जागरण सीमांत स्वाभिमान की नई इबारत- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी*

*नीति घाटी में गूंजा फिट इंडिया का संदेश, ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न*

सीमांत जनपद चमोली की सुरम्य एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति घाटी में 31 मई से 2 जून तक आयोजित हो रहे ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के अंतर्गत विभिन्न स्पर्धाओं के विजेताओं को सम्मानित करते हुए पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत आयोजित यह आयोजन सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों को “देश का पहला गांव” मानते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ जैसे आयोजन उनका जीवंत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होने के साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नीति क्षेत्र में होम स्टे की संख्या 35 से बढ़कर 450 से अधिक हो चुकी है, जो इस क्षेत्र में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि 11 हजार फीट की ऊंचाई पर आयोजित यह अल्ट्रा रन युवाओं के अदम्य साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है। “नीति घाटी का यह जागरण केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के स्वाभिमान, स्वावलंबन और नए विश्वास की नई इबारत है।

उन्होनें कहा यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि उत्तराखंड की हर सीमांत घाटी तक पहुंचेगा।” मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता पर सभी आयोजकों, भारतीय सेना, आईटीबीपी तथा स्थानीय जनता को शुभकामनाएं दीं।

पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना एवं आईटीबीपी के सहयोग से आयोजित इस अनूठे आयोजन में देश के 27 राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देना, स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाना तथा युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के अंतर्गत 5, 10, 21, 42 एवं 75 किलोमीटर की विभिन्न स्पर्धाओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मलारी गांव में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पर्यटन सचिव श्री धीराज गर्ब्याल सहित अन्य अतिथियों ने विजेताओं को पुरुष्कार धनराशि एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

प्रतियोगिताओं के प्रमुख परिणाम:

05 किलोमीटर (18 वर्ष से कम आयु वर्ग) पुरुष वर्ग में हर्षित यादव प्रथम, आयुष कुमार द्वितीय एवं शिवम भुजवान तृतीय रहे। महिला वर्ग में रेखा प्रथम, भावना रावत द्वितीय एवं राधिका तृतीय स्थान पर रहीं।

05 किलोमीटर ओपन वर्ग के पुरुष वर्ग में प्रकाश भट्ट प्रथम, मोहम्मद अशरफ द्वितीय एवं मोहम्मद क्वासम तृतीय रहे। महिला वर्ग में अर्पिता सैनी प्रथम, वाई. तिमनाह द्वितीय एवं अनिता चौहान तृतीय रहीं।

10 किलोमीटर ओपन वर्ग के पुरुष वर्ग में सुरेंद्र सिंह प्रथम, मन्नू सिंह द्वितीय एवं सजन पंवार तृतीय रहे। महिला वर्ग में पूजा बिष्ट प्रथम, निशा नेगी द्वितीय एवं ईशा बर्त्वाल तृतीय रहीं।

10 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में दलबीर सिंह प्रथम, गोविंद कुमार राणा द्वितीय एवं सतीश चंद चौहान तृतीय रहे।

21 किलोमीटर ओपन वर्ग में लोकेश कुमार प्रथम, दीपक रावत द्वितीय एवं कुलदीप नेगी तृतीय रहे। महिला वर्ग में प्रिया प्रथम, निकिता खोलिया द्वितीय एवं आयुषी कनवाल तृतीय रहीं।

21 किलोमीटर 50+ आयु वर्ग में दीपेश जोशी प्रथम, नंदन सिंह द्वितीय एवं पवन तृतीय रहे। महिला वर्ग में अनुदा तमांग प्रथम, अंजू कुटियाल द्वितीय एवं इंदिरा दीवान तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर ओपन वर्ग में यश राज प्रथम, सत्यम द्वितीय एवं महेंद्र सिंह बिष्ट तृतीय रहे। महिला वर्ग में दिया प्रथम, अर्पिता सैनी द्वितीय एवं अंजू तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर 40+ आयु वर्ग में सतपाल प्रथम, महेश यादव द्वितीय एवं कलम सिंह बिष्ट तृतीय रहे। महिला वर्ग में मीना कंडारी प्रथम, सुष्मिता राय द्वितीय एवं शांति राय तृतीय रहीं।

42 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में थॉमस प्रथम, मुकेश राणा द्वितीय एवं सतीश चंद्रा तृतीय रहे।

75 किलोमीटर ओपन वर्ग में दिगंबर सिंह प्रथम, अर्जुन प्रधान द्वितीय एवं विजय सिंह तृतीय रहे। महिला वर्ग में मीनाक्षी प्रथम, मीना कुमारी सुब्बा द्वितीय एवं फलेश्वरी रजवाड़े तृतीय रहीं।

75 किलोमीटर 50+ आयु वर्ग में चरण सिंह प्रथम, किशन बढ़वार द्वितीय एवं रतन सिंह सोनल तृतीय रहे। महिला वर्ग में आशा सिंह प्रथम एवं कशीरसगरा रमसमिता द्वितीय रहीं।

75 किलोमीटर 60+ आयु वर्ग में कृष्णा तमांग प्रथम, महिपाल सिंह द्वितीय एवं शिवेंद्र सिंह बिष्ट तृतीय रहे।

इस महाआयोजन में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक भागीदारी देखने को मिली। देश के 27 राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागियों ने सीमांत क्षेत्र में आयोजित इस आयोजन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।

श्रेणीवार प्रतियोगिताओं में 75 किलोमीटर अल्ट्रा रन में 160 प्रतिभागी, 42 किलोमीटर मैराथन में 155 प्रतिभागी, 21 किलोमीटर हाफ मैराथन में 215 प्रतिभागी, 10 किलोमीटर शॉर्ट रन में 210 प्रतिभागी तथा 5 किलोमीटर फन रन में 260 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कुल मिलाकर 1100 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न दौड़ स्पर्धाओं में प्रतिभाग किया।

कल 2 जून, आयोजन के अंतिम दिन में गमसाली से मलारी के मध्य 30 किलोमीटर एमटीबी चैलेंज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें 100 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।

इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित भारतीय सेना, आईटीबीपी, चिकित्सा विभाग, पर्यटन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी व बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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*मुख्यमंत्री श्री धामी की नीति घाटी को बड़ी सौगात, सीमांत पर्यटन विकास हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं*

*नीति घाटी में पर्यटन विकास को नई उड़ान, मुख्यमंत्री श्री धामी ने की कई अहम घोषणाएं, बॉर्डर टूरिज्म और होम स्टे विकास को मिलेगा बढ़ावा*

जनपद चमोली की नीति घाटी में 31 मई से 2 जून तक आयोजित ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के पुरस्कार वितरण समारोह में वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र में पर्यटन विकास को नई गति देने हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका सुदृढ़ करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में जनपद चमोली के नीति, मलारी, कोशा, फरकिया, बाम्पा, गुरगुटी, कैलाशपुर एवं महरगांव में सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके अंतर्गत सामुदायिक होम स्टे निर्माण के साथ ग्रामीण पर्यटन हेतु आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि नीति घाटी के विभिन्न गांवों एवं प्रमुख पर्यटक स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए साइनज एवं व्यू प्वाइंट विकसित किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त जनपद चमोली के रिमखिम एवं बाड़ाहोती क्षेत्र में बॉर्डर टूरिज्म को विकसित करने के उद्देश्य से ‘सीमा दर्शन केंद्र’ का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने यह भी घोषणा की कि ग्राम गमशाली स्थित दुप्फूधार मैदान में आधारभूत सुविधाओं का विकास कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र में साहसिक पर्यटन एवं बड़े आयोजनों को बढ़ावा मिल सके।

मुख्यमंत्री श्री धामी की इन घोषणाओं से नीति घाटी सहित पूरे सीमांत क्षेत्र में पर्यटन, रोजगार एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
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*दृढ़ संकल्प के आगे नहीं कोई सीमा: अनुराग रावत ने “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” में दिखाई अदम्य इच्छाशक्ति*

चमोली*सेरेब्रल पाल्सी को चुनौती देकर अनुराग रावत ने “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” में पूरी की 10 किलोमीटर दौड़*

25 वर्षीय अनुराग रावत ने जनपद चमोली में 31 मई से 2 जून तक आयोजित हो रही “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” में अदम्य साहस, आत्मविश्वास और अटूट जज्बे का परिचय देते हुए लगभग 1 घंटा 45 मिनट में 10 किलोमीटर की कठिन दौड़ पूरी कर सभी प्रतिभागियों एवं दर्शकों को प्रेरित किया।

“Beyond Limits, Beyond the Canyon” के संदेश को साकार करते हुए अनुराग ने यह सिद्ध कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

मूल रूप से पौड़ी जनपद के निवासी तथा वर्तमान में दिल्ली में रह रहे अनुराग रावत ने cerebral palsy (सेरेब्रल पाल्सी) जैसी दिव्यांगता के बावजूद नीति घाटी की दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस कठिन दौड़ को सफलतापूर्वक पूरा किया।

चमोली जनपद स्थित नीति घाटी में आयोजित हो रही “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” के दौरान नीति घाटी के ऊंचे पहाड़, कठिन रास्ते और सीमित ऑक्सीजन जैसी विषम परिस्थितियों के बीच अनुराग का यह प्रदर्शन सभी के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।

अनुराग की इस उपलब्धि ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की क्षमता को सीमित नहीं कर सकती। उनके साहस, दृढ़ निश्चय और सकारात्मक सोच ने आयोजन में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरित किया। नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में उनका प्रदर्शन केवल एक दौड़ नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणादायक मिसाल बन गया।अनुराग ने बताया कि इससे पूर्व भी उन्होने कई प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग ले चुके हैं।

अनुराग ने कहा कि “सीमाएं केवल हमारे दिमाग में होती हैं। यदि संकल्प मजबूत हो, तो इंसान अपने शरीर को किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकता है।”

“नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन” के इस भव्य आयोजन में देशभर से उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली। सीमांत नीति घाटी में आयोजित इस एडवेंचर स्पोर्ट्स महाकुंभ में देश के 27 राज्यों से आए 1200 से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न श्रेणियों की प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अदम्य साहस, उत्साह और खेल भावना का परिचय दिया।
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*उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन मॉडल से रूबरू हुए श्रीलंका के अधिकारी*

देहरादून। नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (एनसीजीजी) के तत्वावधान में आपदा प्रबंधन विषय पर आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत श्रीलंका के 40 सिविल सेवा अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) का भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों ने राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए विकसित व्यवस्थाओं, तकनीकी नवाचारों, पूर्व चेतावनी प्रणालियों तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित पहलों की जानकारी प्राप्त की।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी श्री राजकुमार नेगी ने प्रतिभागियों को बताया कि राज्य में आपदाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र विकसित किया गया है। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों (डीईओसी) की भूमिका, चेतावनी प्रसारण प्रणाली, आपदा अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रयासों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। सूचना एवं चेतावनी संदेशों को अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध ढंग से पहुंचाने के लिए बहु-स्तरीय संचार व्यवस्था विकसित की गई है।

मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली पर चर्चा करते हुए श्री नेगी ने बताया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा उपग्रह आधारित अवलोकन प्रणाली, डॉप्लर वेदर रडार, स्वचालित मौसम केंद्र, स्वचालित वर्षामापी यंत्र तथा उन्नत मौसम मॉडलिंग तकनीकों के माध्यम से आंकड़े एकत्र किए जाते हैं। इन आंकड़ों का रियल-टाइम विश्लेषण कर विभिन्न स्तरों के मौसम पूर्वानुमान तैयार किए जाते हैं, जो विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में जोखिम प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड भू-स्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी) के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार ने राज्य में भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण हेतु किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयासों की जानकारी साझा की।

श्रीलंका में भी अत्यधिक वर्षा एवं भूस्खलन की घटनाएं आम होने के कारण प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यवस्थाओं में विशेष रुचि दिखाई और उत्तराखण्ड में अपनाई जा रही तकनीकों एवं मॉडलों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी उपस्थित रहे।

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*अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मजबूत होता है आपदा प्रबंधन : सुमन*
सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन कार्यक्रम आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के प्रभावी माध्यम हैं। विभिन्न देशों के अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान से संस्थागत दक्षता बढ़ती है तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अधिक समन्वित और प्रभावी दृष्टिकोण विकसित होता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में विकसित मॉडल और अनुभव अन्य देशों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, वहीं वैश्विक अनुभवों से सीखकर राज्य की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

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*क्षमता निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है एनसीजीजी : डॉ. ए.पी. सिंह*
एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ए.पी. सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्थापित नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस सुशासन, नीतिगत सुधार, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत एक प्रमुख संस्थान है। संस्थान अब तक 52 देशों के सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित कर चुका है तथा हजारों अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुका है। उन्होंने बताया कि श्रीलंका सरकार के साथ हुए समझौते के तहत आपदा प्रबंधन विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत यह अध्ययन भ्रमण आयोजित किया गया।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को गढ़ी कैंट स्थित स्वर्गीय हरबंश कपूर मेमोरियल कम्युनिटी हॉल में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूड़ी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूड़ी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने एक अनुशासित सैनिक, दूरदर्शी प्रशासक, आदर्श जनप्रतिनिधि तथा उत्तराखंड के विकास पुरुष के रूप में अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धेय खण्डूड़ी जी कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी, सादगी और राष्ट्रसेवा के ऐसे प्रतीक थे, जिनके जीवन से सार्वजनिक जीवन में शुचिता और समर्पण की प्रेरणा प्राप्त होती रहेगी।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने उनके सैन्य जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में अद्वितीय साहस, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। सेना के इंजीनियरिंग कार्यों में भी उन्होंने सीमांत क्षेत्रों के विकास और आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राष्ट्र के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया, जो उनकी कर्तव्यपरायणता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी खण्डूड़ी जी का जनसेवा का संकल्प निरंतर जारी रहा। वर्ष 1991 में गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्होंने संसद में पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को मजबूती से उठाया और पाँच बार सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए पहाड़ की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनके ओजस्वी विचारों और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता ने राज्य आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि खण्डूड़ी जी का व्यक्तित्व और उनका जीवन दर्शन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर खण्डूड़ी जी का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होता रहा, जिसने उनके सार्वजनिक जीवन को दिशा प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में खण्डूड़ी जी ने देश के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति देने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रशासन की आधारशिला बनाया तथा राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उच्च पदों पर रहने के बावजूद खण्डूड़ी जी ने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। वे सदैव आमजन के बीच रहे और उनकी समस्याओं के समाधान को अपनी प्राथमिकता मानते रहे। उनकी कार्यशैली ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासकों के लिए एक आदर्श स्थापित किया।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि श्रद्धेय खण्डूड़ी जी का निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके साथ एक युग का अवसान हुआ है, किंतु उनके विचार, आदर्श, कार्य और संस्कार सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से खण्डूड़ी जी के आदर्शों को आत्मसात करने तथा उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड के निर्माण हेतु निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।

श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती रितु खण्डूड़ी, पूर्व मुख्यमंत्री श्री भगत सिंह कोश्यारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, स्वामी रामदेव व विभिन्न साधु संत,गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।